मंगलवार, 16 जनवरी 2018

उत्तर प्रदेश मेँ कठिन होती काँग्रेस की डगर

उत्तर प्रदेश मेँ काँग्रेस की राह किसी भी तरफ से आसान होती नहीँ दिख रही बल्कि दिन-ब-दिन यह डगर और कठिन ही होती चली जा रही है । प्रदेश प्रभारी और अध्यक्ष पद से मधुसूदन मिस्त्री और निर्मल खत्री को हटाकर गुलाम नबी आजाद और राजबब्बर को लाया गया तब सोचा गया था कि काँग्रेस यहाँ मजबूत होगी लेकिन राजबब्बर की कारगुजारियोँ से काँग्रेस कार्यकर्ताओँ मेँ ही असँतोष सीमाएँ लाँघता दिखाई दे रहा है । कुछ दिनो पहले प्रदेश अध्यक्ष द्वारा प्रखर समाजवादी और पूर्व मँत्री को अपमानित कर के मीडिया प्रभारी पद से हटाया गया वह भी काँग्रेस की महिला विधायक मोना मिश्रा द्वारा अपने अधिकारोँ का मीडिया विभाग मेँ अतिक्रमण करने के बाद , तब भी यह प्रकरण सोशल मीडिया मेँ काफी चर्चित हुआ था और इस न्यूज पोर्टल ने भी वह खबर आप लोगोँ तक पहुँचायी थी ।
उसके बाद कुछ अपने आसपास कुछ अल्पज्ञात चेहरोँ का घेरा बना लेने से सँघर्षशील कार्यकर्ताओँ से उनकी दूरियाँ बढने लगीँ । उसके कुछ ही दिन बाद काँग्रेस के पुराने और चर्चित नेता स्वयँ प्रकाश गोस्वामी को जन आन्दोलन समिति से हटाकर उनके कमरे मेँ ताला डलवा दिया गया जबकि इन्होने स्वयँ ही स्वयँप्रकाश गोस्वामी को यह पद सौँपा था । इतने पर ही राजबब्बर नहीँ रुके , उन्होने काँग्रेस के पुराने नेताओँ के पर कतरने शुरू किए । जिनके पर कतरे गए उनमेँ पूर्व मँत्री रामकृष्ण द्विवेदी से लेकर हनुमान त्रिपाठी तक के नाम शामिल हैँ ।
काँग्रेस जनोँ को एक झटका तब भी लगा जब दरबारी नाम के व्यक्ति को जिसे लखनऊ के प्रशासनिक गलियारोँ मेँ आर्थिक दलाल के रूप मेँ जाना जाता है उसे लाकर कोषाध्यक्ष का पद सौँप दिया । काँग्रेसजनो को यह जोर का झटका और जोर से तब लगा जब दरबारी के यहाँ एक जन्मदिन पार्टी मेँ प्रदेश अध्यक्ष ने खुद उसके घर जाकर कोषाध्यक्ष पद पर नियुक्तिपत्र जन्मदिन के तोहफे के रूप मेँ उसे पेश किया ।
यहाँ तक भी गनीमत थी , नगर निकाय चुनावोँ मेँ मेयर से लेकर सभासदोँ तक के टिकट बेचे जाने की खबरेँ सामने आने से राजबब्बर की ठेकेदार चौकडी एक बार फिर चर्चा मेँ आई । इस मामले मेँ तो काँग्रेस कार्यालय मेँ जूतमपैजार तक हुई और दूर तक इस घटना की गूँज सुनाई दी ।
कल फिर काँग्रेस की पतनशीलता लोगोँ को दिखाई दी जब पार्टी के नव निर्वाचित अध्यक्ष राहुल गाँधी पार्टी की कमान सँभालने के बाद पहली बार लखनऊ होकर अपने निर्वाचन क्षेत्र अमेठी गए लेकिन लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डे पर उनके स्वागत मेँ कुलजमा दो सौ कार्यकर्ता ही इकट्ठा हो पाए उनमेँ से भी पचास से ज्यादा लोग और गाडियाँ उन्नाव की पूर्व साँसद अनु टँडन लेकर आई थीँ ।
इस सँवाददाता ने इतनी कम भीड का कारण जानने के लिए कुछ प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओँ से बात की तो उनका साफ़ कहना था कि जब चँद ठेकेदार और दलाल ही पद पा रहे हैँ और अध्यक्ष जी की जेब भर रहे हैँ तो भीड भी वही इकट्ठा करेँ ।
इस बढते असँतोष और प्रदेश अध्यक्ष की कार्यशैली देखते हुए तो यही लग रहा है कि उत्तर प्रदेश काँग्रेस मेँ कभी भी बगावत का विस्फोट हो सकता है ऎसे मेँ 2019 काँग्रेस के लिए प्रतिकूल परिणाम भी दे सकता है ।

- भूपेंदर पाल सिंह

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