लो क सं घ र्ष !
लोकसंघर्ष पत्रिका
शुक्रवार, 20 मार्च 2026
रसोई गैस संकट : इस तरह क्यों थूकिये कि मुंह पर वापस आये?
रसोई गैस संकट : इस तरह क्यों थूकिये कि मुंह पर वापस आये?
निर्मल रानी
अमेरिका, इस्राईल व ईरान के बीच छिड़े युद्ध के बीच पूरा विश्व कच्चे तेल व गैस की आपूर्ति को लेकर चिंतित है। युद्ध छिड़ते ही भारत में भी इसका प्रभाव साफ नजर आने लगा। अमेरिका, इस्राईल व ईरान युद्ध के कारण ईरान के नियंत्रण वाले स्ट्रेट ऑफ हारमूज में शिपिंग रुक गई है। गौरतलब है कि भारत मध्य पूर्व से अपनी 60 से लेकर 90% तक एल पी जी गैस व कच्चे तेल का आयात इसी मार्ग से करता है। स्ट्रेट ऑफ़ हारमूज जल मार्ग बाधित होने के कारण ही सरकार ने घरेलू गैस उपयोगको प्राथमिकता देते हुये कामर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति लगभग बंद कर दी है। साथ ही घरेलू सिलेंडर के दाम में 60 रुपये जबकि कमर्शियल में 115 रूपये तक की बढ़ोतरी की भी की गयी है। इस दौरान रसोई गैस के लिये जगह जगह लोगों की कतारें देखने को मिली। कहीं कहीं से तो ब्लैक मार्केटिंग की खबरें भी सुनाई दीं। लोगों में गैस की किल्लत की शंका से दहशत फैल गयी। इससे विशेषकर व्यवसायिक क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ क्योंकि लगभग 90% होटल-रेस्तरां कमर्शियल एल पी जी सिलेंडर पर निर्भर हैं। राष्ट्रीय रेस्टॉरेंट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया ने इसे एक ऐसा संकट बताया जो 5.7 ट्रिलियन रुपये टर्नओवर और 80 लाख नौकरियों वाले वर्ग को खतरे में डाल रहा है। देश के अनेक होटल्स व रेस्तरां में मेन्यू में कटौती करते हुये रोटी, डोसा, पूरी, फ़ाई सामग्री, चाय-कॉफ़ी, हॉट ड्रिंक्स आदि हटा दिए गए। इसके बजाये केवल राइस-दाल, सैंडविच या कोल्ड ड्रिंक्स आदि ही परोसे जा रहे हैं। उदाहरण स्वरूप बेंगलुरु व चेन्नई सहित तमिलनाडु में हजारों छोटे रेस्त्रां पूरी तरह या कहीं कहीं आंशिक रूप से बंद हो गये। बेंगलुरु होटल एसोसिएशन के अनुसार इस संकट से औसतन 25-30 प्रतिशत का राजस्व घाटा हुआ है। सबसे ज्यादा मार भोपाल में पड़ी जहाँ 40 प्रतिशत व्यापार प्रभावित हुये। कई लोगों ने तो अपनी दुकानें भी बंद कर दीं। कुछ होटल व रेस्त्रां इंडक्शन या इलेट्रिक ओवन का प्रयोग करने लगे हैं। अचानक इंडक्शन की बढ़ती मांग के चलते कई जगहों से तो इंडक्शन व स्टोव के भी आउट ऑफ़ स्टॉक होने की खबरें आई हैं।
इस संकट का सामना करने के लिये सरकार द्वारा रिफाइनरी उत्पादन 25 प्रतिशत तक बढ़ने का समाचार है। जबकि कुछ राज्यों में केरोसिन व कोयला आपूर्ति करने की अस्थायी अनुमति भी दी गयी है। यदि आगे भी यही स्थिति बानी रही तो रेस्टॉरेंट इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर बंदी और बेरोजगारी का खतरा है। संकट की इस घड़ी में देश के अनेक नेता संसद से सड़कों तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2018 में विश्व जैव ईंधन दिवस के
अक्सर पर बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में दिये गये उस 'दिव्य ज्ञान' को याद कर रहे हैं जिसमें उन्होंने एक ऐसे चायवाले की कहानी सुनाई थी जो नाले से निकलने वाली गैस से चाय बनाता था। इस कार्यक्रम में उन्होंने बायो ईंधन की संभावनाओं पर बात करते हुए एक चाय वाले की कहानी का जिक्र किया था जो गंदे नाले से निकलने वाली गैस का इस्तेमाल करके चाय बनाता था। उन्होंने बताया था कि एक छोटे शहर में नाले के पास चाय का ठेला लगाने वाला कोई व्यक्ति था। उस नाले से दुर्गंध और गैस निकलती थी, तो उसने सोचा कि इस गैस का इस्तेमाल क्यों न करें। उसने एक बर्तन को उल्टा करके उसमें छेद किया, पाइप डाला, और नाले की गैस को पाइप के जरिए अपने चूल्हे तक पहुंचाया। फिर उसी गैस से चाय बनाने लगा। मोदी जी ने इसे "सिपल सी टेक्नोलॉजी" कहा और बायो ईंधन की क्षमता का उदाहरण दिया।
