लो क सं घ र्ष !
लोकसंघर्ष पत्रिका
रविवार, 10 मई 2026
मीरजाफर ने बंगाल में पुनः अवतार लिया
मीरजाफर ने बंगाल में पुनः अवतार लिया। सारे संघियों और भाजपाईयों ने मिलकर ममता बनर्जी के साथ जयचंद व मीर जाफर वाला कार्य किया है। ममता बनर्जी अटल की मानस पुत्री ममता बनर्जी थी केन्द्रीय मंत्रिमंडल में रही है। उसके बाद इन मीर जाफरो ने क्या किया है। बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के खिलाफ अमीर सेठ जगत सेठ मीर जाफरो ने गददी छीन ली थी। लार्ड क्लाइव के माध्यम से देश को गुलाम बना दिया था।
शनिवार, 9 मई 2026
अमरीका की फायरिंग से भारतीय मालवाहक जहाज डूबा
अंतरराष्ट्रीय जलसीमा में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव का असर अब भारत पर पड़ने लगा है। देवभूमि द्वारका जिले के सलाया का एक मालवाहक जहाज होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नौसेना के बीच हुई फायरिंग की चपेट में आ गया। हादसे में जहाज डूब गया, जिसमें एक खलासी की मौत हो गई, जबकि 17 अन्य को सुरक्षित बचा लिया गया।
शुक्रवार, 8 मई 2026
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए समर्थन टी वी के दिया - डी राजा
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने टी वी के सी. जोसेफ विजय को समर्थन दिया ताकि जनादेश का सम्मान हो और तमिलनाडु की धर्मनिरपेक्ष, समतावादी विरासत सुरक्षित रहे
तमिलनाडु की जनता ने सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली 'तमिलगा वेट्री कझगम' के पक्ष में अपना जनादेश दिया है। संसदीय लोकतंत्र में, जनता के जनादेश का अक्षरशः और भावना के साथ सम्मान किया जाना चाहिए। सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने और विधानसभा के पटल पर अपना बहुमत साबित करने के लिए आमंत्रित करने के बजाय, भाजपा द्वारा पिछले दरवाज़े से की जा रही जोड़-तोड़ और राज्यपाल के पद का दुरुपयोग करके अनिश्चितता पैदा करने का प्रयास, पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है और जनता का अपमान है। बहुमत का फैसला विधानसभा के भीतर होना चाहिए, न कि राजभवन की चारदीवारी के पीछे की जा रही राजनीतिक जोड़-तोड़ के ज़रिए।
तमिलनाडु की एक गौरवशाली राजनीतिक और सामाजिक विरासत है, जिसे श्रमिकों के अधिकारों, सांप्रदायिक सद्भाव, तर्कवाद, सामाजिक न्याय, संघवाद और समानता के लिए किए गए संघर्षों ने आकार दिया है। ये मूल्य राज्य की जनता की चेतना में गहराई से रचे-बसे हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का यह दृढ़ मत है कि संघ -भाजपा की राजनीति और विचारधारा इस ऐतिहासिक विरासत के विपरीत है, और यह तमिलनाडु के सामाजिक सद्भाव, धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने और लोकतांत्रिक चरित्र के लिए एक गंभीर खतरा है। जनता ने समाज का सांप्रदायीकरण करने और उसे बांटने के प्रयासों को सिरे से खारिज कर दिया है, और इस उम्मीद के साथ मतदान किया है कि एक ऐसी सरकार का गठन होगा जो इस जनादेश को सही मायने में दर्शाती हो। कानूनी बारीकियों और चुनिंदा व्याख्याओं को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करके भाजपा के लिए कोई गुंजाइश नहीं बनाई जा सकती; खासकर ऐसे राज्य में, जहाँ की जनता ने बीजेपी की विभाजनकारी राजनीति को लगातार नकारा है। सीपीआई को उम्मीद है कि टीवी के के नेतृत्व में बनने वाली नई सरकार, शासन और सार्वजनिक जीवन में इन ऐतिहासिक मूल्यों को कायम रखेगी और उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाएगी, साथ ही तमिलनाडु की जनता की आकांक्षाओं के प्रति पूरी तरह से समर्पित रहेगी।
