लो क सं घ र्ष !
लोकसंघर्ष पत्रिका
सोमवार, 9 मार्च 2026
हमारा वास्तविक दुश्मन पूंजीवाद है-राजेन्द्र यादव
बांदा। हमारा वास्तविक दुश्मन पूंजीवाद है ।
जो अपने उत्पादन की क्वॉन्टिटी कम करता जा रहा है मूल्य दिन दूना रात चौगुना बढा रहा हैं यह विचार व्यक्त करते हुए आल इंडिया किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेन्द्र यादव पूर्व विधायक ने कहा कि
मौजूदा सरकार ने हमारी गाढी कमाई के पब्लिक सेक्टर के बिभागो को
निजी हाथो मे सौप रहा है ।
जहां हमारे बच्चो से बारहः घंटे काम लेकर उनका खून निचोड़कर जीने भर का भोजन भर दिया जा रहा हैं।
हमे हिन्दू मुस्लिम मे उलझा कर पूजीपतियों का हित साधा जा रहा हैं ।किसानो के युवा लडके जो सरकारी नौकरी के लिए दिनरात मसक्सत करते है उन्हे सरकारी नौकरियो से बंचित किया जा रहा हैं ।
मोदी सरकार पूरी तरह से अमेरिका के हाथो मे बिक चुकी हैं ।
यदि अमेरिका से ट्रेड डिल समझौता किया है ।
अमेरिका का खाद्यान्न हमारी धरती पर आया तो यहां का किसान पूरी तरह से टूट जायेगा ।
डा रामचन्द्र सरस ने कहा जैसै कर्मचारी अधिकारी जाति पाति से ऊपर उठकर अपनी मांगे के लिए एक जुट होते हैं उसी तरह किसानो को अपने हितो के लिए एक होना पडेगा ।
सभा को मदन भाई पटेल ,अवधेश पटेल, उमा सिंह भइया लाल पटेल ने सभा का सफल संचालन किया ।किसान पंचायत बरौली आजम ग्राम मे महेन्द्र सिंह पटेल की अध्यक्षता मे सम्पन्न हुई।
शुक्रवार, 6 मार्च 2026
मंगलवार, 3 मार्च 2026
ईरान के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की एकजुटता का प्रदर्शन - लखनऊ सांसद राजनाथ किसके साथ?
ईरान के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की एकजुटता का प्रदर्शन - लखनऊ सांसद राजनाथ किसके साथ?
ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमलों के खिलाफ दिल्ली में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी विरोध प्रदर्शन
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी दिल्ली में ईरान पर अमेरिकी साम्राज्यवादी और ज़ायोनी इजरायली हमलों की निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन, एक संप्रभु राष्ट्र को निशाना बनाने और पश्चिम एशिया और उससे परे शांति को खतरे में डालने वाले इस खतरनाक तनाव की कड़ी आलोचना की गई। प्रदर्शन को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राष्ट्रीय सचिव अमरजीत कौर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी दिल्ली राज्य परिषद के सचिव और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रोफेसर दिनेश वार्ष्णेय , सीपीआई (एम) की वरिष्ठ नेता वृंदा करात, सीपीआई (एम) दिल्ली राज्य के सचिव अनुराग सक्सेना, सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, आरएसपी के सचिव आर.