मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

दरबारी सुरक्षा में चोरों की बजती बंसी प्रमोद ताम्बट

दरबारी सुरक्षा में चोरों की बजती बंसी प्रमोद ताम्बट राजा ने चोरों के एक प्रतिनिधिमंडल को गोपनीय रूप से मिलने के लिए बुलाया । चोरों के आते ही राजा ने अन्य प्रतिनिधिमंडलों को जल्दी-जल्दी चलता कर चोरों के प्रतिनिधिमंडल को चर्चा के लिए बुला लिया और उनकी राजसी आवाभगत तथा पीने-खाने की बेहतरीन व्यवस्था का जायज़ा लेते हुए कहा- राज्य को आज आप लोगों की सेवा की सख्त ज़रूरत आन पड़ी है। चोरों का प्रतिनिधिमंडल बोला- आपकी आज्ञा सर-आखों पर, बताइए महाराज, हम आपकी क्या सेवा कर सकते हैं ? राजा का खास मंत्री बोल पड़ा- सेवा-वेवा गई चूल्हे में। आप लोगों ने दरबार के साथ बदमाशी चालू कर दी है। दरबार को आने वाला चोरी का हिस्सा दिन पर दिन कम होता जा रहा है। ये सरासर गलत बात है। दरबार तुम लोगों को इस नामाकूल हरकत की कड़ी से कड़ी सज़ा दे सकता है, समझे ? चोरों का नेता बोला- महाराज हम तो पूरी मेहनत और लगन से कोशिश कर रहे हैं। ज़्यादा से ज़्यादा चोरियाँ कर रहे हैं और दरबार का हिस्सा समय पर खज़ाने तक पहुँचा रहे हैं। लेकिन फिर भी आजकल हमारे साथ बड़ा अत्याचार हो रहा है आपके राज में। पुलिस वाले बड़ी गंभीरता से चोरों की पकड़-धकड़ के काम में लगे हुएँ हैं। हमारा स्वतंत्रतापूर्वक चोरी करना मुश्किल हो गया है, जबकि हम चोरी में बराबर पुलिस को भी हिस्सा देते चले आ रहे हैं। राजा बोला- पुलिस को पकड़-धकड़ के काम के लिए ही रखा गया है तो वे तो अपना काम मुस्तैदी से करेंगे ही। आप लोग अपने कौशल को और उन्नत कीजिए। पुलिस से बच निकलने के नए-नए तरीके निकालिए। दरबार आपका पूरा साथ देगा। चोर प्रतिनिधि बोला- महाराज, पुलिस से बचने में ही हमारी सारी शक्ति समाप्त हो जाती है । आखिर हम कब तो चोरी करें और कब पुलिस से बचने का कौशल उन्नत करें। इसी फालतू की उठापटक में हमारा सारा समय बर्बाद हो जाता है और हमारी नेट इंकम कम हो जाती है। इसीलिए दरबार के हिस्से में भी गिरावट आ जाती है। ऊपर से छोटे-मोटे दरबारी अफसर-कर्मचारी भी परेशान करने लगते हैं। फिर अलग से उन्हें भी दो। ऐसे बाँटते ही रहेंगे तो कैसे चलेगा महाराज? राजा बोला- देखो, जिसको जिस काम के लिए रखा गया है उसको तो वह काम करना ही पड़ता है। फिर दरबार का संरक्षण मिला हुआ हो तो दरबारी थोड़ा बहुत तो उन्मत्त हो ही जाते हैं । चोर बोले- हम भी तो दरबार के लिये ही काम करते है महाराज। हमें भी संरक्षण मिलना चाहिए। यकीन मानिए हमें दरबार का संरक्षण मिल जाए तो हम राज्य का खज़ाना लबालब भर देंगे। राज्य को दूसरा कोई दंद-फंद करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी। राजा और खास मंत्री ने इस बात को गंभीरता से लेकर तुरंत आपस में गहन मंत्रणा की और फिर राजा अपने मोर काे दाना खिलाता हुआ बोला- ठीक है। राज्य में चोरों को उनके किए गए चोरी के समस्त कार्यों के लिए दीवानी या आपराधिक मुकदमों और सजाओं से सुरक्षा प्रदान करने हेतु दरबार द्वारा शक्तिशाली कानून बनाकर संरक्षण प्रदान किया जाएगा। चोर संप्रदाय राज्य के हित में भरपूर चोरियाँ करें और निश्चिंत रहें। सारे चोर ख़ुशी से कूँदते हुए चिल्लाए- हुर्रे हुर्रे हुर्रे। और फिर राज्य में जोर-शोर से चोरियाँ होना चालू हो गईं। चोरी होती, लोग रोते-गाते पुलिस के पास जाते, पुलिस एक्शन मोड़ में आती, चोर को पकड़ती, चोर कानून का पोथा पलटकर दिखा देते और चोरों को दरबारी संरक्षण का प्रावधान देखकर पुलिस चुप लगा जाती। मामला ठंडा पड़ जाता। दिन पर दिन राज्य में चोरियाँ बढ़ती गईं, बढ़ती गईं । तंग आकर पुलिस ने चुप लगाना बंद कर चोरी की शिकायत करने आने वालों को ही डरा धमकाकर, एफ.आई.आर, पिटाई, मुकदमा, बामशक्कत सज़ा और अंडा सेल इत्यादि का डर दिखाकर भगाना चालू कर दिया। यहाँ तक कि चोर लोग पुलिस वालों तक के यहाँ भी चोरियाँ करके भागने लगे लेकिन पुलिस वालों को मजबूरी में अपना मुँह सिले बैठे रहना पड़ता था क्योंकि चोरों को कानूनी संरक्षण था । चोरों के औसान बढ़ते गए और उन्होंंने राज्य के खज़ाने में भी सेंध मारना शुरू कर दिया परंतु खज़ाना मंत्री, खास मंत्री और राजा के पास चुप रहने के अलावा दूसरा कोई चारा ही नहीं था क्योंकि रायता तो उन्हीं का फैलाया हुआ था । चोरी के धंधे ने एक असाध्य रोग की तरह पूरे राज्य को अपने शिकंजे में ले लिया। सबसे ज़्यादा क्रांतिकारी परिवर्तन तो यह आया कि आम गऊ जैसी सीधी-साधी प्रजा भी धड़ल्ले से चोरी के कारोबार में कूद पड़ी क्योंकि राज्य में चोरों के लिए भय मुक्त वातावरण तथा दीवानी या आपराधिक मुकदमों और सजाओं से सुरक्षा प्रदान करने वाला कानून लागू था। चोरों के आतंक से ग्रस्त इस राज्य की देखा-देखी आसपास के राज्यों में भी विभिन्न महकमों में मुकदमों और सज़ाओं से सुरक्षा प्रदान करने वाले कानून लागू होने लगे। किसी ने कानून, गृह और रक्षा मंत्रालय के लिए यह कानून लागू कर दिया किसी ने चुनाव आयोग के लिए । दरबारी सुरक्षा के घेरे में चारों ओर चोरों की बंसी बजने लगी और कुछ लोग बंसी की उस धुन पर सिर हिला-हिलाकर आनंद की अनुभूति में तैरने-उतराने लगे । -०- @followers @highlight

