गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

धर्मांतरण विरोधी कानून को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने पहुंची डाँ रुपरेखा वर्मा

लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति और सामाजिक कार्यकर्ता रूपरेखा वर्मा ने उत्तर प्रदेश के धर्मांतरण विरोधी कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। आरोप है कि कानून का उपयोग अंतरधार्मिक जोड़ों को प्रताड़ित करने और झूठे मामलों में फंसाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने इस कानून के तहत की जा रही कार्रवाइयों पर रोक लगाने की मांग की है। प्रमुख बिंदु: याचिका का आधार: रूपरेखा वर्मा ने अपनी संस्था 'सांझी दुनिया' के माध्यम से यह तर्क दिया कि यह कानून नागरिकों की स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है और इसका दुरुपयोग हो रहा है।

झूठ के सौ वर्ष

2 अक्टूबर, 2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी स्थापना की 100वीं सालगिरह समारोह में अमेरिकी मीडिया के कम से कम पांच मीडियाकर्मी को अपने मंच पर जगह देकर लामबंदी करने की अपनी क्षमता दिखा दी. इनमें से एक अमेरिकी पत्रकार, वॉशिंगटन पोस्ट के राजनीतिक संवाददाता और स्तंभकार, जिम गेराघ्टी ने 12 दिन बाद एक लेख लिख कर मोहन दास करमचंद गांधी की हत्या के मामले में आरएसएस के झूठों को हवा दी और उसके कलंकित अतीत को साफ़-सुथरा दिखाने की कोशिश की. गेराघ्टी सहित कुल पांच प्रमुख अमेरिकी मीडियाकर्मी, मेगन मैकार्डल (स्तंभकार, वॉशिंगटन पोस्ट), जेसन विलिक (स्तंभकार, वॉशिंगटन पोस्ट), निकोलस क्लेयरमांट (लाइफ़ एंड आर्ट्स सेक्शन के संपादक, वॉशिंगटन एग्ज़ामिनर मैगज़ीन) और लीना बेल (ओपिनियन सेक्शन की मैनेजिंग एडिटर, वॉल स्ट्रीट जर्नल) को नागपुर में आयोजित शताब्दी समारोह में आरएसएस ने अपने मंच पर बैठाया था. शताब्दी समारोह को कवर कर रहे एक विदेशी संवाददाता ने मुझे बताया, 'मंच पर बैठे सभी लोग बेहद खुश नज़र आ रहे थे. जब उनका नाम पुकारा गया, तो उन्होंने उत्साह के साथ खड़े हो कर अपना परिचय दिया.' 14 अक्टूबर को वॉशिंगटन पोस्ट ने नागपुर में मंच साझा करने वाले जिम गेराघ्टी का आरएसएस पर लेख प्रकाशित किया. लेख में आरएसएस को ठीक वैसा ही दिखाया गया जैसा आरएसएस ख़ुद के बारे में प्रचार करता है. गेराघ्टी ने आरएसएस को अर्द्धसैनिक संगठन कहे जाने को ग़लत बताते हुए कहा, 'मुझे यह थोड़ा अजीब लगता है कि जिस संगठन के सदस्य बंदूकों की बजाए लंबी लाठियों के साथ परेड करते हैं, उसे बार-बार अर्द्धसैनिक संगठन कहा जाता है.' नागपुर के शताब्दी समारोह में आरएसएस के सारे अर्द्धसैनिक लक्षण सामने आए और मंच पर बैठे गेराघ्टी ने उन्हें देखा होगा. फिर भी उन्हें आरएसएस को अर्द्धसैनिक संगठन कहना थोड़ा अजीब लगा, सिर्फ़ इसलिए कि उन्होंने स्वयंसेवकों को बंदूकें लिए नहीं देखा. अपने लेख में गेराघ्टी ने आरएसएस के अस्तित्व का मूल कारण ही छिपाने की कोशिश की. उन्होंने लिखा, 'इस आंदोलन में भर्ती होने वालों के लिए संगठन का आकर्षण समझना आसान है, यह भारत के पुरुषों में गर्व और कर्तव्यबोध जगाता है.' उनके इस दावे को लेकर मेरा पहला सवाल है कि क्या आरएसएस भारत के पुरुषों के लिए काम करता है या सिर्फ़ हिंदू पुरुषों के लिए? आरएसएस ख़ुद कभी नहीं कहता कि वह भारत के सभी मर्दों का संगठन है क्योंकि वह हिंदू मिलिशिया है. भारत के पुरुष जैसी एक तटस्थ लाइन चुन कर गेराघ्टी ने स्पष्ट रूप से आरएसएस की सांप्रदायिक प्रकृति को छिपाने की कोशिश की ताकि पश्चिम के पाठकों के लिए वह स्वीकार्य लगे. मेरा दूसरा सवाल यह है कि आरएसएस आख़िर सिखाता क्या है? गेराघ्टी का यह कहना कि आरएसएस अपने सदस्यों में गर्व और कर्तव्यबोध जगाता है, यह बात संघ के सार्वजनिक प्रचार से सीधे उठाई गई है कि स्वयंसेवक चरित्र-निर्माण, शारीरिक फिटनेस और हिंदू मूल्यों को बढ़ावा देते हैं. हकीक़त यह है कि शाखाओं और शिविरों में मुसलमान विरोधी स्वर पूरी तरह हावी रहता है. वहां स्वयंसेवक अपने हिंदू होने पर गर्व करते हैं और ख़ुद को हिंदू प्रतिरोध का हिस्सा मानते हैं. गेराघ्टी संघ के सबसे बड़े झूठ को भी आगे फैलाने से नहीं चूके कि नाथूराम गोडसे ने गांधी की हत्या से बहुत पहले आरएसएस छोड़ दिया था. उन्होंने लिखा, '1948 में मोहनदास गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे ने की, जो कभी आरएसएस का सदस्य रहा था, लेकिन हत्या के पहले ही छोड़ चुका था.' गांधी की 30 जनवरी, 1948 को हत्या के बाद आरएसएस अपने और हत्यारे के बीच संबंध को धुंधला करने की कोशिश करता रहा है. आरएसएस समर्थक लेखक पत्रकार इस झूठ को बार-बार दोहराते रहे हैं, जिसे साबित करने के लिए उनके पास संघ के अपने शब्दों के अलावा कोई प्रमाण नहीं है. अभिलेखीय दस्तावेज़, लेकिन, साबित करते हैं कि गोडसे ने कभी आरएसएस नहीं छोड़ा. यह सच बार-बार दोहराने की ज़रूरत है क्योंकि आज जो दल सत्ता में है, वह अपने ख़ून से रंगे अतीत को बेदाग बनाने के लिए कानूनी, शैक्षणिक, पत्रकारिता, आदि हर हथकंडा अपना रहा है. #RSS100Years #RSSorg #rss कारवां से