बस मोदी के इसी बयान को देश के विपक्षी नेताओं व युवाओं द्वारा न केवल याद किया जा रहा है बल्कि देश में सैकड़ों जगहों से इसी फ़ार्मूले से चाय बनाने की नाकाम कोशिश करते हुये अनेक लोगों की वीडिओ भी वायरल हो रही हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने तो सुल्तानपुर
इस संकट का सामना करने के लिये सरकार द्वारा रिफाइनरी उत्पादन 25 प्रतिशत तक बढ़ने का समाचार है। जबकि कुछ राज्यों में केरोसिन व कोयला आपूर्ति करने की अस्थायी अनुमति भी दी गयी है। यदि आगे भी यही स्थिति बानी रही तो रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर बंदी और बेरोजगारी का ख़तरा है। संकट की इस घड़ी में देश के अनेक नेता संसद से सड़कों तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2018 में विश्व जैव ईंधन दिवस के अवसर पर बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में दिये गये उस 'दिव्य ज्ञान' को याद कर रहे हैं जिसमें उन्होंने एक ऐसे चायवाले की कहानी सुनाई थी जो नाले से निकलने वाली गैस से चाय बनाता था। इस कार्यक्रम में उन्होंने बायो ईंधन की संभावनाओं पर बात करते हुए एक चाय वाले की कहानी का जिक्र किया था जो गंदे नाले से निकलने वाली गैस का इस्तेमाल करके चाय बनाता था। उन्होंने बताया था कि -' एक छोटे शहर में नाले के पास चाय का ठेला लगाने वाला कोई व्यक्ति था। उस नाले से दुर्गंध और गैस निकलती थी, तो उसने सोचा कि इस गैस का इस्तेमाल क्यों न करें।
LPG GAS SHORTAGE IN INDIA
में बाकायदा नाली में पाइप डालकर गैस चूल्हा जलाने का प्रयास भी किया, लेकिन चूल्हा नहीं जला। उन्होंने कहा, "मोदी जी कहते हैं नाली की गैस से चाय बनाओ, लेकिन यह संकट मोदी सरकार ही लाई है।"
कुछ लोगों ने व्यंग्य किया कि प्रधानमंत्री के 'ज्ञान' से प्रभावित व प्रेरित तमाम "लोग नाले की गैस से चाय बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया मीम्स और रील्स में "अनपढ़ राजा" कहकर मोदी का मजाकउड़ाया गया, जहां नाली को गैस से चाय बनने का असफल प्रयास प्रदर्शित किया गया। मोदी के इसी 'दिव्य ज्ञान' के पुराने वीडियो शेयर व रीशेयर करते हुये उन पर व्यंग्य कसे गए। विपक्ष ने तो इस संकट को सरकार की असफल विदेश नीति और तैयारी की नाकामी बताया है। तृणमूल कांग्रेस सांसद व पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इनाले की गैस से चाय बनाने वाले पुराने बयान का व्यंग्यात्मक उल्लेख करते हुए सरकार पर तीखा तंज किया और गैस संकट पर सवाल उठाए। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अगर प्रधानमंत्री की इस लगटर गैसङ्ग वाली सोच को गंभीरता से लेकर उस पर शोध किया होता, तो आज देश में एलपीजी
की ऐसी कमी और सिलेंडर के दामों में यह भारी बढ़ोतरी नहीं देखनी पड़ती। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि सरकार दावा करती है कि कोई बड़ा संकट नहीं है, तो फिर एलपीजी सिलेंडर के दाम क्यों बढ़ाए गए हैं और गरीब व मध्यम वर्ग पर इतना बोझ क्यों डाला जा रहा है। कई जगह तो पुलिस वालों को उन युवकों को रोकते हुये भी देखा गया जो नाले से गैस निकालने का प्रदर्शन करते हुये प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गये इस दिव्य ज्ञान की खिल्ली उड़ा रहे थे। सवाल यह है कि कोई साधारण व्यक्ति यदि इस तरह की बातें करे तो उसकी इतनी चर्चा भी न हो परन्तु जब देश के सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति इस तरह का 'ज्ञान' बांटने लगे तो उसका मजाक उड़ाया जाना स्वभाविक है। इसके अलावा भी मोदी इसतरह की अनेक बातें कर चुके हैं जोकि तथ्यात्मक व वैज्ञानिक रूप से गलत साबित हुई हैं। बादल में रडार का काम न करने का उनका दावा भी ऐसा ही एक 'दिव्यज्ञान' था जिसका पूरी दुनिया ने ख़ासकर वैज्ञानिकों ने काफी मजाक उड़ाया था। ऐसे गैरतार्किक व अवैज्ञानिक तर्क2828 देने से पहले किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति की यह जरूर सोचना चाहिये कि 'इस तरह क्यों बुकिये कि मुंह पर वापस आये '?
नून_रोटी खाएंगे योगी जी को #जिताएंगे कहने वाले #एटा जिले के #पंडित_अंकित पांडे को भाजपाइयों ने जूतों से पीटा
#नून_रोटी खाएंगे योगी जी को #जिताएंगे कहने वाले #एटा जिले के #पंडित_अंकित पांडे को भाजपाइयों ने जूतों से पीटा और गोली मारकर घायल कर दिया और फिर इनके ऊपर ही #FIR दर्ज करवा दी//
अब कल तक जो पंडित जी एटा जिले में #सपा_सरकार को बदनाम करने के लिए ये कह देते थे कि अहीरों की गुंडई चरम पर है लेकिन अब संपूर्ण पंडित #ब्राह्मण_समाज उस जाति का नाम नहीं ले पा रहा है जिसकी गुंडई का अंकित पांडे शिकार हो गए क्योंकि योगी आदित्यनाथ जी को आवाज दबाना बहुत बेहतर आता है// सपा सरकार में इतना तो था हर किसी को मुंह खोलने की आजादी थी // अब तो जूते खा कर भी गर्व नहीं बोल पा रहे हैं l,
सोमवार, 16 मार्च 2026
युवाओं के दम पर नया कम्युनिस्ट विकल्प होगा तैयार-डी राजा
युवाओं के दम पर नया कम्युनिस्ट विकल्प होगा तैयार-डी राजा
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रही है. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद देश की दूसरी सबसे पुरानी पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी शताब्दी वर्ष के अवसर पर आज रांची में धूमधाम से समारोह आयोजित कर रही है.
झारखंड राज्य परिषद की ओर से आयोजित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी शताब्दी वर्ष समारोह में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. इस दौरान प्रदेश कार्यालय भवन के नवनिर्माण की आधारशिला भी रखी गई. समारोह में पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री शिवकुमार मुखर्जी, झारखंड प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक सहित अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे.
राजधानी रांची के अटल वेंडर मार्केट के चौथे तले पर बने सभागार में यह शताब्दी वर्ष समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कन्हाईमल पहाड़िया ने की.
100 वर्ष का इतिहास जनता के हितों के लिए संघर्ष से भरा: डी. राजा
राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने कहा कि पार्टी ने स्थापना काल से अब तक के 100 वर्षों के इतिहास में जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार संघर्ष किया है. उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी केवल चुनाव के लिए नहीं है, हम जनता की समस्याओं को लेकर जन संघर्ष के लिए हैं. डी. राजा ने झारखंड में जल, जंगल और जमीन की लड़ाई को अभी भी अधूरा बताया और कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी इसे पूरा करेगी. उन्होंने कहा कि संघर्ष के दौरान कई साथियों को खोया है, फिर भी जनता के हित में जनआंदोलन नहीं छोड़ा गया. जन आंदोलन के माध्यम से जन विश्वास जीतकर झारखंड में एक मजबूत विकल्प बनने का प्रयास किया जाएगा.