एस. डागर, एसयूसीआई के सचिव प्राण शर्मा और सीजीपीआई के बिरजू नाइक ने संबोधित किया। इनके अलावा सीपीआई (एमएल) न्यू डेमोक्रेसी और फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता भी उपस्थित थे। वक्ताओं ने ईरान के खिलाफ इस आक्रामकता के तहत अमेरिका-इजराइल गठबंधन द्वारा अयातुल्ला अली खामेनेई, उनके परिवार और अन्य ईरानी नेताओं की हत्याओं की कड़ी निंदा की। उन्होंने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन और संप्रभुता पर हमला बताते हुए चेतावनी दी कि ऐसी आक्रामकता वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए खतरा है। विरोध प्रदर्शन में केंद्र सरकार के रुख की भी आलोचना की गई और भारत से एकतरफा सैन्य आक्रामकता का दृढ़ता से विरोध करके अपनी स्वतंत्र विदेश नीति की परंपरा को कायम रखने का आह्वान किया गया। सीपीआई दिल्ली राज्य के कई नेता और एआईटीयूसी, एआईवाईएफ और एनएफआईडब्ल्यू सहित जन संगठनों के प्रतिनिधि भी एकजुटता दिखाने के लिए उपस्थित थे।
सोमवार, 2 मार्च 2026
रविवार, 1 मार्च 2026
दुबई, बहरीन, अबुधाबी, मनामा–ये सारे नाम दुनिया में ऐशगाह है - खामेनेई जिंदा नहीं है
दुबई, बहरीन, अबुधाबी, मनामा–ये सारे नाम दुनिया में ऐशगाह के रूप में मशहूर हैं।
दुनिया के रईस अपनी गर्लफ्रेंड या एस्कॉर्ट्स के साथ रंगरेलियां मनाने वहां जाते हैं।
यहां तेल कुबेर शेखों की रंगीनियां परवान चढ़ती हैं। ईरान ने जब इन शानोशौकत के किलों पर वार किया तो जंग का असल चेहरा दिखने लगा।
युद्ध विराम और शांति प्रस्तावों पर बात होने लगी।
लेकिन, कल अमेरिकी टॉमाहॉक मिसाइलों ने ईरान में लड़कियों के जिस स्कूल में 80 से ज्यादा लाशें गिरायीं, उस पर कोई बात नहीं कर रहा।
हम सब ग़ज़ा के गुनहगार हैं। उन 70 हज़ार से ज़्यादा बेकसूर लोगों के, जिन्हें इजरायल ने मारा।
जिस सऊदी अरब ने एक महीने पहले ईरान का साथ देने का वादा किया था, वही अब उसके ख़िलाफ़ खड़ा है।
ईरान की जंग अब 12 देशों को लपेटे में ले चुकी है। वर्ल्ड वॉर 2 के बाद ये सबसे बड़ी जंग है।
ईरान ने दिखा दिया कि ख़ामेनेई रहें या न रहें, जुल्मियों का अंत होकर रहेगा।
समूचे मिडिल ईस्ट में एक भी मुल्क ऐसा नहीं, जहां की अवाम अपनी हुकूमत से खुश हो।
ईरान में भी हजारों लोग मिलेंगे, जो अपने निज़ाम से खुश नहीं हैं। भारत में भी।
क्योंकि, लोकतंत्र का वज़ूद किसी बाहरी देश की ताकत, दौलत और तलवार की धार पर टिका है।
इसे खारिज़ करने के लिए ईरान बनना होगा।
खामेनेई कुछ इसी तरह की बात कह रहे हैं। वे जिंदा नहीं हैं।
-सौमित्र राय
शनिवार, 28 फ़रवरी 2026
कम्युनिस्ट आंदोलन के हीरो अतुल कुमार अंजान
शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की गोद में खेलने और पलने वाले। भारत के कम्युनिस्ट आंदोलन में हिंदी क्षेत्र के सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली चेहरों में से एक कॉमरेड अतुल कुमार अंजान का जन्म बिहार के बांका ज़िले में हुआ, हालांकि उनकी कर्मभूमि उत्तर प्रदेश रही। उनके पिता ए.पी. सिंह लखनऊ के चर्चित डॉक्टर थे और उनका जुड़ाव शहीद-ए-आजम Bhagat Singh के क्रांतिकारी संगठन Hindustan Socialist Republican Association से था।
उनके श्वसुर Indradeep Sinha 1967 में बिहार की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार में मंत्री रहे और उनका गहरा संबंध किसान आंदोलन के महानायक Swami Sahajanand Saraswati से था। स्पष्ट है कि अतुल अंजान को क्रांतिकारी और किसान आंदोलन की विरासत घर से ही मिली थी।
1978 में वे Lucknow University छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए और चार बार इस पद पर जीत हासिल की। उस समय परिसर में नारा गूंजता था—
“मेरी जान, तेरी जान — अतुल अंजान!”