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

तिरंगा फहराना अपराध नहीं है -दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज चल रहा है - पी संतोष कुमार

तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है! 🇮🇳 आल इंडिया यूथ फेडरेशन के अध्यक्ष रौशन कुमार सिन्हा, महासचिव सुखजिंदर महेश्वरी; आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के अध्यक्ष विराज देवांग; DYFI के महासचिव हिमाघ्नराज भट्टाचार्य; SFI के अध्यक्ष आदर्श एम. साजी और महासचिव सृजन भट्टाचार्य के नेतृत्व में, AISF-AIYF और SFI-DYFI के कार्यकर्ताओं ने फिरोजशाह रोड से कनॉट प्लेस तक मार्च निकाला। पुलिस की घेराबंदी और भारी सुरक्षा तैनाती के बावजूद, उन्होंने गर्व के साथ राष्ट्रीय ध्वज को ऊंचा लहराया। इस मार्च में CPI के राष्ट्रीय सचिव और सांसद पी. संतोष कुमार, CPI दिल्ली के सचिव और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रो. दिनेश वार्ष्णेय, तथा CPI(M) के सांसद जॉन ब्रिटास, वी. शिवदासन और ए. ए. रहीम भी शामिल हुए। विरोध प्रदर्शन और असहमति को अपराध मानना ​​बंद करें! कोई भी बैरिकेड लोकतांत्रिक अधिकारों को दबा नहीं सकता, और कोई भी ताकत नागरिकों को गर्व के साथ तिरंगा लहराने से नहीं रोक सकती। तिरंगा हमारा गौरव है। विरोध करना हमारा अधिकार है! #AISF #AIYF #SFI #DYFI #CPI