इसी समझ के साथ, और एक समृद्ध, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक तथा समतावादी तमिलनाडु के व्यापक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने सरकार बनाने के लिए 'तमिलगा वेट्री कझगम' को अपना समर्थन देने का निर्णय लिया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और वामपंथी आंदोलन हमेशा से ही तमिलनाडु के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक जीवन का एक अभिन्न अंग रहे हैं; इन्होंने सदैव श्रमिकों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और समाज के सभी शोषित वर्गों के साथ मज़बूती से खड़े होकर उनका साथ दिया है। हम जनता के हितों की रक्षा करना, लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखना और विधानसभा के भीतर तथा बाहर—दोनों ही जगहों पर—उन लोगों की आवाज़ बुलंद करना जारी रखेंगे, जिनकी अपनी कोई आवाज़ नहीं है।
अपने राजदारों की हत्या कराने वाली पार्टी भाजपा
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की हत्या के सफर से हरेन पांड्या और महाराष्ट्र के भाजपा नेताओं के एक्सीडेंट में मारे जाने की कडी में ही शुभेन्दू के पी ए की हत्या है
बंगाल बीजेपी के शुभेन्दू के पी ए चन्द्रनाथ रथ का क़त्ल कर दिया गया है..ऐसा गोदीमीडिया ने बताया है..गोदिमीडिया पर यक़ीन करना नामुमकिन है..
कहा जाता है कि चन्द्रनाथ रथ वो शख़्स था जिस ने नन्दीग्राम में ममता बनर्जी को "लोडशेडिंग" करवा कर चुनाव हराने में अहम किरदार अदा किया था..राज़दार था..चन्द्रनाथ रथ को एयरफोर्स से शुभेन्दू के पास भेजा गया था..चन्द्रनाथ रथ की डिटेल्स पढ़िए..काफ़ी दिलचस्प है
चन्द्रनाथ रथ को शुभेन्दू का काफ़ी क़रीबी बताया गया है..
मगर यह पहली बार नहीं है जब शुभेन्दू से जुड़े लोगो की मौत को शक से देखा गया है..ऐसी 3 मौत बताता हूं
प्रदीप झा : 2013 में शुभेन्दू का पी ए था..
~ अगस्त 2013, प्रदीप झा की डेड बॉडी कोलकाता की सड़क पर मिली थी..भाजपा ने काफ़ी हंगामा किया था..
~ 2013 में शुभेन्दू TMC का सांसद था..बात दब गई थी
प्रदीप झा को शुभेन्दू का काफ़ी क़रीबी बताया जाता था..
शुभब्रोतो चक्रबोर्ति : 2018 में शुभेन्दू का बॉडी गार्ड था..2018 में शुभेन्दू TMC में था
13 अक्टूबर 2018 को शुभब्रोतो को पुलिस बैरक में ही गोली लग गई..
14 अक्टूबर 2018 को शुभब्रोतो की मौत हो गई थी
बीजेपी ने शुभेन्दू के ख़िलाफ़ काफ़ी हंगामा किया था..शुभेन्दू के ख़िलाफ़ कुछ गंदी बातें भी की थे..
ममता बनर्जी ने जांच बैठाई थी..मगर कुछ नहीं हुआ
शुभब्रोतो को शुभेन्दू का काफ़ी क़रीबी बताया जाता था..
पुलक लाहिड़ी : 2021 में नन्दीग्राम में शुभेन्दू का काउंटिंग एजेंट था..ममता बनर्जी इस चुनाव में शुभेन्दू से हार गई थी
पुलक लाहिड़ी की मौत पर हंगामा होने के बा'द यकायक मीडिया ने ख़ामोशी अख़्तियार कर ली थी..मीडिया में ज़्यादा कुछ पढ़ने को भी नहीं मिलेगा..सब साफ़ किया जा चुका है..