बुधवार, 11 फ़रवरी 2026

देश बेच रहे हो - राहुल गांधी

देश बेच रहे हो - राहुल गांधी

मणिपुर जल रहा है। कल रात को सेना से झड़प में 17 लोग मारे गए और 87 लोग घायल हुए

भारत का एक राज्य मणिपुर जल रहा है। कल रात को सेना से झड़प में 17 लोग मारे गए और 87 लोग घायल हुए। लेकिन, गोदी चैनल के कुकुर इस पर भौंकेंगे नहीं। भारत में इमरजेंसी लगी नहीं। लोगों ने इमरजेंसी का पट्टा गले में टांग लिया है।

सोमवार, 9 फ़रवरी 2026

शर्मदार न्यायपालिका प्रधानमंत्री का क्षेत्र न्यायालय का स्थगन-अधिकारियों द्वारा मकानों का ध्वस्तीकरण

शर्मदार न्यायपालिका प्रधानमंत्री का क्षेत्र न्यायालय का स्थगन-अधिकारियों द्वारा मकानों का ध्वस्तीकरण वाराणसी दाल मंडी में व्यापारी ने अपनी दुकान फूंक दी:खुद पर भी पेट्रोल छिड़का, बुलडोजर चलते देख लोग रोते-गिड़गिड़ाते रहे वाराणसी की दाल मंडी में प्रशासन ने जर्जर 21 मकानों-दुकानों में से 18 को ढहा दिया। बुलडोजर और हथौड़े से मकानों-दुकानों को तोड़ा गया। इससे पहले एक व्यापारी ने खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। मकान के पहले फ्लोर पर खड़े होकर सुसाइड करने की चेतावनी देने लगा। यह देखकर अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। अधिकारी उसे समझाने लगे। नाराज व्यापारी ने कहा- हमारा मकान जर्जर नहीं है। प्रशासन बेवकूफ नहीं बना सकता। अगर मकान गिराया तो हमें मुआवजा चाहिए। ये लोग जर्जर बताकर मुआवजा देने से बचना चाहते हैं। यह कहते हुए उसने दुकान में आग लगा दी। इसके बाद पुलिस ने मुश्किल से आग बुझाई। कई अन्य लोगों ने भी बुलडोजर एक्शन का विरोध किया। वे प्रशासन के अधिकारियों से 10 दिन की मोहलत मांगते रहे। तमाम लोग रोते-बिलखते दिखे। इस दौरान हंगामा करने वाले 8 लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस उन्हें खींचते हुए ले गई, कुछ लोगों की पिटाई भी की। दाल मंडी में सड़क चौड़ी करने के लिए जर्जर मकानों-दुकानों पर बुलडोजर चल रहा है। दाल मंडी में अब तक की यह एक दिन में सबसे बड़ी कार्रवाई है।