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा तक आंदोलन चलेगा -आज जंतर-मंतर पर गिरफ्तारियां हुई

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा तक आंदोलन चलेगा -आज जंतर-मंतर पर गिरफ्तारियां हुई भारी बारिश और पुलिस बैरिकेड्स के बीच दिल्ली के कनॉट प्लेस में आ़ल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन-आल इंडिया यूथ फेडरेशन का तिरंगा मार्च। तिंरगा यात्रा के दौरान दिल्ली पुलिस ने AIYF के राष्ट्रीय महासचिव सुखजिंदर महेसरी का मोबाइल फोन छीन लिया और उन्हें डिटेन कर लिया। .
ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा दो! जंतर मंतर हमारा है के नारों से गूंजा कनॉट प्लेस. शांतिपूर्वक तिरंगा लहराने के “जुर्म” में सैंकड़ों साथी गिरफ्तार! वहीं आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विराज देवांग के साथ अभिनेता एक्टिविस्ट प्रकाश राज वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशान्त भूषण सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा एस एफ आई संयुक्त सचिव आइसी घोष ने संयुक्त रूप से प्रेस क्लब आफ इंडिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा तक आंदोलन जारी रहेगा। #CPI #AISF #SFI #AISA #GyaneshKumar

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026

दिल्ली में छात्रो -नौजवानो की गिरफ्तारियां कम्युनिस्ट नेता भी गिरफ्तार

जंतर-मंतर।13 अक्टूबर -गृह मंत्रालय के द्वारा जंतर मंतर को विरोध स्थल खत्म करने के विरोध में प्रदर्शन करने गए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता प्रोफेसर दिनेश वार्ष्णेय दिल्ली राज्य सचिव के साथ ऑल इंडिया यूथ फेडेरेशन, ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रौशन कुमार सिन्हा व दिल्ली राज्य ऑल इंडिया यूथ फेडेरेशन, दिल्ली राज्य ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के साथियों को पुलिस ने डिटेन किया है। संघर्ष जारी रहेगा। लड़ेंगे जीतेंगे। आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन नेताओं को संसद मार्ग से हिरासत में लिया गया कामरेड दिनेश रंगराजन - महासचिव • अरुण प्रकाश - उपाध्यक्ष उ प्र कॉमरेड संदीप शर्मा - आल इंडिया यूथ राज्य सचिव और लगभग 150 प्रदर्शनकारी को गिरफ्तार किया गया है।

सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने उच्चतम न्यायालय के सामने पहुंच कर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा -डा गिरीश शर्मा

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने उच्चतम न्यायालय के सामने पहुंच कर ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा -डा गिरीश शर्मा
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन और आल इंडिया यूथ फेडरेशन इंडिया गंठबंधन के मार्च में सर्वोच्च न्यायालय के लिए आगे खड़े भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी महासचिव डी. राजा, पार्टी के राष्ट्रीय सचिव पी. संतोष कुमार एमपी, रामा कृष्णा पांडा, डॉ. गिरीश शर्मा और एनी राजा, सीपीआई दिल्ली सचिव और राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य प्रोफेसर दिनेश वर्षनी, एआईवाईएफ जनरल सचिव सुखजिंदर महेसरी, एआईवाईएफ अध्यक्ष रौशन कुमार सिन्हा, एआईएसएफ जनरल सचिव दिनेश सीरंगराज और एआईवाईएफ अध्यक्ष विराज देवंग ने इंडिया गंठबंधन के मार्च में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ज्ञानेश कुमार के पद से इस्तीफा मांगते हुए हजारों उत्साही कार्यकर्ताओं के साथ जुड़ गए। यह लोकतंत्र को बचाने और लोकों के स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया के अधिकार की रक्षा करने की लड़ाई है। दिल्ली को एक किला बनाएं, बैरिकेड तैनात करें और सुरक्षा कर्मियों से सड़कों को भर दें लेकिन आप लोगों की जवाबदेही की मांग को चुप नहीं कर सकते। मांग स्पष्ट है: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए! #CPI #AISF #AIYF #INDIABloc #GyaneshKumar