पुलक लाहिड़ी को शुभेन्दू का काफ़ी क़रीबी बताया जाता था..
ये बताना मुश्किल है कि शुभेन्दू के PA होने पर एबनॉर्मल मौत कैसे हो जाती है..ख़ैर बड़े लोगो के साथ ऐसे इत्तिफ़ाक़ होते रहते हैं। शुभेन्दू से जुड़े ये चारों शख़्स जिन की मौत हुई है वो जवान, हैंडसम, फिट और क़ाबिल लोग थे..इन की मौत का राज़ कभी नहीं खुलेगा.. शायद ममता बनर्जी के पास राज़ हैं.. मगर अब कुछ नहीं होगा..क्योंकि अब वक़्त गुज़र चुका है
गुरुवार, 7 मई 2026
बंगाल में ज्ञानेश कुमार चुनाव आयुक्त सरकार चला नहीं पा रहे हैं अराजकता का दौर जारी
बंगाल में अराजकता का दौर जारी है सरकार ज्ञानेश कुमार चुनाव आयुक्त मुख्य सचिव के माध्यम से चला रहे हैं। छह हत्याएं हो चुकी है संभावित मुख्यमंत्री शुवेन्दु अधिकारी के सचिव की हत्या कर दी गई है। पांच सौ से राजनीतिक दलों के कार्यालय में आगजनी तोड़ फोड़ कब्जा परिवर्तन हो चुका है। केन्द्रीय बल संघी गुंडों के सामने मूकदर्शक है। जगह जगह सरेआम पिटाई के दृश्य परिलक्षित हो रहे हैं। बुलडोजर से मकान गिराए जा रहे हैं।
मुर्शिदाबाद के जियागंज में लेनिन की मूर्ति संघी अंग्रेज़ों के संयुक्त मुखविर क्रम में पैदा हुई नाजायज औलादों ने तोड़ दिया है।
कई हजार करोड़ खर्च हो जाने के बाद बंगाल सत्तर दशक के अशांत बंगाल की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कम्युनिस्ट बड़ी मेहनत कर शांत क्षेत्र बनाया था। आज फिर उसी दौर में बंगाल वापस लौट रहा है।
बुधवार, 6 मई 2026
केन्द्रीय बलों की छत्र छाया में चुनाव आयोग के मूक समर्थन से संघी गुंडों के बल पर ही बंगाल चुनाव में भाजपा सरकार पर कब्जा किया है-डॉ रामचंद्र सरस
केन्द्रीय बलों की छत्र छाया में चुनाव आयोग के मूक समर्थन से संघी गुंडों के बल पर ही बंगाल चुनाव में भाजपा सरकार पर कब्जा किया है। यह बात भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय परिषद सदस्य डाँ रामचन्द्र सरस ने लोकसंघर्ष से बात करते हुए कहा कि एस आई आर से चुनाव धांधली की शुरुआत हुई और मतगणना तक ताकत के बल नकली विजय प्राप्त किया गया है। हद यहां तक हो गई है कि ढाई लाख केन्द्रीय सशस्त्र बलों के सामने लेनिन की मूर्ति जियागंज में तोड दी गई। जगह जगह - जगह संघी गुंडे आगजनी तोडफ़ोड़ मारपीट कर रहे हैं। केन्द्रीय बल खामोश है।
न्याय पालिका खामोश है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी लोकतंत्र की रक्षा के लिए देश भर में जनजागरण और आंदोलन की करेगी।
मंगलवार, 5 मई 2026
बंगाल चुनाव में कोई बेईमानी नहीं हुई है शान्तिपूर्ण चुनाव हुए हैं ममता पगला गई है - स्वप्न बनर्जी बंगाल कम्युनिस्ट नेता
बंगाल चुनाव में कोई बेईमानी नहीं हुई है शान्तिपूर्ण चुनाव हुए हैं ममता पगला गई है - स्वप्न बनर्जी बंगाल कम्युनिस्ट नेता