प्रधानमंत्री बनने के पहले अनवर इब्राहीम को 2 बार जेल हुई। आरोप अप्राकृतिक संबंध का था।

प्रधानमंत्री बनने के पहले अनवर इब्राहीम को 2 बार जेल हुई। आरोप अप्राकृतिक संबंध का था। मलयेशिया में यह अपराध है। 1998 में अपने ड्राइवर सहित अन्य पुरुषों के साथ संबंध बनाए। नौ वर्ष की सजा हुई। हालांकि 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रिलीज कर दिया। 2008 में उनके पूर्व सहायक ने आरोप लगाया कि अनवर ने उनसे बलपूर्वक अप्राकृतिक संबंध बनाया। 2014 में उन्हें पाँच वर्ष की सजा हुई। मगर 2018 में नई सरकार बनने पर राजा ने उन्हें पूर्ण क्षमादान दिया और रिहा किया। खैर। दोस्ती बनी रहे। Reborn Manish

रविवार, 8 फ़रवरी 2026

संघी भाजपाई नेताओं के झूठ का पर्दाफाश लखनऊ में एक भी बांग्लादेशी व रोहंगडियां मुस्लिम नहीं मिला

संघी भाजपाई नेताओं के झूठ का पर्दाफाश लखनऊ में एक भी बांग्लादेशी व रोहंगडियां मुस्लिम नहीं मिला उत्तर प्रदेश समेत देश के अलग-अलग राज्यों में दक्षिणपंथी समूह लगातार अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों के घुसपैठ करने का दावा करते रहे हैं. दक्षिणपंथी के विरोध और दबाव की वजह से बांग्ला भाषी मुसलमानों को जबरन बांग्लादेश में पुशबैक कर दिया गया. देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी अवैध घुसपैठ के दावे किए जा रहे थे. इस मामले की जांच पड़ताल के लिए लगातार प्रशासन एक्टिव भी रहता था. लखनऊ में कथित अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की तलाश को लेकर लंबे समय से चल रही सियासी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब पुलिस की जांच ने अलग तस्वीर पेश की है. योगी सरकार के दौर में बार-बार उठे दावों और खास तौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाए जाने के आरोपों के बीच चली व्यापक सत्यापन मुहिम के बाद राजधानी पुलिस का कहना है कि शहर में एक भी अवैध बांग्लादेशी नागरिक की पहचान नहीं हो सकी है. लखनऊ पुलिस ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की जांच के लिए कई महीने तक बड़े पैमाने पर सत्यापन मुहिम चलाई. लखनऊ पुलिस ने स्वीकार किया कि राज्य की राजधानी में गैरकानूनी रूप से रह रहे किसी भी बांग्लादेशी नागरिक की पुष्टि नहीं हुई. यह नतीजा उन लगातार राजनीतिक दावों और आरोपों के बावजूद सामने आया है, जिनमें कहा जाता रहा कि शहर की झुग्गी बस्तियों में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी मौजूद हैं. पुलिस ने क्या कहा? सीनियर अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग थाना क्षेत्रों में व्यापक जांच की गई. खास तौर पर झुग्गी बस्तियों और घनी आबादी वाले इलाकों को फोकस में रखा गया, जहां यह आशंका जताई जा रही थी कि कुछ लोग खुद को असम से आए प्रवासी बताकर रह रहे हैं. इस अभियान में घर-घर सत्यापन, दस्तावेजों की सख्त जांच और खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय शामिल था. हालांकि, जांच के दौरान कहीं भी किसी अवैध बांग्लादेशी नागरिक की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हो सकी. 