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शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

बलराम कन्हैया का अवतार हो चुका है !

हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार जब-जब धर्म की हानि होती है तो अवतार आते हैं. कंस के इस राज्य में अवतार आ चुके हैं. स्वागत करें.
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ।

 Whenever and wherever there is a decline in religious practice, O descendant of Bharata, and a predominant rise of irreligion at that time I descend Myself.

हे भारत जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब ही मैं अपने रूप को रचता हूँ अर्थात साकार रूप से लोगों के सम्मुख प्रकट होता हूँ ।
बाबा तुलसी लिख चुके हैं. यह बात गलत नहीं होगी.
जब-जब होई धरम के हानि....!
बढहिं अधम असुर अमिभानी...!!
तब-तब प्रभु धर विविध शरीरा...!
हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा......!!

अर्थात जब जब इस धरा धाम पर पाप अधिक बढ़ जाता है तब इस धराधाम में धर्म व राष्ट्र रक्षा के लिए परमात्मा को आना पड़ता है।

ब्रहमांड के सभी देवता ऋषि मुनि सब बैठे थे. पृथ्वी गृह की बात आ गयी. बातों-बातों में नारद मुनि पहुँच गए. उन्होंने सभी देवताओं और ऋषि मुनियों को सूचना दी कि जम्बो द्वीप में एक नागपुरी गैंग आ गया है जो आये दिन लोगों को परेशान करता है, जाति और धर्म के नाम पर लोगों को कारागार में निरुद्ध कर देता है. पृथ्वी गृह के जम्बो द्वीप पर त्राहिमाम-त्राहिमाम हो रहा है. कोई सुनने वाला नहीं है. धर्म का नाश हो चूका है. अधर्म का शासन हो चूका है. कोई व्यक्ति अगर कुछ बोलने की कोशिश करता है तो यह अधर्मियों का गिरोह तू मुल्ली है, तू गद्दार है, तू देशद्रोही है कहकर अपमानित करते हैं और फिर देशद्रोह का आरोप लगा कर गिरफ्तार कर लेते हैं. स्तिथि यहाँ तक ख़राब हो चुकी है कि जनता कहने लगी है कि कंस का शासन इस कंस से अच्छा था. देवताओं के चेहरे अचानक खौफ में आ गए, बैठे हुए देवताओं ने कहा की इस भारत खंडे में हमने कई बार असुरों का विनाश किया है. अधर्म का नाश कर धर्म का शासन स्थापित किया है. लगता है कि इस जम्बू द्वीप में पुन: किसी अवतार को भेजने की जरूरत हो रही है. भारत में मुसलमान भी है, इसाई भी, हिन्दू भी है, यहूदी भी है या यूँ कहिये दुनिया भर के विभिन्न धर्मों के मतावलंबी इस भूखंड पर रहते हैं. कभी इस तरह का शासन नहीं आया है. फर्जी तरीके से यह आरोप लगे जाए की तू पाकिस्तानी है, तूने नारा लगाया है और फिर गिरफ्तार करके न्याय के मंदिर में उपस्थित कराने से पूर्व मंदिर के कर्मचारियों से पिटवाते हैं. यह बातें जानकार उस सभा में सन्नाटा छा गया. तरह-तरह की राय आने लगी की जम्बू द्वीप में कैसे अमन चैन स्थापित किया जाये. अंत में सारे देवता ऋषि मुनि परेशान हैरान हुए और यह तय हुआ कि अब तो विष्णु को पुन: अवतार लेना पड़ेगा. विष्णु ने कहा की अब मै विष्णुमोहिनी नहीं बनूँगा लेकिन जम्बू द्वीप में शांति स्थापना के लिए मै पृथ्वी गृह पर जाऊँगा और कंस का वध होगा. पापाचारी, लोकाचारी, भ्रष्टाचारी, अंग्रेजों के मुखबिर गैंग का विनाश करूँगा. सारे ऋषि मुनियों और देवताओं ने एवमस्त कहा. तुरंत उनका अवतार जवाहर लाल नेहरु विश्विद्यालय के छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार के रूप में हो जाता है और उनके सहायक के रूप में उमर खालिद बलराम के रूप में प्रकट हो जाते हैं. बलराम भागे हुए हैं. कन्हैया अंडा सेल में हैं. अब देखिये आगे-आगे क्या होता है. कंस जीतेगा या कन्हैया और बलराम. कलियुग है परिणाम का हमको भी पता नहीं लेकिन इंतज़ार है. 

सुमन 

रविवार, 19 फ़रवरी 2012

क्या आर एस एस के कार्यकर्ता आतंकवादी गतिविधियों में भाग लेते हैं

आज से पांच वर्ष पूर्व पानीपत के पास समझौता एक्सप्रेस में बम विस्फोट हुआ था जिसमें 68 लोग मारे गए थे। इस केस में स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा तथा देवेन्द्र गुप्ता कारागार में निरुद्ध हैं। राम जी व संदीप को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है और इनके ऊपर दस-दस लाख का इनाम भी घोषित है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इंदौर निवासी कमल चौहान को गिरफ्तार किया है। कमल चौहान ने मीडिया के समक्ष कहा है कि मैंने जो किया वह अपनी मर्जी से किया राष्ट्रीय जांच एजेंसी का कहना कि समझौता एक्सप्रेस की जिस बोगी में बम विस्फोट हुआ था उस बोगी में दिल्ली में कमल चौहान ने बम प्लांट किया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पंचकुला की अतिरिक्त सत्र न्यायधीश कंचन माही की अदालत में पेश किया जहाँ पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी को पुलिस कस्टडी रिमांड मिल गया।
आरोपी कमल चौहान के पिता राधेश्याम ने कहा है कि कमल चौहान आर एस एस के माध्यम से समाज सेवा कर रहा था लेकिन इस तथ्य के विपरीत वह सुनील जोशी का नजदीकी था। सुनील जोशी का कई बम विस्फोटो में नाम आया था। बाद में सबूत मिटाने के लिये उसके ही साथियों ने उसकी हत्या कर दी थी। अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में आर एस एस की विद्यार्थी शाखा स्थापित करने का काम करने के लिये कमल चौहान को ही जिम्मेदारी दी गयी थी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का कहना है कि कमल चौहान हमारा जिम्मेदार कार्यकर्ता नहीं था।
अब यह सवाल उठता है कि मक्का मस्जिद, मालेगांव, समझौता एक्सप्रेस, अजमेर शरीफ जैसे बम कांडों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और उसके अनुसांगिक कार्यकर्ताओं के नाम बराबर आये हैं लेकिन उसके ऊपर आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने के बहुत सारे प्रमाण मिलने के बाद भी प्रतिबन्ध की बात नहीं की जा रही है। आज जरूरत इस बात की है कि देश की एक और अखंडता की हिफाजत के लिये मजबूत राष्ट्र के लिये ऐसे देशद्रोही संगठनो पर प्रतिबन्ध लगाया जाए अन्यथा इनकी नीतियाँ देश की गंगा-जमुनी संस्कृति को कमजोर करेंगी अभी कुछ दिन पूर्व इनके कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तानी झंडा फहराकर हिंसा भड़काने की कोशिश की थी लेकिन जांच में यह तथ्य तुरंत प्रकाश में आ गया कि पाकिस्तानी झंडा अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्तियों ने नहीं फ़हराया था बल्कि दंगा करने के लिये तथा अल्पसंख्यकों को बदनाम करने के लिये आर एस एस के लोगों ने ही झंडा फ़हराया था।

-मुहम्मद इमरान
आज
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