रविवार, 11 अक्टूबर 2026

लोकतंत्र को बचाना है-पुलिस दमन बंद करो।-दिनेश श्री रंगराजन

लोकतंत्र को बचाना है-पुलिस दमन बंद करो।-दिनेश श्री रंगराजन दिल्ली। कनॉट प्लेस में आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन -आल इंडिया यूथ फेडरेशन के नेताओं, सदस्यों और समर्थकों की पुलिस द्वारा की गई बर्बर पिटाई की भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी कड़ी निंदा करती है। पुलिस ने न केवल आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के महासचिव दिनेश श्रीरंगराज, आल इंडिया यूथ फेडरेशन के महासचिव सुखजिंदर महेश्वरी और आल इंडिया यूथ फेडरेशन के अध्यक्ष रोशन सिन्हा के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया, बल्कि पुलिस हिरासत में होने के बावजूद आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रभारी अनिकेत मेडके को थप्पड़ भी मारा। यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है। देश के हर नागरिक को विरोध करने का अधिकार है। ज्ञानेश कुमार और संघ-भाजपा एन डी ए सरकार ने लोकतंत्र को हड़प लिया है और भ्रष्ट पैसे के दम पर सरकारों को हथिया लिया जाता है। गिरफ्तार किए गए अन्य नेताओं में आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन दिल्ली राज्य के मोहित, गुलाब, विशाल, श्रेया, कासिफ और अन्य राज्यों के साथी शामिल हैं। लोकतंत्र को बचाना है। पुलिस दमन बंद करो।

शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार यह सरकार पहले ही खो चुकी है - डी राजा

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सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार यह सरकार पहले ही खो चुकी है - डी राजा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के फासीवादी तरीकों की कड़ी निंदा की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया मोदी सरकार द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए अपनाए गए फासीवादी तरीकों की कड़ी निंदा करती है। यह विरोध प्रदर्शन वामपंथी छात्र संगठनों और काकरोच जनता पार्टी द्वारा वामपंथी पार्टियों के समर्थन से बुलाया गया था। सेंट्रल दिल्ली में 45,000 से ज़्यादा सुरक्षा कर्मियों को तैनात करना, राजधानी आने वाली ट्रेनों को रद्द करना, इंटरनेट बंद करना और 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने से दिल्ली एक सैन्य छावनी में बदल गई है। RSS से जुड़े गुंडों ने दिल्ली पुलिस की मिलीभगत से प्रदर्शनकारियों पर हमला किया। यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक कार्रवाई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का कारण है। मोदी सरकार ने लोकतांत्रिक शासन होने का सारा दिखावा छोड़ दिया है और चुनावी गड़बड़ी, वोटर लिस्ट में धांधली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मिलीभगत को लेकर बढ़ते जन-आक्रोश को दबाने के लिए अपने तानाशाही चेहरे को उजागर कर दिया है। यह स्पष्ट है कि भाजपा का लोगों के बीच अपनी लोकप्रियता पर से भरोसा उठ गया है और वह केवल अनुचित तरीकों के आधार पर चुनाव जीत रही है। शांतिपूर्ण विरोध के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे नागरिकों के ख़िलाफ़ हिंसा, डराने-धमकाने और ज़बरदस्ती करने की कड़ी निंदा की जानी चाहिए। मोदी सरकार और भाजपा शासित राज्य सरकारों द्वारा कई दिनों तक एहतियातन हिरासत में रखने के बावजूद, हज़ारों छात्र और युवा दमन से बिना डरे दिल्ली में इकट्ठा हुए। जंतर-मंतर जाने वाली सड़कों से हज़ारों लोगों को उठाया गया और उनके साथ बदसलूकी की गई। दिल्ली पुलिस ने कई पत्रकारों को भी हिरासत में लिया और उन्हें विरोध प्रदर्शन की कवरेज करने से रोका, जो प्रेस की आज़ादी और जनता के जानने के अधिकार पर खुला हमला है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिवालय के सदस्य रामा कृष्ण पांडा और के. प्रकाश बाबू, आल इंडिया यूथ फेडरेशन के महासचिव सुखजिंदर महेश्वरी, महिला फेडरेशन की महासचिव निशा सिद्धू, आल इंडिया स्टूडेंट्स के महासचिव दिनेश सीरंगराज और आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के अध्यक्ष विराज देवांग सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ हिरासत में लिया गया। ये शर्मनाक दृश्य लोकतांत्रिक असहमति से सरकार के डर और जवाबदेही की मांग करने वालों की आवाज़ दबाने के उसके संकल्प को उजागर करते हैं। लोकतंत्र विरोधी दमन के बावजूद, मोदी सरकार लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ने वालों का हौसला तोड़ने में नाकाम रही है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उन सभी लोगों को बधाई देती है जो लोकतंत्र के लिए आवाज़ उठा रहे हैं, खासकर उन छात्रों और युवाओं को जो भारी दमन के बावजूद डटे रहे। ये विरोध प्रदर्शन और मज़बूत होंगे और देश के हर कोने में फैलेंगे। मांग साफ़ है: ज्ञानेश कुमार को इस्तीफ़ा देना चाहिए और चुनावी व्यवस्था में व्यापक सुधार होना चाहिए। यह संघर्ष रुकेगा नहीं। हमारी एकता ही इस सरकार के पतन का कारण बनेगी, क्योंकि सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार यह सरकार पहले ही खो चुकी है।