आरएसएस का आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं: डी. राजा
समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में डी. राजा ने कहा कि पूरे देश में सीपीआई अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष धूमधाम से मना रही है. आरएसएस भी अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा है, लेकिन देश की आजादी की लड़ाई में उसका कोई योगदान नहीं है. अगर आरएसएस का कोई योगदान है तो उसे सामने लाना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमने पूर्ण स्वराज के नारे के साथ अंग्रेजों और फ्रांसीसियों को देश से भगाया. अब केंद्र की भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करना है. सीपीआई और वाम दलों को मजबूत करके ऐसा किया जाएगा. इसी रणनीति पर पार्टी आगे बढ़ रही है.
देश का किसान संकट के दौर से गुजर रहा है: शिवकुमार मुखर्जी
समारोह को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और किसान नेता शिवकुमार मुखर्जी ने कहा कि आज देश के किसान गंभीर संकट के दौर से गुजर रहे हैं. दुनिया में युद्ध के नाम पर हाहाकार मचा हुआ है, निर्दोष लोगों की हत्या हो रही है और पूंजी की लड़ाई चल रही है. उन्होंने झारखंड के शहीदों को नमन करते हुए कहा कि यहां मजबूत कम्युनिस्ट पार्टी की जरूरत है. झारखंड के युवाओं के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है. आने वाले दिनों में चुनौतियों को स्वीकार करते हुए पार्टी आगे बढ़ेगी. हम केवल चुनाव के लिए नहीं, बल्कि जनता के सवालों को लेकर जन संघर्ष के लिए हैं.
झारखंड में सरकार के संरक्षण में हो रही है खनिज संपदा की लूट: महेंद्र पाठक
झारखंड प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि राज्य की खनिज संपदाओं की लूट सरकार के संरक्षण में माफियाओं के माध्यम से हो रही है. चाहे केंद्र की सरकार हो या राज्य की, दोनों जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा में असफल रही हैं. उन्होंने कहा कि सरकार जबरन किसानों की जमीन लूट रही है, लेकिन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी लड़ेगी और जीतेगी. झारखंड में युवाओं को साथ लेकर एक नया और मजबूत वाम विकल्प तैयार किया जाएगा, जो आने वाले दिनों में जनता की आकांक्षाओं को लेकर जन संघर्ष को तेज करेगा.
समारोह में मुख्य रूप से महासचिव डी. राजा, पूर्व मंत्री शिवकुमार मुखर्जी, प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक, सीपीआई राष्ट्रीय परिषद सदस्य पी.के. पांडे, कन्हाईमल पहाड़िया, महादेव भंते, जैनेंद्र तथागत, देवांशु सिंह, हिमांशु सिंहराम, जिला सचिव (रांची) अजय सिंह, सोनिया देवी, अर्जुन कुमार यादव, नीरज सिंह, चंदेश्वर सिंह, विकास कुमार वर्मा, संतोष कुमार रजक, अजय कुमार सिंह, धर्मवीर सिंह, अंबुज ठाकुर, अनिरुद्ध कुमार, गयानाथ पांडेय, गौरव रवानी, शंभू मोहाली, रुचिर कुमार तिवारी, मनोज ठाकुर, श्यामल चक्रवर्ती, स्वामीनारायण चक्रवर्ती, गणेश महतो, राजेंद्र यादव, नूनू चंद महतो, स्वयंवर पासवान, चुन्नू पांडे, अब्दुल्लाह अंसारी, इम्तियाज खान, अली अंसारी, कमालुद्दीन, मनोज महतो, चितरंजन महतो सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए सीपीआई नेता शामिल हुए.