1979 में वे All India Students’ Federation के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। हिंदी पट्टी के किसी बड़े विश्वविद्यालय में एक कम्युनिस्ट का इस तरह लोकप्रिय होना असाधारण घटना थी।
वे Communist Party of India (सीपीआई) के राष्ट्रीय सचिव तथा All India Kisan Sabha के महासचिव रहे। 1997 से किसान सभा से उनका गहरा जुड़ाव था। किसानों के मुद्दों पर गठित स्वामीनाथन आयोग में वे किसानों के एकमात्र प्रतिनिधि थे।
घोसी लोकसभा क्षेत्र से उन्होंने चार बार चुनाव लड़ा। भले ही वे संसद नहीं पहुंच सके, लेकिन बिना किसी सदन के सदस्य बने भी वे राष्ट्रीय स्तर के चर्चित नेता रहे—यह उनकी जनस्वीकृति और वैचारिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
कम्युनिस्ट आंदोलन में अक्सर दक्षिण भारतीय नेताओं का प्रभाव रहा है, लेकिन हिंदी क्षेत्र में P. C. Joshi के बाद यदि कोई सर्वाधिक चर्चित और प्रभावशाली चेहरा उभरा, तो वह अतुल अंजान थे।
प्रवाहमान, मुहावरेदार और प्रभावशाली हिंदी में बोलना उनकी विशेषता थी। उनके भाषणों में लोककथाएँ, मुहावरे और तर्क का अद्भुत संगम होता था। टीवी बहसों में वे वामपंथ की मुखर आवाज़ के रूप में जाने जाते थे और एंकरों को तथ्यात्मक चुनौती देने का साहस रखते थे।
अपने भाषणों में वे दो प्रमुख चुनौतियों— नवउदारवादी आर्थिक नीतियाँ एवं सांप्रदायिकता को लगातार चिन्हित करते थे। वे युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और मार्क्सवादी दर्शन से जुड़ने का आह्वान करते थे। उन्होंने पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस के माध्यम से कई क्लासिक पुस्तकों के पुनर्प्रकाशन में भूमिका निभाई।
अपने अंतिम दिनों में मृत्युशय्या से उन्होंने वाम आंदोलन का प्रिय गीत गाया—
“तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी के गीत में यक़ीन कर,
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर।”
‘स्वर्ग’ को ज़मीन पर उतारने का सपना देखने और उसके लिए आजीवन संघर्ष करने वाले नेता अतुल अंजान का 3 मई की सुबह लखनऊ में निधन हो गया। वे 70 वर्ष के थे और लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे।
हिंदी पट्टी के इस करिश्माई कम्युनिस्ट नेता को लाल सलाम।
-भवेश भारद्वाज
कथित लोमड़ी रुपी सरकार ने मंदिरों को सबसे ज्यादा गिराया है। विधर्मी मुफ़्त बदनाम है
हिन्दू ओं की डबल इंजन सरकार
शंकराचार्य मठ की 4 मंजिला भवन पर चला बुलडोजर
प्रशासन के अनुसार, मठ परिसर में लगभग 10 से 15 हजार वर्गफुट क्षेत्र मे निर्माण था गिरा दिया गया है।
मजेदार बात यह है कि कथित लोमड़ी रुपी सरकार ने मंदिरों को सबसे ज्यादा गिराया है। विधर्मी मुफ़्त बदनाम है।
ईरान के हमले से इजराइल चिल्लाया ट्रम्प रोया उसके नालायक नाजायज पुत्र खामोश
ईरान के हमले से इजराइल चिल्लाया ट्रम्प रोया
उसके नालायक नाजायज पुत्र खामोश
ईरान का पलटवार : कई टार्गेट्स निशाने पर लगे।
इस बार Surprise का एलिमेंट नहीं था। ईरान जानता था कि हमला कभी भी हो सकता है। इसलिए रिस्पांस भी तुरंत हुआ है।
ईरान ने पहले ही कहा था कि यह युद्ध सारे खाड़ी क्षेत्र में फैलेगा।
UAE, Qatar, Saudi Arabia, Jordan में अपने नागरिकों को दी चेतावनी से यह साफ़ है कि इन देशों के अमेरिकन बेसेज पर कभी भी हमला हो सकता है।
शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026
ये मोदी और संघ के मित्र हैंअनिल अंबानी लूट में सबसे आगे -
ये मोदी और संघ के मित्र हैं -
अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) के खिलाफ CBI ने धोखाधड़ी का एक नया मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनी ने साल 2013 से 2017 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) के साथ 2,220 करोड़ रुपए से ज्यादा की धोखाधड़ी की है।
CBI के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने बैंक से लोन लिया, लेकिन उस पैसे का इस्तेमाल तय काम के लिए करने के बजाय अपनी ही दूसरी कंपनियों (रिलेटेड पार्टीज) में फर्जी ट्रांजैक्शन दिखाकर डायवर्ट कर दिया।
जांच में सामने आया है कि इस हेरफेर की वजह से बैंक ऑफ बड़ौदा को 2,220 करोड़ रुपए से ज्यादा का घाटा हुआ है।
हाईकोर्ट से स्टे हटने के बाद कार्रवाई
अधिकारियों के मुताबिक, अनिल अंबानी की कंपनी का यह खाता 2017 में ही एनपीए (NPA) घोषित हो चुका था। हालांकि, अनिल अंबानी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद कोर्ट ने इस खाते को 'फ्रॉड' घोषित करने पर रोक लगा दी थी।
यह स्टे 23 फरवरी 2026 को हटा लिया गया। स्टे हटते ही बैंक ऑफ बड़ौदा ने शिकायत दर्ज कराई और सीबीआई ने तुरंत एक्शन लेते हुए केस दर्ज कर लिया।
कहां गया लोन का पैसा?
