बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

योगी सरकार ने किसानों का सचिवालय मार्च रोका, किसान सभा के पूरे नेतृत्व समेत 500 से ज्यादा गिरफ्तार-राजन क्षीरसागर

योगी सरकार ने किसानों का सचिवालय मार्च रोका, किसान सभा के पूरे नेतृत्व समेत 500 से ज्यादा गिरफ्तार चारबाग से निकले 3,000 से ज्यादा किसान और मजदूर; एक दिन पहले अयोध्या और सोनभद्र में भी गिरफ्तारियाँ अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) और उसकी प्रदेश इकाई उत्तर प्रदेश किसान सभा के लाल झंडे के नीचे आज 3,000 से ज्यादा किसानों, बटाईदारों और ग्रामीण मजदूरों ने लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन से सचिवालय की ओर मार्च निकाला। भाजपा सरकार की पुलिस ने मार्च को रेलवे स्टेशन चौक पर रोक दिया और 500 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार लोगों में पूरा नेतृत्व शामिल है: राष्ट्रीय अध्यक्ष राजन क्षीरसागर, महासचिव रावुला वेंकैया, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष छितर सिंह, प्रदेश अध्यक्ष इम्तियाज बेग और प्रदेश महासचिव, पूर्व विधायक राजेंद्र यादव।वही किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष रणधीर सिंह सुमन अमित यादव सहित सैकडों लोगों को गिरफ्तार नहीं कर पाई क्यो कि पुलिस के पास बस नहीं थी। तब हम लोग ईको गार्डेन जाकर बाहर बैठे रहे। मार्च को नाकाम करने की सोची-समझी कोशिश उत्तर प्रदेश पुलिस ने मार्च को नाकाम करने की जानबूझकर कोशिश की। 6 अक्टूबर को अयोध्या में अशोक तिवारी और किसान सभा के दूसरे नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, और सोनभद्र से भी गिरफ्तारियों की खबर है। मार्च रोके जाने पर किसानों और नौजवानों के गुस्से के बीच पुलिस से धक्का-मुक्की हुई। नेताओं ने दमन की निंदा की और गिरफ्तारी दी। किसान सभा के दिवंगत नेता अतुल कुमार अंजान की बहनें श्रीमती रत्नासिंग और श्रीमती किरण सिंग भी मार्च में शामिल हुईं और किसान सभा को समर्थन दिया। राजन क्षीरसागर ने कहा, "जिस सरकार के पास किसान के सवालों का जवाब नहीं होता, वह पुलिस भेजती है। मार्च को चौक पर रोका जा सकता है, पर धान के दाम, गन्ने के बकाये और काम की माँग को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।" उन्होंने चेतावनी दी, "लखनऊ किसान सभा की जन्मभूमि है, जिसने 150 साल के अंग्रेजी राज को ग्यारह साल में उखाड़ फेंका। किसानों के गुस्से का ज्वालामुखी फासीवादी मानसिकता वाली योगी और मोदी सरकार को भी उखाड़ फेंकेगा।" जो सरकारें सुनना नहीं चाहतीं मार्च प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित 47 सूत्रीय माँग-पत्र लेकर चला था, जो प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही को सौंपा जाना था। माँग-पत्र मोदी सरकार और योगी आदित्यनाथ की भाजपा सरकार, दोनों को कठघरे में खड़ा करता है। मोदी सरकार ने 2014 में लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफे का वादा किया और एक भी सीजन में नहीं निभाया। उसने गेहूँ किसान को 25 रुपये प्रति क्विंटल दिए, जो एक प्रतिशत से भी कम है, जबकि डीजल 7.50 रुपये प्रति लीटर महँगा हो गया। धान का दाम 2,441 रुपये है, जबकि सी2+50 प्रतिशत पर यह 4,508 रुपये बनता है, यानी हर क्विंटल पर 2,067 रुपये की लूट। उसने मनरेगा खत्म कर दिया और उत्तर प्रदेश की मजदूरी 300 रुपये रोज तय की, जो देश में सबसे कम है। प्रदेश सरकार ने 425 लाख टन गेहूँ की पैदावार का अनुमान लगाया, 50 लाख टन खरीद का लक्ष्य रखा और खरीदा लगभग 20 लाख टन। उसने गन्ना किसान को पाँच पेराई सत्रों में केवल 50 रुपये प्रति क्विंटल दिए। सितंबर के मध्य तक एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया था और नया दाम अब तक घोषित नहीं हुआ। जून में बारिश 54 प्रतिशत कम रही और 37 जिलों में औसत से कम, फिर भी सूखा घोषित नहीं हुआ। चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में प्रदेश की मतदाता सूची से 2.04 करोड़ नाम काट दिए गए, यानी हर सौ में तेरह मतदाता। अब वोट भी छीना जा रहा है। माँगें सभी गिरफ्तार साथियों की तुरंत रिहाई और सारे मुकदमों की वापसी। सी2+50 प्रतिशत पर एमएसपी का कानून: धान 4,508 रुपये, गेहूँ 4,762 रुपये, आलू 2,700 रुपये। गन्ने का दाम 738 रुपये प्रति क्विंटल, और पूरा बकाया ब्याज समेत। संपूर्ण कर्जमाफी, और एनबीएफसी तथा माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की लुटेरी वसूली पर रोक। 15 अक्टूबर तक सूखे की घोषणा, और 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा। मनरेगा की बहाली, और 700 रुपये रोज पर 200 दिन काम। बिजली का निजीकरण नहीं, स्मार्ट मीटर नहीं, जबरन भूमि अधिग्रहण नहीं। एसआईआर पर रोक, और गलत कटे हर नाम की बहाली। गिरफ्तारियों से एक भी माँग हल नहीं होगी। किसान सभा ने 30 दिन के भीतर लिखित उत्तर माँगा है। अगर दोनों सरकारों ने दमन और चुप्पी का रास्ता चुना, तो यह संघर्ष प्रदेश की हर तहसील और जिले तक, और दिल्ली तक जाएगा।

1 टिप्पणी:

बेनामी ने कहा…

भाजपा सरकार पूंजीपतियों के हित साधन में लगी हुई है

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