मंगलवार, 10 मार्च 2026
योगेन्द्र राणा की जूतों से पिटाई
ये है #ठाकुर योगेंद्र सिंह राणा कुछ दिन पहले इन्होंने #समाजवादी पार्टी की सांसद आदरणीय इकरा हसन जी को गाली गलौज एवं #अभद्र टिप्पणी की थी तब बहुत #हंगामा भी हुआ था उसके बाद पुलिस ने FIR भी की थी लेकिन ठाकुर साहब की #योगी जी से अच्छी पकड़ होने के कारण #पुलिस ने इनका कुछ नहीं कर पाया था तब से आए दिन ये अपनी #धौंस आम जनमानस को दिखाता रहता है
आज ये #मुरादाबाद के एक चर्चित डॉक्टर लक्ष्मण सिंह से #भिड़ गए फिर क्या डाक्टर साहब ने एक के बाद एक कई जूता और थप्पड़ों की बरसात कर दी बेचारे योगेन्द्र राणा जान बचाकर #भागते हुए नजर आए
योगेन्द्र राणा की मार का वीडियो सोशल #मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो रहा है देखते है अब आगे क्या होता है
#india #appreciation #selflove #sermon #praiseandworship #holiday #churchservice #tribute #praise #appreciationpost
सोमवार, 9 मार्च 2026
हमारा वास्तविक दुश्मन पूंजीवाद है-राजेन्द्र यादव
बांदा। हमारा वास्तविक दुश्मन पूंजीवाद है ।
जो अपने उत्पादन की क्वॉन्टिटी कम करता जा रहा है मूल्य दिन दूना रात चौगुना बढा रहा हैं यह विचार व्यक्त करते हुए आल इंडिया किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेन्द्र यादव पूर्व विधायक ने कहा कि
मौजूदा सरकार ने हमारी गाढी कमाई के पब्लिक सेक्टर के बिभागो को
निजी हाथो मे सौप रहा है ।
जहां हमारे बच्चो से बारहः घंटे काम लेकर उनका खून निचोड़कर जीने भर का भोजन भर दिया जा रहा हैं।
हमे हिन्दू मुस्लिम मे उलझा कर पूजीपतियों का हित साधा जा रहा हैं ।किसानो के युवा लडके जो सरकारी नौकरी के लिए दिनरात मसक्सत करते है उन्हे सरकारी नौकरियो से बंचित किया जा रहा हैं ।
मोदी सरकार पूरी तरह से अमेरिका के हाथो मे बिक चुकी हैं ।
यदि अमेरिका से ट्रेड डिल समझौता किया है ।
अमेरिका का खाद्यान्न हमारी धरती पर आया तो यहां का किसान पूरी तरह से टूट जायेगा ।
डा रामचन्द्र सरस ने कहा जैसै कर्मचारी अधिकारी जाति पाति से ऊपर उठकर अपनी मांगे के लिए एक जुट होते हैं उसी तरह किसानो को अपने हितो के लिए एक होना पडेगा ।
सभा को मदन भाई पटेल ,अवधेश पटेल, उमा सिंह भइया लाल पटेल ने सभा का सफल संचालन किया ।किसान पंचायत बरौली आजम ग्राम मे महेन्द्र सिंह पटेल की अध्यक्षता मे सम्पन्न हुई।
शुक्रवार, 6 मार्च 2026
मंगलवार, 3 मार्च 2026
ईरान के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की एकजुटता का प्रदर्शन - लखनऊ सांसद राजनाथ किसके साथ?
ईरान के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की एकजुटता का प्रदर्शन - लखनऊ सांसद राजनाथ किसके साथ?
ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमलों के खिलाफ दिल्ली में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी विरोध प्रदर्शन
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी दिल्ली में ईरान पर अमेरिकी साम्राज्यवादी और ज़ायोनी इजरायली हमलों की निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन, एक संप्रभु राष्ट्र को निशाना बनाने और पश्चिम एशिया और उससे परे शांति को खतरे में डालने वाले इस खतरनाक तनाव की कड़ी आलोचना की गई। प्रदर्शन को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राष्ट्रीय सचिव अमरजीत कौर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी दिल्ली राज्य परिषद के सचिव और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रोफेसर दिनेश वार्ष्णेय , सीपीआई (एम) की वरिष्ठ नेता वृंदा करात, सीपीआई (एम) दिल्ली राज्य के सचिव अनुराग सक्सेना, सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, आरएसपी के सचिव आर.एस. डागर, एसयूसीआई के सचिव प्राण शर्मा और सीजीपीआई के बिरजू नाइक ने संबोधित किया। इनके अलावा सीपीआई (एमएल) न्यू डेमोक्रेसी और फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता भी उपस्थित थे। वक्ताओं ने ईरान के खिलाफ इस आक्रामकता के तहत अमेरिका-इजराइल गठबंधन द्वारा अयातुल्ला अली खामेनेई, उनके परिवार और अन्य ईरानी नेताओं की हत्याओं की कड़ी निंदा की। उन्होंने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन और संप्रभुता पर हमला बताते हुए चेतावनी दी कि ऐसी आक्रामकता वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए खतरा है। विरोध प्रदर्शन में केंद्र सरकार के रुख की भी आलोचना की गई और भारत से एकतरफा सैन्य आक्रामकता का दृढ़ता से विरोध करके अपनी स्वतंत्र विदेश नीति की परंपरा को कायम रखने का आह्वान किया गया। सीपीआई दिल्ली राज्य के कई नेता और एआईटीयूसी, एआईवाईएफ और एनएफआईडब्ल्यू सहित जन संगठनों के प्रतिनिधि भी एकजुटता दिखाने के लिए उपस्थित थे।
सोमवार, 2 मार्च 2026
रविवार, 1 मार्च 2026
दुबई, बहरीन, अबुधाबी, मनामा–ये सारे नाम दुनिया में ऐशगाह है - खामेनेई जिंदा नहीं है
दुबई, बहरीन, अबुधाबी, मनामा–ये सारे नाम दुनिया में ऐशगाह के रूप में मशहूर हैं।
दुनिया के रईस अपनी गर्लफ्रेंड या एस्कॉर्ट्स के साथ रंगरेलियां मनाने वहां जाते हैं।
यहां तेल कुबेर शेखों की रंगीनियां परवान चढ़ती हैं। ईरान ने जब इन शानोशौकत के किलों पर वार किया तो जंग का असल चेहरा दिखने लगा।
युद्ध विराम और शांति प्रस्तावों पर बात होने लगी।
लेकिन, कल अमेरिकी टॉमाहॉक मिसाइलों ने ईरान में लड़कियों के जिस स्कूल में 80 से ज्यादा लाशें गिरायीं, उस पर कोई बात नहीं कर रहा।
हम सब ग़ज़ा के गुनहगार हैं। उन 70 हज़ार से ज़्यादा बेकसूर लोगों के, जिन्हें इजरायल ने मारा।
जिस सऊदी अरब ने एक महीने पहले ईरान का साथ देने का वादा किया था, वही अब उसके ख़िलाफ़ खड़ा है।
ईरान की जंग अब 12 देशों को लपेटे में ले चुकी है। वर्ल्ड वॉर 2 के बाद ये सबसे बड़ी जंग है।
ईरान ने दिखा दिया कि ख़ामेनेई रहें या न रहें, जुल्मियों का अंत होकर रहेगा।
समूचे मिडिल ईस्ट में एक भी मुल्क ऐसा नहीं, जहां की अवाम अपनी हुकूमत से खुश हो।
ईरान में भी हजारों लोग मिलेंगे, जो अपने निज़ाम से खुश नहीं हैं। भारत में भी।
क्योंकि, लोकतंत्र का वज़ूद किसी बाहरी देश की ताकत, दौलत और तलवार की धार पर टिका है।
इसे खारिज़ करने के लिए ईरान बनना होगा।
खामेनेई कुछ इसी तरह की बात कह रहे हैं। वे जिंदा नहीं हैं।
-सौमित्र राय
शनिवार, 28 फ़रवरी 2026
कम्युनिस्ट आंदोलन के हीरो अतुल कुमार अंजान
शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की गोद में खेलने और पलने वाले। भारत के कम्युनिस्ट आंदोलन में हिंदी क्षेत्र के सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली चेहरों में से एक कॉमरेड अतुल कुमार अंजान का जन्म बिहार के बांका ज़िले में हुआ, हालांकि उनकी कर्मभूमि उत्तर प्रदेश रही। उनके पिता ए.पी. सिंह लखनऊ के चर्चित डॉक्टर थे और उनका जुड़ाव शहीद-ए-आजम Bhagat Singh के क्रांतिकारी संगठन Hindustan Socialist Republican Association से था।
उनके श्वसुर Indradeep Sinha 1967 में बिहार की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार में मंत्री रहे और उनका गहरा संबंध किसान आंदोलन के महानायक Swami Sahajanand Saraswati से था। स्पष्ट है कि अतुल अंजान को क्रांतिकारी और किसान आंदोलन की विरासत घर से ही मिली थी।
1978 में वे Lucknow University छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए और चार बार इस पद पर जीत हासिल की। उस समय परिसर में नारा गूंजता था—
“मेरी जान, तेरी जान — अतुल अंजान!”