शिकायत के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM), रिलायंस इंफ्राटेल (RITL) और रिलायंस टेलीकॉम (RTL) ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कुल 31,580 करोड़ रुपए जुटाए थे। इसमें से:
6,265.85 करोड़ रुपए दूसरे बैंकों के लोन चुकाने में खर्च किए गए।
5,501.56 करोड़ रुपए अपनी ही जुड़ी हुई कंपनियों को दिए गए।
3,674.85 करोड़ रुपए फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए, जिन्हें तुरंत निकालकर दूसरी पार्टियों को भुगतान कर दिया गया।
बैंक का कहना है कि यह साफ तौर पर लोन की शर्तों का उल्लंघन है। रिलायंस इंफ्राटेल द्वारा जुटाए गए 1,783.65 करोड़ रुपए का इस्तेमाल भी RCOM ने अपनी देनदारियां चुकाने या जुड़ी हुई कंपनियों को ट्रांसफर करने में किया।
जांच में हुआ खुलासा
5 जून 2017 को इस खाते को एनपीए घोषित किया गया था, क्योंकि कंपनी लोन चुकाने में नाकाम रही थी। बाद में हुई जांच में पुष्टि हुई कि फंड के साथ हेराफेरी की गई है और यह सब जानबूझकर धोखाधड़ी की नीयत से किया गया।
FIR में यह भी कहा गया है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों ने एक सोची-समझी आपराधिक साजिश के तहत बैंक को नुकसान पहुंचाया और खुद को फायदा देने के लिए पैसों का गबन किया।
SBI के केस से अलग है मामला
SBI पहले से ही 11 बैंकों के समूह (कंसोर्टियम) की अगुवाई कर रहे एसबीआई (SBI) की शिकायत पर RCOM के खिलाफ एक केस दर्ज कर चुकी है। हालांकि, बैंक ऑफ बड़ौदा उस ग्रुप का हिस्सा नहीं था।
CBI ने साफ किया कि यह बैंक ऑफ बड़ौदा, तत्कालीन विजया बैंक और देना बैंक से लिए गए अलग लोन का मामला है।
-जगदीश्वर चतुर्वेदी
खुदा इन्हें माफ कर - रिजवान मुस्तफा
या रब्बुल आलमीन…
यह धरती तूने हमें अमानत में दी है।
यह सरज़मीन हमारे बुज़ुर्गों की दुआओं से बसी है,
शहीदों के कुर्बानियों से पाक हुई है।
अगर आज हमारे दिलों में बेचैनी है,
तो इसलिए कि हमें अपनी पहचान से मोहब्बत है।
हम अपने वतन को किसी और के नाम में ढलता हुआ नहीं देख सकते।
ऐ मालिक…
हमारे दिलों से नफ़रत निकाल दे,
लेकिन हमारी गैरत सलामत रख।
हमारी मोहब्बत वतन से कम न हो,
और हमारी इंसानियत भी कम न हो।
भारत एक ख़ूबसूरत गुलदस्ता है —
जहाँ हर रंग की खुशबू है।
इसे एक रंग में रंग देने की कोशिश
उसकी रूह को छोटा कर देगी।
या अल्लाह…
हमारे मुल्क को अमन दे,
इंसाफ़ दे,
और ऐसी रहनुमाई दे
जो इसे अपने पैरों पर खड़ा रखे
न कि किसी और की छाया में।
गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026
कम्युनिस्ट नेता वेद प्रकाश वेद का निधन
कम्युनिस्ट नेता वेद प्रकाश वेद का निधन
वह उ प्र नौजवान सभा के महामंत्री रहे थे। कम्युनिस्ट आंदोलन में वह कई बार जेल गए थे। किसान सभा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बडे नेता थे। उनका निधन प्रदेश कम्युनिस्ट आंदोलन की बड़ी छति है
वेद प्रकाश वेद जन्म 04-08-1945 मृत्यु 25-02-2026 जन्म स्थान: राजपुर कलां जिला: मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश पिता का नाम: श्री सुचेत सिंह पत्नी: गृहिणी संतान: तीन पुत्रियाँ और दो पुत्र छोड़ गए हैं।
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