अमित शाह फेल - मालगाड़ी से लोग दिल्ली पहुच रहे हैं

जनता के सिर से जब सत्ता का खौफ़ ख़त्म हो जाए तो रेलगाड़ी न सही, मालगाड़ी है तो क्या? कितनों को रोकेगा अमित शाह?

प्राइवेट पार्ट न कटवाए - सीमा सिंह

प्राइवेट पार्ट न कटवाए - सीमा सिंह

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026

डरी हुई सरकार और ट्रेने कैंसिल जंतर मंतर आंदोलन

डरी हुई सरकार और ट्रेने कैंसिल जंतर मंतर आंदोलन सरकार ने 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने वाली कई ट्रेनों को रद्द करने का आदेश दिया है। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट होने जा रहा है। इस बीच इंडियन रेलवे ने बड़ा आदेश जारी किया है। रेलवे ने 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर आने वाली सभी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को कैंसिल करने का ऑर्डर दिया है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि दोनों स्टेशनों के आसपास सड़क पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक जाम होने की संभावना है। इन ट्रेनों को किया गया कैंसिल करने का आदेश 9 अक्टूबर को जारी रेलवे के एक ऑर्डर के मुताबिक, शुक्रवार को दोपहर 2 बजे के बाद अपने शुरुआती स्टेशनों से निकलने वाली और शनिवार को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच नई दिल्ली या हजरत निजामुद्दीन पहुंचने वाली सभी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें वहीं से कैंसिल कर दी जाएंगी। वही आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के नेता मुज्जमिल जाहिल अली आल इंडिया यूथ फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष फकरे आलम सहित सैकड़ों नेताओं को हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। लोकतंत्र को दो गुजरातियों ने मजाक बना दिया है।

बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

योगी सरकार ने किसानों का सचिवालय मार्च रोका, किसान सभा के पूरे नेतृत्व समेत 500 से ज्यादा गिरफ्तार-राजन क्षीरसागर