1979 में वे All India Students’ Federation के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। हिंदी पट्टी के किसी बड़े विश्वविद्यालय में एक कम्युनिस्ट का इस तरह लोकप्रिय होना असाधारण घटना थी।
वे Communist Party of India (सीपीआई) के राष्ट्रीय सचिव तथा All India Kisan Sabha के महासचिव रहे। 1997 से किसान सभा से उनका गहरा जुड़ाव था। किसानों के मुद्दों पर गठित स्वामीनाथन आयोग में वे किसानों के एकमात्र प्रतिनिधि थे।
घोसी लोकसभा क्षेत्र से उन्होंने चार बार चुनाव लड़ा। भले ही वे संसद नहीं पहुंच सके, लेकिन बिना किसी सदन के सदस्य बने भी वे राष्ट्रीय स्तर के चर्चित नेता रहे—यह उनकी जनस्वीकृति और वैचारिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
कम्युनिस्ट आंदोलन में अक्सर दक्षिण भारतीय नेताओं का प्रभाव रहा है, लेकिन हिंदी क्षेत्र में P. C. Joshi के बाद यदि कोई सर्वाधिक चर्चित और प्रभावशाली चेहरा उभरा, तो वह अतुल अंजान थे।
प्रवाहमान, मुहावरेदार और प्रभावशाली हिंदी में बोलना उनकी विशेषता थी। उनके भाषणों में लोककथाएँ, मुहावरे और तर्क का अद्भुत संगम होता था। टीवी बहसों में वे वामपंथ की मुखर आवाज़ के रूप में जाने जाते थे और एंकरों को तथ्यात्मक चुनौती देने का साहस रखते थे।
अपने भाषणों में वे दो प्रमुख चुनौतियों— नवउदारवादी आर्थिक नीतियाँ एवं सांप्रदायिकता को लगातार चिन्हित करते थे। वे युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और मार्क्सवादी दर्शन से जुड़ने का आह्वान करते थे। उन्होंने पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस के माध्यम से कई क्लासिक पुस्तकों के पुनर्प्रकाशन में भूमिका निभाई।
अपने अंतिम दिनों में मृत्युशय्या से उन्होंने वाम आंदोलन का प्रिय गीत गाया—
“तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी के गीत में यक़ीन कर,
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर।”
‘स्वर्ग’ को ज़मीन पर उतारने का सपना देखने और उसके लिए आजीवन संघर्ष करने वाले नेता अतुल अंजान का 3 मई की सुबह लखनऊ में निधन हो गया। वे 70 वर्ष के थे और लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे।
हिंदी पट्टी के इस करिश्माई कम्युनिस्ट नेता को लाल सलाम।
-भवेश भारद्वाज
कथित लोमड़ी रुपी सरकार ने मंदिरों को सबसे ज्यादा गिराया है। विधर्मी मुफ़्त बदनाम है
हिन्दू ओं की डबल इंजन सरकार
शंकराचार्य मठ की 4 मंजिला भवन पर चला बुलडोजर
प्रशासन के अनुसार, मठ परिसर में लगभग 10 से 15 हजार वर्गफुट क्षेत्र मे निर्माण था गिरा दिया गया है।
मजेदार बात यह है कि कथित लोमड़ी रुपी सरकार ने मंदिरों को सबसे ज्यादा गिराया है। विधर्मी मुफ़्त बदनाम है।
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