लोकसंघर्ष पत्रिका की ओर से स्वप्न बनर्जी प्रमुख कम्युनिस्ट नेता से बातचीत की गई तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि चुनाव में कोई बेईमानी नहीं हुई है शान्तिपूर्ण चुनाव हुए हैं। ममता बनर्जी की गुंडागर्दी नहीं चली है। जब उनसे कहा गया कि ममता इस्तीफा नहीं देंगी। कम्युनिस्ट नेता ने कहा कि वह पागल हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि एस आई आर में कुछ मतदाताओं के नाम विचाराधीन होने के कुछ मतदाता मत से वंचित रह गए हैं लेकिन फर्जी मतदाताओं के न होने कारण मतदान का प्रतिशत बढा है।
रविवार, 3 मई 2026
भारतीय राजनीति में अतुल कुमार अंजान का कोई मुकाबला नहीं है - राजन क्षीरसागर
बाराबंकी। साथी अतुल कुमार अंजान किसान आंदोलन व अंतरराष्ट्रीय कम्युनिस्ट आंदोलन के अप्रियतम योद्धा थे। यह विचार उ प्र किसान सभा द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते राष्ट्रीय अध्यक्ष राजन क्षीरसागर ने कहा कि स्वामीनाथन आयोग द्वारा फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए निर्धारित सी2+50% का फार्मूला साथी अतुल के अथक प्रयासों का ही परिणाम है, जो उस आयोग में एकमात्र किसान प्रतिनिधि थे।
अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव रावुला वेंकैया ने इस मौके पर बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि साथी अतुल कुमार अंजान की स्मृति को अमर बनाने के लिए किसान सभा एक वर्ष के भीतर दिल्ली में अपने मुख्यालय के रूप में ‘अतुल कुमार अंजान भवन’ का निर्माण कराएगी।
कांग्रेस के पूर्व सांसद जनप्रिय ने पी एल पुनिया का लाल सलाम के साथ स्वागत किया गया उन्होंने कहा कि आज के समय में अतुल अंजान जैसे नेताओं की आवश्यकता है।
अतुल कुमार अंजान विद्यार्थी आंदोलन के प्रखर नेता रहे हैं आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र संघ के कई साल अध्यक्ष रहे हैं यह बात भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव अरविन्द राजस्वरुप ने कहा ।
कार्यक्रम में साथी अतुल की दो बहनें रत्ना और किरण विशेष रूप से मौजूद रहीं। बहन रत्ना ने अपने भाई के साथ बिताए संस्मरण साझा करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम मे जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहसिन ने अतुल अंजान से संबंधित स्मरण सुनाए। राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष साथी छित्तर सिंह ने अतुल कुमार अंजान को महान नेता बताया।
किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष रणधीर सिंह ‘सुमन’, दीनानाथ त्रिपाठी राम नारायण सिंह देवेन्द्र मिश्र अशोक तिवारी रामकुमार भारती अशोक मिश्र मैनपुरी से राधेश्याम यादव बहराइच से सिदधनाथ श्रीवास्तव बांदा से डाँ रामचन्द्र सरस लखनऊ वी के सिंह जिला अध्यक्ष विनय कुमार सिंह,महिला फेडरेशन नेता कांती मिश्रा प्रवीण कुमार, राज्य परिषद सदस्य बृजमोहन वर्मा भाकपा जिला सचिव शिवदर्शन वर्मा डाँ कौसर हुसैन आशाराम वर्मा अमर सिंह सरदार भूपेंद्र पाल सिंह परत्युष कांत शुक्ला श्याम सिंह अंकुल वर्मा रीना मौर्य अभय वर्मा आदित्य कुमार सहित समाज के विविध वर्गों—किसानों, मजदूरों, छात्रों व बुद्धिजीवियों—ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर साथी अतुल कुमार अंजान को नमन किया। सभी वक्ताओं ने उनके किसान-मजदूर हितैषी संघर्षों को याद करते हुए उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता इम्तियाज बेग ने किया। सभी नेताओं ने अतुल कुमार अंजान के विभिन्न कट आउट पर माल्यार्पण किया।