'इंकलाब' ने लखनऊ के जॉइंट पुलिस कमिश्नर बबलू कुमार के हवाले से बताया कि पुलिस को जांच के दौरान कोई भी बांग्लादेशी या रोहिंग्या नहीं मिला. उन्होंने बताया कि ज्यादातर कूड़ा उठाने वाले कर्मचारी असम के बारपेटा और कामरूप जिलों से जुड़े पाए गए. बीजेपी नेताओं के दावों की खुली पोल इस मामले को लेकर पहले पूर्व आईपीएस और बीजेपी के राज्यसभा सदस्य बृज लाल, मेयर सुषमा खर्कवाल और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने नगर निगम से जुड़े कूड़ा उठाने वालों को बांग्लादेशी और रोहिंग्या बताते हुए उनकी जांच की मांग की थी. कुछ नेताओं ने यह भी दावा किया था कि राजधानी में दो लाख से ज्यादा बांग्लादेशी रह रहे हैं. सियासी दबाव के बाद राजधानी पुलिस ने सभी थाना प्रभारियों और एलआईयू टीम को शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थित झुग्गी बस्तियों की जांच का आदेश दिया था. इसी कड़ी में 18 नवंबर को मेयर सुषमा खर्कवाल ने गोमती नगर के जोन-4 स्थित विनीत खंडर में बने पोर्टेबल कंपैक्टर ट्रांसफर स्टेशन (PTS) का अचानक दौरा किया. वहां उन्होंने कथित तौर पर अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों या रोहिंग्याओं की पहचान के लिए सफाई कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच कराई. खास तौर पर असम से जुड़े कर्मचारियों के कागजात की पुष्टि की गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सफाई या कचरा प्रबंधन के काम में कोई बांग्लादेशी या रोहिंग्या तैनात न हो. इसके बाद 4 दिसंबर को मेयर ने गड़ंबा थाना क्षेत्र के पास फूलबाग कॉलोनी और इंदर नगर में भी बांग्लादेश और म्यांमार से आए कथित अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए जमीनी जांच शुरू की. उन्होंने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी के एक पार्षद की शह पर इलाके में अवैध रूप से बांग्लादेश से आए लोगों को बसाया जा रहा है. 'नहीं मिला एक भी रोहिंग्या या बांग्लादेशी' मेयर सुषमा खर्कवाल के सख्त रुख के बाद पुलिस सक्रिय हुई और थाना प्रभारियों को बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की तलाश के निर्देश दिए गए. इस काम में एलआईयू को भी लगाया गया है. पुलिस ने गोमती नगर, हजरतगंज, आशियाना, गड़ंबा, गोसाईंगंज, कृष्णा नगर और अन्य थाना क्षेत्रों की झुग्गी बस्तियों में जाकर रहने वाले लोगों के प्रमाणपत्र और दस्तावेजों की जांच की. फिलहाल जांच के दौरान राजधानी पुलिस को किसी भी बांग्लादेशी या रोहिंग्या नागरिक की पहचान नहीं हुई है. जॉइंट कमिश्नर बबलू कुमार के अनुसार ज्यादातर झुग्गी बस्तियों की जांच पूरी कर ली गई है और वहां काम करने वाले अधिकतर लोग असम के बारपेटा, कामरूप और आसपास के इलाकों से जुड़े पाए गए हैं.

जब एपस्टिन छोटे बच्चों को मार कर तल कर मेहमानों को खिलाता था,

जब एपस्टिन छोटे बच्चों को मार कर तल कर मेहमानों को खिलाता था, और उनका खून गिलास में डाल कर पिया जाता था, तब बच्चों ने अल्लाह भगवान गॉड वाहेगुरु सब को याद किया, लेकिन किसी ने बच्चों की मदद नहीं की, अल्लाह ने कहा मैं तुम्हारा इम्तेहान ले रहा हूँ तुम्हें तुम्हारे सबर का मर्तबा आखिरत के रोज मिलेगा और तुम पर जुल्म करने वालों का हिसाब हश्र के रोज़ किया जायेगा, बच्चों ने पूछा की अखीरत कितने वक्त बाद आएगी? तो पता चला कि करीब 60 अरब साल के बाद पृथ्वी का अंत होगा तब इन सब का हिसाब किया जाएगा और इन्हे सजा दी जाएगी | फिर बच्चों ने हिंदुओं के भगवान से प्रार्थना की कि हमें बचा लो लेकिन उसने भी मदद नहीं की | भगवान ने कहा तुमने पिछले जन्म में अपराध किए थे इसलिए मैं तुम्हें इस जन्म में सजा दे रहा हूं | इसी तरह के जवाब गॉड और वाहेगुरु ने भी दे दिए | लेकिन बच्चों की मदद किसी ने नहीं की | -हिमांशु कुमार

शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

भाजपा सरकार के अधिकारी है घूसखोर पंडत जी के निर्माता

भाजपा सरकार के अधिकारी है घूसखोर पंडत जी के निर्माता फिल्म का नाम "घूसखोर पंडत"। निर्माता हैं नीरज पांडे और अभिनेता है मनोज बाजपेयी। दोनों ब्राह्मण। मनोज बाजपेयी के भाई सुजीत कुमार बाजपेयी लेटरल एंट्री से बीजेपी सरकार में जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर पहुंचे। कहने का अर्थ यह कि मौजूदा समय में सरकार में शासक भी वही और हस्तक्षेप कर्ता भी वही, विरोधी भी वही, निर्माता भी वही तो फिर अपमानित, अनादर या बदनाम करने वाले लोग किसको समझा जाय?

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

एप्सटीन फाइल्स के बारे में कार्ल मार्क्स ने बहुत पहले से ही लिख दिया था-अरविंद राजस्वरुप

एप्सटीन फाइल्स के बारे में कार्ल मार्क्स ने बहुत पहले से ही लिख दिया था " हमारे पूंजीपतियों को ,मजदूरों की बहू बेटियों को अपनी मर्जी के मुताबिक इस्तेमाल करने से संतोष नहीं होता , वेश्याओं से भी उनका मन नहीं भरता इसलिए एक दूसरे की बीवियों पर हाथ साफ करने में उन्हें विशेष आनंद प्राप्त होता है।" यह 1848 में कार्ल मार्क्स ने "कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो में" लिखा था । (सर्वहारा और कम्युनिस्ट' के चैप्टर से) Epstein Files में सामने आए भारतीय नाम: नरेंद्र मोदी विश्व गुरु दीपक चोपड़ा वेलनेस गुरु, जिनका नाम फाइलों में पाया गया। अनिल अंबानी भारतीय व्यवसायी, जिनका नाम फाइलों में सबसे अधिक बार आने वालों में से एक है। मीरा नायर फिल्म निर्माता, जिनका नाम 2009 की एक पार्टी के संदर्भ में आया। अनुराग कश्यप प्रसिद्ध बॉलीवुड निर्देशक, जिनका नाम ईमेल संवाद में सामने आया। नंदिता दास अभिनेत्री और फिल्म निर्माता। हरदीप सिंह पुरी केंद्रीय मंत्री, जिनका नाम ईमेल संवाद में सामने आया। छोटी-छोटी 12, 13 ,14 साल की लड़कियां, चेहरे से मासूमियत झांकती हुई , उम्र में अपने से तीन तीन ,चार चार गुना बड़े लोगों की गोद में बैठी है ,या ऐसी स्थिति में है जिसकी कल्पना भी कोई शरीफ व्यक्ति नहीं कर सकता। जो लोग हैं, वह समाज के 'बड़े-बड़े' लोग हैं। बड़े-बड़े इनवर्टेड कोमाज में। तस्वीर देखकर दिल खौलता है। कैसे भारत सरकार में बैठे सरकार से जुड़े लोग उस दरिंदे एपिस्टिन से बात कर सकते थे? अथवा उस गलीज़ को मेल कर सकते थे अथवा उससे कोई दलाली बट्टा करवा सकते थे? जरा उस दरिंदे के बारे में जाने। जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) को मुख्य रूप से 2008 में सजा हुई थी। 30 जून 2008 को फ्लोरिडा (Florida) की एक राज्य अदालत में उसे दो आरोपों में गिल्टी प्लीड किया: एक नाबालिग (18 साल से कम उम्र की लड़की) से वेश्यावृत्ति के लिए प्रलोभन (procuring a child for prostitution) और वेश्या से संबंध बनाने का (soliciting a prostitute)। उस अपराधी को 18 महीने की सजा सुनाई गई, लेकिन एक विवादास्पद प्ली डील (plea deal) के तहत वह केवल लगभग 13 महीने जेल में रहा (जिसमें वर्क रिलीज़ की सुविधा भी शामिल थी)। बाद में 2019 में उसे नए संघीय आरोपों (sex trafficking of minors) पर गिरफ्तार किया गया था, लेकिन ट्रायल से पहले ही 10 अगस्त 2019 को जेल में उसकी मौत हो गई (आत्महत्या मानी गई)। हमारे भारतवासी कहते हैं वो भारत की पुरानी संस्कृति से जुड़े हुए हैं ! अब यहां तो मासूम बच्ची हैं। अधम नीचता की पराकाष्ठा है।

गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026

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