सोमवार, 31 जुलाई 2017

किसानो को जिन्दा रहने के लिए कौरवो का विनाश करना होगा

राजेन्द्र यादव

बाराबंकी किसानो को अब धर्म युद्ध लड़ना होगा| किसानो को जिन्दा रहने के लिए इस धर्म युद्ध में कौरवो का विनाश करना होगा| यदि किसान धर्म युद्ध में कौरवो का विनाश नहीं कर पाते है तो आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा| उक्त विचार ग्राम अजगना जहागीराबाद में आयोजित अखिल भारतीय किसान सभा के किसान सम्मलेन में किसान सभा के प्रांतीय महामंत्री पूर्व विधायक राजेन्द्र यादव ने कही| पूर्व विधायक ने आगे कहा की आडानी, अम्बानी की नौकरी करने वाले सत्तारूढ़ दल के लोग किसानो का भला नहीं कर सकते है| इसलिए किसानो का कर्जा नहीं माफ़ कर रहे है| उद्योगपतियों का कर्जा माफ़ करने में यह भाजपा सरकार सबसे आगे है| सम्मलेन को संबोधित करते हुए किसान सभा के राज्य कार्यकारिणी सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने कहा की मोदी योगी सरकारे किसानो की जमीनों को बिकवा लेना चाहती है | इसीलिए किसानो को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य नहीं दिया जा रहा है| भारतीय कम्नुनिस्ट पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि किसानो को १० हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन देकर उनकी आत्म हत्याओ को रोका जा सकता है| सम्मलेन को डॉ. कौसर हुसैन, जिलाध्यक्ष नौजवान सभा सरदार भूपिंदर पाल सिंह, जिला महामंत्री पंडित प्रित्युश कान्त शुक्ल, प्रवीन कुमार, मुनेश्वर बक्श वर्मा, विनोद कुमार यादव आदि ने संबोधित किया| सम्मलेन सभा में पूर्व प्रधान अमर सिंह गुड्डू, संतराम, अमर सिंह, दलसिंगार, गिरीश चन्द्र, राजेश सिंह, रामनरेश वर्मा, पुष्पेन्द्र सिंह, अवधेश यादव, प्रदीप वर्मा, गिरीश चन्द्र आदि मौजूद रहे| अध्यक्षीय भाषण शिवदर्शन वर्मा ने दिया तथा संचालन किसान सभा जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने किया|

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (01-08-2017) को जयंती पर दी तुलसीदास को श्रद्धांजलि; चर्चामंच 2684 पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'