योगी सरकार ने किसानों का सचिवालय मार्च रोका, किसान सभा के पूरे नेतृत्व समेत 500 से ज्यादा गिरफ्तार चारबाग से निकले 3,000 से ज्यादा किसान और मजदूर; एक दिन पहले अयोध्या और सोनभद्र में भी गिरफ्तारियाँ अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) और उसकी प्रदेश इकाई उत्तर प्रदेश किसान सभा के लाल झंडे के नीचे आज 3,000 से ज्यादा किसानों, बटाईदारों और ग्रामीण मजदूरों ने लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन से सचिवालय की ओर मार्च निकाला। भाजपा सरकार की पुलिस ने मार्च को रेलवे स्टेशन चौक पर रोक दिया और 500 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार लोगों में पूरा नेतृत्व शामिल है: राष्ट्रीय अध्यक्ष राजन क्षीरसागर, महासचिव रावुला वेंकैया, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष छितर सिंह, प्रदेश अध्यक्ष इम्तियाज बेग और प्रदेश महासचिव, पूर्व विधायक राजेंद्र यादव।वही किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष रणधीर सिंह सुमन अमित यादव सहित सैकडों लोगों को गिरफ्तार नहीं कर पाई क्यो कि पुलिस के पास बस नहीं थी। तब हम लोग ईको गार्डेन जाकर बाहर बैठे रहे। मार्च को नाकाम करने की सोची-समझी कोशिश उत्तर प्रदेश पुलिस ने मार्च को नाकाम करने की जानबूझकर कोशिश की। 6 अक्टूबर को अयोध्या में अशोक तिवारी और किसान सभा के दूसरे नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, और सोनभद्र से भी गिरफ्तारियों की खबर है। मार्च रोके जाने पर किसानों और नौजवानों के गुस्से के बीच पुलिस से धक्का-मुक्की हुई। नेताओं ने दमन की निंदा की और गिरफ्तारी दी। किसान सभा के दिवंगत नेता अतुल कुमार अंजान की बहनें श्रीमती रत्नासिंग और श्रीमती किरण सिंग भी मार्च में शामिल हुईं और किसान सभा को समर्थन दिया। राजन क्षीरसागर ने कहा, "जिस सरकार के पास किसान के सवालों का जवाब नहीं होता, वह पुलिस भेजती है। मार्च को चौक पर रोका जा सकता है, पर धान के दाम, गन्ने के बकाये और काम की माँग को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।" उन्होंने चेतावनी दी, "लखनऊ किसान सभा की जन्मभूमि है, जिसने 150 साल के अंग्रेजी राज को ग्यारह साल में उखाड़ फेंका। किसानों के गुस्से का ज्वालामुखी फासीवादी मानसिकता वाली योगी और मोदी सरकार को भी उखाड़ फेंकेगा।" जो सरकारें सुनना नहीं चाहतीं मार्च प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित 47 सूत्रीय माँग-पत्र लेकर चला था, जो प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही को सौंपा जाना था। माँग-पत्र मोदी सरकार और योगी आदित्यनाथ की भाजपा सरकार, दोनों को कठघरे में खड़ा करता है। मोदी सरकार ने 2014 में लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफे का वादा किया और एक भी सीजन में नहीं निभाया। उसने गेहूँ किसान को 25 रुपये प्रति क्विंटल दिए, जो एक प्रतिशत से भी कम है, जबकि डीजल 7.50 रुपये प्रति लीटर महँगा हो गया। धान का दाम 2,441 रुपये है, जबकि सी2+50 प्रतिशत पर यह 4,508 रुपये बनता है, यानी हर क्विंटल पर 2,067 रुपये की लूट। उसने मनरेगा खत्म कर दिया और उत्तर प्रदेश की मजदूरी 300 रुपये रोज तय की, जो देश में सबसे कम है। प्रदेश सरकार ने 425 लाख टन गेहूँ की पैदावार का अनुमान लगाया, 50 लाख टन खरीद का लक्ष्य रखा और खरीदा लगभग 20 लाख टन। उसने गन्ना किसान को पाँच पेराई सत्रों में केवल 50 रुपये प्रति क्विंटल दिए। सितंबर के मध्य तक एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया था और नया दाम अब तक घोषित नहीं हुआ। जून में बारिश 54 प्रतिशत कम रही और 37 जिलों में औसत से कम, फिर भी सूखा घोषित नहीं हुआ। चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में प्रदेश की मतदाता सूची से 2.04 करोड़ नाम काट दिए गए, यानी हर सौ में तेरह मतदाता। अब वोट भी छीना जा रहा है। माँगें सभी गिरफ्तार साथियों की तुरंत रिहाई और सारे मुकदमों की वापसी। सी2+50 प्रतिशत पर एमएसपी का कानून: धान 4,508 रुपये, गेहूँ 4,762 रुपये, आलू 2,700 रुपये। गन्ने का दाम 738 रुपये प्रति क्विंटल, और पूरा बकाया ब्याज समेत। संपूर्ण कर्जमाफी, और एनबीएफसी तथा माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की लुटेरी वसूली पर रोक। 15 अक्टूबर तक सूखे की घोषणा, और 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा। मनरेगा की बहाली, और 700 रुपये रोज पर 200 दिन काम। बिजली का निजीकरण नहीं, स्मार्ट मीटर नहीं, जबरन भूमि अधिग्रहण नहीं। एसआईआर पर रोक, और गलत कटे हर नाम की बहाली। गिरफ्तारियों से एक भी माँग हल नहीं होगी। किसान सभा ने 30 दिन के भीतर लिखित उत्तर माँगा है। अगर दोनों सरकारों ने दमन और चुप्पी का रास्ता चुना, तो यह संघर्ष प्रदेश की हर तहसील और जिले तक, और दिल्ली तक जाएगा।
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