रविवार, 1 मार्च 2026

दुबई, बहरीन, अबुधाबी, मनामा–ये सारे नाम दुनिया में ऐशगाह है - खामेनेई जिंदा नहीं है

दुबई, बहरीन, अबुधाबी, मनामा–ये सारे नाम दुनिया में ऐशगाह के रूप में मशहूर हैं। दुनिया के रईस अपनी गर्लफ्रेंड या एस्कॉर्ट्स के साथ रंगरेलियां मनाने वहां जाते हैं। यहां तेल कुबेर शेखों की रंगीनियां परवान चढ़ती हैं। ईरान ने जब इन शानोशौकत के किलों पर वार किया तो जंग का असल चेहरा दिखने लगा। युद्ध विराम और शांति प्रस्तावों पर बात होने लगी। लेकिन, कल अमेरिकी टॉमाहॉक मिसाइलों ने ईरान में लड़कियों के जिस स्कूल में 80 से ज्यादा लाशें गिरायीं, उस पर कोई बात नहीं कर रहा। हम सब ग़ज़ा के गुनहगार हैं। उन 70 हज़ार से ज़्यादा बेकसूर लोगों के, जिन्हें इजरायल ने मारा। जिस सऊदी अरब ने एक महीने पहले ईरान का साथ देने का वादा किया था, वही अब उसके ख़िलाफ़ खड़ा है। ईरान की जंग अब 12 देशों को लपेटे में ले चुकी है। वर्ल्ड वॉर 2 के बाद ये सबसे बड़ी जंग है। ईरान ने दिखा दिया कि ख़ामेनेई रहें या न रहें, जुल्मियों का अंत होकर रहेगा। समूचे मिडिल ईस्ट में एक भी मुल्क ऐसा नहीं, जहां की अवाम अपनी हुकूमत से खुश हो। ईरान में भी हजारों लोग मिलेंगे, जो अपने निज़ाम से खुश नहीं हैं। भारत में भी। क्योंकि, लोकतंत्र का वज़ूद किसी बाहरी देश की ताकत, दौलत और तलवार की धार पर टिका है। इसे खारिज़ करने के लिए ईरान बनना होगा। खामेनेई कुछ इसी तरह की बात कह रहे हैं। वे जिंदा नहीं हैं। -सौमित्र राय

शनिवार, 28 फ़रवरी 2026

कम्युनिस्ट आंदोलन के हीरो अतुल कुमार अंजान

शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की गोद में खेलने और पलने वाले। भारत के कम्युनिस्ट आंदोलन में हिंदी क्षेत्र के सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली चेहरों में से एक कॉमरेड अतुल कुमार अंजान का जन्म बिहार के बांका ज़िले में हुआ, हालांकि उनकी कर्मभूमि उत्तर प्रदेश रही। उनके पिता ए.पी. सिंह लखनऊ के चर्चित डॉक्टर थे और उनका जुड़ाव शहीद-ए-आजम Bhagat Singh के क्रांतिकारी संगठन Hindustan Socialist Republican Association से था। उनके श्वसुर Indradeep Sinha 1967 में बिहार की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार में मंत्री रहे और उनका गहरा संबंध किसान आंदोलन के महानायक Swami Sahajanand Saraswati से था। स्पष्ट है कि अतुल अंजान को क्रांतिकारी और किसान आंदोलन की विरासत घर से ही मिली थी। 1978 में वे Lucknow University छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए और चार बार इस पद पर जीत हासिल की। उस समय परिसर में नारा गूंजता था— “मेरी जान, तेरी जान — अतुल अंजान!” 1979 में वे All India Students’ Federation के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। हिंदी पट्टी के किसी बड़े विश्वविद्यालय में एक कम्युनिस्ट का इस तरह लोकप्रिय होना असाधारण घटना थी। वे Communist Party of India (सीपीआई) के राष्ट्रीय सचिव तथा All India Kisan Sabha के महासचिव रहे। 1997 से किसान सभा से उनका गहरा जुड़ाव था। किसानों के मुद्दों पर गठित स्वामीनाथन आयोग में वे किसानों के एकमात्र प्रतिनिधि थे। घोसी लोकसभा क्षेत्र से उन्होंने चार बार चुनाव लड़ा। भले ही वे संसद नहीं पहुंच सके, लेकिन बिना किसी सदन के सदस्य बने भी वे राष्ट्रीय स्तर के चर्चित नेता रहे—यह उनकी जनस्वीकृति और वैचारिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। कम्युनिस्ट आंदोलन में अक्सर दक्षिण भारतीय नेताओं का प्रभाव रहा है, लेकिन हिंदी क्षेत्र में P. C. Joshi के बाद यदि कोई सर्वाधिक चर्चित और प्रभावशाली चेहरा उभरा, तो वह अतुल अंजान थे। प्रवाहमान, मुहावरेदार और प्रभावशाली हिंदी में बोलना उनकी विशेषता थी। उनके भाषणों में लोककथाएँ, मुहावरे और तर्क का अद्भुत संगम होता था। टीवी बहसों में वे वामपंथ की मुखर आवाज़ के रूप में जाने जाते थे और एंकरों को तथ्यात्मक चुनौती देने का साहस रखते थे। अपने भाषणों में वे दो प्रमुख चुनौतियों— नवउदारवादी आर्थिक नीतियाँ एवं सांप्रदायिकता को लगातार चिन्हित करते थे। वे युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और मार्क्सवादी दर्शन से जुड़ने का आह्वान करते थे। उन्होंने पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस के माध्यम से कई क्लासिक पुस्तकों के पुनर्प्रकाशन में भूमिका निभाई। अपने अंतिम दिनों में मृत्युशय्या से उन्होंने वाम आंदोलन का प्रिय गीत गाया— “तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी के गीत में यक़ीन कर, अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर।” ‘स्वर्ग’ को ज़मीन पर उतारने का सपना देखने और उसके लिए आजीवन संघर्ष करने वाले नेता अतुल अंजान का 3 मई की सुबह लखनऊ में निधन हो गया। वे 70 वर्ष के थे और लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे। हिंदी पट्टी के इस करिश्माई कम्युनिस्ट नेता को लाल सलाम। -भवेश भारद्वाज