शनिवार, 2 मई 2026
मजदूर नेताओं की पिटाई और मजदूर संघों की चुप्पी
मजदूर नेताओं की पिटाई और मजदूर संघों की चुप्पी
नोएडा पुलिस ने जिस उच्च शिक्षित आदित्य आनंद को नोएडा मजदूर आंदोलन के कथित साज़िश का मुख्य अभियुक्त बताया है, उसकी जेल में बहुत बुरी हालत है।गिरफ्तारी से पहले उसे 3 दिन थाने में रख कर मारा गया। फिर अभी 3 दिन की पुलिस कस्टडी ली गई और उसमें भी बस पीटा गया। खबर यह भी है कि उसकी हिरासत गुरुग्राम पुलिस, मानेसर आंदोलन के सिलसिले में मांग रही है। चमड़े की बेल्ट से उसकी खाल उधेड़ ली और न तो मेडिकल करने वाले डॉक्टर और न ही नोएडा अदालत के जज कुछ सुनने को तैयार है। उसे सरेआम एनकाउंटर करने की धमकी दी जा रही है।
इतनी निराशा और असहायता है कि नोएडा पुलिस के दमन के खिलाफ किससे कहो? सुप्रीम कोर्ट जाओ तो वह कहता है पहले हाई कोर्ट जाओ।
हाई कोर्ट यानी इलाहबाद हाई कोर्ट जहां विश्वसनीय और निशुल्क वकील मिलना जटिल है। फिर वहां के जज भी महान हैं।
आज भी मई दिवस पर नोयडा छावनी बना था। किसी को कोई आवाज़ उठाने की न अनुमति थी न हिम्मत। जेल में बंद श्रेयश कश्यप असम के चरियारी जिले की बेहत कम उम्र की गरीब बच्ची है। नेहा ठाकुर काशीपुर की है।।जान आंदोलन में आई इन युवतियों के परिवार की यह हालत नहीं कि वकील, अदालत के खर्चे उठा सकें।ऊपर से यूपी पुलिस कारखाना मालिकों के दवाब में दमन पर जुटी है।
यहां संवेदना मत दिखाइए। क्या आपके पास कोई विकल्प है? आप किस तरह की मदद कर सकते हैं?
-पंकज चतुर्वेदी
मंगलवार, 28 अप्रैल 2026
उ प्र का सिंघम अजय पाल शर्मा बंगाल में मनचला अपराधी
उ प्र का सिंघम अजय पाल शर्मा बंगाल में मनचला अपराधी
अजय पाल शर्मा और केन्द्रीय सशस्त्र बल जवानों पर घर में घुसकर अश्लील हरकत करने का आरोप, महिला ने दर्ज कराई शिकायत
पश्चिम बंगाल के फाल्टा में एक महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि 27 अप्रैल की रात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा और केंद्रीय बलों के जवानों ने घर में जबरन घुसकर महिलाओं से मारपीट और छेड़छाड़ की. शिकायत में भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने और धमकी देने का भी आरोप है. पीड़िता ने निष्पक्ष जांच, प्राथमिकी दर्ज करने और परिवार की सुरक्षा की मांग की है. मामला चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है.
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा क्षेत्र में चुनावी माहौल के बीच एक गंभीर शिकायत ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है. एक महिला ने फाल्टा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि देर रात अधिकारी अजय पाल शर्मा और केंद्रीय बलों के जवान घरों में जबरन घुस गए और महिलाओं के साथ मारपीट की.
शनिवार, 18 अप्रैल 2026
संघ भड़का रहा था बगावत, सेना प्रमुख करियप्पा की हत्या की कोशिश में 6 को हुई थी फांसी: सीआईए
संघ भड़का रहा था बगावत, सेना प्रमुख करियप्पा की हत्या की कोशिश में 6 को हुई थी फांसी: सीआईए
भारतीय सेना के पहले भारतीय सैन्य प्रमुख करियप्पा ने 15 जनवरी 1949 को ब्रिटिश सैन्य अफसर जनरल रॉय बुचर से भारतीय सेना प्रमुख की कमान ली थी।
जनसत्ता ऑनलाइन से
अमेरिकी की खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी (सीआईए) द्वारा सार्वजनिक (डिक्लासिफाइड) किए जा रहे दस्तावेजों से कई चौंकाने वाले दावे सामने आ रहे हैं। सीएआई के दस्तावेज के अनुसार भारत की आजादी के महज तीन साल बाद 1950 में फील्ड मार्शल (तब जनरल) केएम करियप्पा को जाने से मारने की कोशिश की गयी थी। भारतीय सेना के पहले भारतीय सैन्य प्रमुख करियप्पा ने 15 जनवरी 1949 को ब्रिटिश सैन्य अफसर जनरल रॉय बुचर से भारतीय सेना प्रमुख की कमान ली थी। अमेरिका के गोपनीयता कानून के अनुसार सीआईए एक निश्चित समय के बाद ऐतिहसाकि महत्व के गोपनीय दस्तावेज को सार्वजनिक कर दिया जाता है।
सीआईए के दस्तावेज के अनुसार, “भारतीय सेना के कमांडर इन चीफ जनरल करियप्पा के पूर्वी पंजाब के दौरे के समय उनकी हत्या की कोशिश की गयी थी।” सीआईए की डिक्लासिफाइड रिपोर्ट “रिफ्ट इन ऑफिसर्स कॉर्प ऑफ द इंडियन आर्मी” (भारतीय सेना के अफसर कॉर्प में मतभेद) नामक ये रिपोर्ट 12 जून 1950 को दर्ज की गयी थी। ये जानकारी इस दस्तावेज के माध्यम से पहली बार सामने आयी है।
सीआईए की इस “गोपनीय” रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन भारतीय सेना प्रमुख करियप्पा की हत्या की कोशिश के लिए छह लोगों को मौत की सजा दी गयी थी। रिपोर्ट में लिखा गया है, “छह लोगों को हत्या की साजिश से जुड़े होने के लिए मौत की सजा दी गयी है। माना जा रहा कि कई बड़े सैन्य अफसर इस मामले में शामिल थे।”
भारतीय सेना के पहले भारतीय सैन्य प्रमुख केएम करियप्पा को फील्ड मार्शन की उपाधि दी गयी। अभी तक सेना में केवल दो सेना प्रमुख को ये पद मिला है।
सीआईए की इस रिपोर्ट के अनुसार, “जनरल करियप्पा दक्षिण भारतीय हैं इसलिए भारतीय सेना के सिख अफसर उनसे नाखुश हैं। आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) सेना के अफसरों के बीच उत्तर-दक्षिण के विभेद का लाभ उठा रहा है और सिख अफसरों को, जो खबरी की नजर में धोखेबाज और भरोसा करने लायक नहीं, को असंतोष भड़काने के लिए उकसा रहा है। त्रावणकोर (मौजूदा केरल), मद्रास और महाराष्ट्र के अफसर जनरल करियप्पा के प्रति वफादार हैं।”
सीआईए ने करीब एक करोड़ 30 लाख पुराने गोपनीय दस्तावेज इंटरनेट पर सार्वजनिक किए हैं। ये दस्तावेज अमेरिकी सरकार के 1995 के एक्जिक्यूटिव आदेश के अनुसार डिक्लासिफाइड किए गए हैं। इस कानून के अनुसार ऐतिहासिक रूस से अहम 25 साल या उससे पुराने गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक कर दिए जाते हैं।
भारतीय सेना के इतिहास में अभी तक केवल दो सैन्य प्रमुखों सैम मानेकशॉ और केएम करियप्पा को फील्ड मार्शल मनोनीत किया गया है। फील्ड मार्शल ताउम्र इस पद पर रहते हैं। वो कभी रिटायर नहीं होते। उन्हें विशेष भत्ता, निजी स्टाफ और सचिव दिए जाते हैं।
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