कथित लोमड़ी रुपी सरकार ने मंदिरों को सबसे ज्यादा गिराया है। विधर्मी मुफ़्त बदनाम है

हिन्दू ओं की डबल इंजन सरकार शंकराचार्य मठ की 4 मंजिला भवन पर चला बुलडोजर प्रशासन के अनुसार, मठ परिसर में लगभग 10 से 15 हजार वर्गफुट क्षेत्र मे निर्माण था गिरा दिया गया है। मजेदार बात यह है कि कथित लोमड़ी रुपी सरकार ने मंदिरों को सबसे ज्यादा गिराया है। विधर्मी मुफ़्त बदनाम है।

ईरान के हमले से इजराइल चिल्लाया ट्रम्प रोया उसके नालायक नाजायज पुत्र खामोश

ईरान के हमले से इजराइल चिल्लाया ट्रम्प रोया उसके नालायक नाजायज पुत्र खामोश ईरान का पलटवार : कई टार्गेट्स निशाने पर लगे। इस बार Surprise का एलिमेंट नहीं था। ईरान जानता था कि हमला कभी भी हो सकता है। इसलिए रिस्पांस भी तुरंत हुआ है। ईरान ने पहले ही कहा था कि यह युद्ध सारे खाड़ी क्षेत्र में फैलेगा। UAE, Qatar, Saudi Arabia, Jordan में अपने नागरिकों को दी चेतावनी से यह साफ़ है कि इन देशों के अमेरिकन बेसेज पर कभी भी हमला हो सकता है।

शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026

ये मोदी और संघ के मित्र हैंअनिल अंबानी लूट में सबसे आगे -

ये मोदी और संघ के मित्र हैं - अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) के खिलाफ CBI ने धोखाधड़ी का एक नया मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनी ने साल 2013 से 2017 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) के साथ 2,220 करोड़ रुपए से ज्यादा की धोखाधड़ी की है। CBI के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने बैंक से लोन लिया, लेकिन उस पैसे का इस्तेमाल तय काम के लिए करने के बजाय अपनी ही दूसरी कंपनियों (रिलेटेड पार्टीज) में फर्जी ट्रांजैक्शन दिखाकर डायवर्ट कर दिया। जांच में सामने आया है कि इस हेरफेर की वजह से बैंक ऑफ बड़ौदा को 2,220 करोड़ रुपए से ज्यादा का घाटा हुआ है। हाईकोर्ट से स्टे हटने के बाद कार्रवाई अधिकारियों के मुताबिक, अनिल अंबानी की कंपनी का यह खाता 2017 में ही एनपीए (NPA) घोषित हो चुका था। हालांकि, अनिल अंबानी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद कोर्ट ने इस खाते को 'फ्रॉड' घोषित करने पर रोक लगा दी थी। यह स्टे 23 फरवरी 2026 को हटा लिया गया। स्टे हटते ही बैंक ऑफ बड़ौदा ने शिकायत दर्ज कराई और सीबीआई ने तुरंत एक्शन लेते हुए केस दर्ज कर लिया। कहां गया लोन का पैसा? शिकायत के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM), रिलायंस इंफ्राटेल (RITL) और रिलायंस टेलीकॉम (RTL) ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कुल 31,580 करोड़ रुपए जुटाए थे। इसमें से: 6,265.85 करोड़ रुपए दूसरे बैंकों के लोन चुकाने में खर्च किए गए। 5,501.56 करोड़ रुपए अपनी ही जुड़ी हुई कंपनियों को दिए गए। 3,674.85 करोड़ रुपए फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए, जिन्हें तुरंत निकालकर दूसरी पार्टियों को भुगतान कर दिया गया। बैंक का कहना है कि यह साफ तौर पर लोन की शर्तों का उल्लंघन है। रिलायंस इंफ्राटेल द्वारा जुटाए गए 1,783.65 करोड़ रुपए का इस्तेमाल भी RCOM ने अपनी देनदारियां चुकाने या जुड़ी हुई कंपनियों को ट्रांसफर करने में किया। जांच में हुआ खुलासा 5 जून 2017 को इस खाते को एनपीए घोषित किया गया था, क्योंकि कंपनी लोन चुकाने में नाकाम रही थी। बाद में हुई जांच में पुष्टि हुई कि फंड के साथ हेराफेरी की गई है और यह सब जानबूझकर धोखाधड़ी की नीयत से किया गया। FIR में यह भी कहा गया है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों ने एक सोची-समझी आपराधिक साजिश के तहत बैंक को नुकसान पहुंचाया और खुद को फायदा देने के लिए पैसों का गबन किया। SBI के केस से अलग है मामला SBI पहले से ही 11 बैंकों के समूह (कंसोर्टियम) की अगुवाई कर रहे एसबीआई (SBI) की शिकायत पर RCOM के खिलाफ एक केस दर्ज कर चुकी है। हालांकि, बैंक ऑफ बड़ौदा उस ग्रुप का हिस्सा नहीं था। CBI ने साफ किया कि यह बैंक ऑफ बड़ौदा, तत्कालीन विजया बैंक और देना बैंक से लिए गए अलग लोन का मामला है। -जगदीश्वर चतुर्वेदी

खुदा इन्हें माफ कर - रिजवान मुस्तफा

या रब्बुल आलमीन… यह धरती तूने हमें अमानत में दी है। यह सरज़मीन हमारे बुज़ुर्गों की दुआओं से बसी है, शहीदों के कुर्बानियों से पाक हुई है। अगर आज हमारे दिलों में बेचैनी है, तो इसलिए कि हमें अपनी पहचान से मोहब्बत है। हम अपने वतन को किसी और के नाम में ढलता हुआ नहीं देख सकते। ऐ मालिक… हमारे दिलों से नफ़रत निकाल दे, लेकिन हमारी गैरत सलामत रख। हमारी मोहब्बत वतन से कम न हो, और हमारी इंसानियत भी कम न हो। भारत एक ख़ूबसूरत गुलदस्ता है — जहाँ हर रंग की खुशबू है। इसे एक रंग में रंग देने की कोशिश उसकी रूह को छोटा कर देगी। या अल्लाह… हमारे मुल्क को अमन दे, इंसाफ़ दे, और ऐसी रहनुमाई दे जो इसे अपने पैरों पर खड़ा रखे न कि किसी और की छाया में।

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

कम्युनिस्ट नेता वेद प्रकाश वेद का निधन

कम्युनिस्ट नेता वेद प्रकाश वेद का निधन वह उ प्र नौजवान सभा के महामंत्री रहे थे। कम्युनिस्ट आंदोलन में वह कई बार जेल गए थे। किसान सभा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बडे नेता थे। उनका निधन प्रदेश कम्युनिस्ट आंदोलन की बड़ी छति है वेद प्रकाश वेद जन्म 04-08-1945 मृत्यु 25-02-2026 जन्म स्थान: राजपुर कलां जिला: मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश पिता का नाम: श्री सुचेत सिंह पत्नी: गृहिणी संतान: तीन पुत्रियाँ और दो पुत्र छोड़ गए हैं।

बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के दिग्गज नेता आर. नल्लाकन्नू का निधन

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के दिग्गज नेता आर. नल्लाकन्नू कका निधन जन्म 26 दिसंबर 1925 – मृत्यु 25 फरवरी 2026) एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे। वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु की भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व राज्य सचिव थे । 2018 में, नल्लाकन्नू ने मदुरै में व्यक्तिगत रूप से एक अदालती मुकदमा लड़ा और उच्च न्यायालय में जीत हासिल की। ​​अदालत ने उनके पैतृक स्थान की थामिरबरानी नदी से रेत निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया । 2 दिसंबर 2010 को, अदालत ने इस नदी से 5 साल के लिए रेत निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया। उन्होंने कई भूख हड़तालें कीं, जिनमें से कुछ 20 दिनों से अधिक समय तक चलीं। बीजिंग यात्रा के दौरान पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के उपराष्ट्रपति ने उन्हें सम्मानित किया। नल्लाकन्नू ने तूतीकोरिन जिले के श्रीवैकुंठम की एक सेवानिवृत्त स्कूल प्रधानाध्यापिका रंजीथम अम्माल से शादी की , जिनसे उनकी दो बेटियाँ थीं। रंजीथम का 2016 में चेन्नई में 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया। तमिलनाडु के राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला द्वारा सहयोग पुरस्कार पुरस्कार (14 अगस्त 2007) सार्वजनिक जीवन में योगदान के लिए अंबेडकर पुरस्कार (2007) अखिल भारतीय महात्मा गांधी सामाजिक कल्याण मंच से सामाजिक सेवा के लिए गांधीवादी पुरस्कार (3 अक्टूबर 2008) जिला लेखक संघ की ओर से जीवा पुरस्कार (21 जनवरी 2009)

मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

वाह साथी अरविन्द राजस्वरुप

स्वागतयोग्य और विलक्षण ! शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के संबंध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य समिति की ओर से सचिव कामरेड Arvind Raj Swarup Cpi का जो बयान आज जारी हुआ है वह स्वागतयोग्य तो है ही , साथ ही विलक्षण भी है । द्वंदात्मक भौतिकवाद के फलसफे पर यकीन करने वाली कम्युनिस्ट पार्टी का यह बयान कई मायनों में बहुत ही महत्वपूर्ण है । मेरे लिए ऐसा बयान बहुप्रतीक्षित भी है । फासिस्ट सत्ता द्वारा द्वेषपूर्वक नागरिकों के उत्पीड़न की किसी भी घटना पर कम्युनिस्ट आंदोलन निरपेक्ष नहीं रहना चाहिए और ताजा बयान से सीपीआई की यूपी स्टेट कमेटी ने अपने इसी कम्युनिस्ट दायित्व का शानदार परिचय दिया है । बयान को सीधे तौर पर शंकराचार्य का समर्थन नहीं कहा जा सकता है और न ही कम्युनिस्ट पार्टी के लिए उनसे हर बात पर सहमत होना संभव है । बयान यूपी की फासिस्ट सत्ता यानी योगी सरकार के विरोध में है, सत्ता के दुरुपयोग के विरोध में है और नागरिकों के असहमति के अधिकार का समर्थन करता है । किसी भी धर्म के अनुयाई या आचार्य के प्रति राज्य सत्ता यदि किसी बदले की भावना से कानून और मशीनरी का दुरुपयोग करती है तो हर कम्युनिस्ट का कर्तव्य है कि वह उसका विरोध करे । भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने इस मामले में पहल कर प्रदेश के कम्युनिस्ट आंदोलन की ओर से शानदार कदम उठाया है । -मधुवन दत्त चतुर्वेदी

शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

शंकराचार्य के खिलाफ पास्को एक्ट का मुकदमा दर्ज करने का आदेश - गिरफ्तारी की पूर्ण सम्भावना - क्या बुलडोजर एक्शन होगा

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज होगी FIR, यौन शोषण के मामले में कोर्ट ने दिया आदेश प्रयागराज की एडीजे रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश दिए हैं. अर्जी आशुतोष ब्रह्मचारी ने धारा 173(4) के तहत दाखिल की थी. दोनों नाबालिगों के बयान भी अदालत में दर्ज हुए थे. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को फर्जी बताते हुए कहा कि सच्चाई सामने आएगी और वह कानूनी रूप से मामले का सामना करेंगे.

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

"PM is Compromised" के नारे लगे ए आई समिट में

राजधानी के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में चल रहे हाई-प्रोफाइल 'एआई इम्पैक्ट समिट' के दौरान आज उस वक्त हड़कंप मच गया, जब यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा घेरा तोड़कर परिसर के भीतर प्रवेश कर लिया. प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आक्रामक नारेबाजी की और "PM is Compromised" के नारे लगाए. जिस समय यह विरोध प्रदर्शन हुआ, उस समय समिट में देश-विदेश के कई दिग्गज और प्रतिनिधि मौजूद थे. यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता अचानक बैनर-पोस्टर लेकर मुख्य हॉल के पास पहुंच गए. सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हरकत में आते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और परिसर से बाहर निकाला.
Share |