बुधवार, 10 अप्रैल 2024

उच्चतम न्यायालय में रामदेव का खुला काला चिठ्ठा - अब माफी मांग रहे हैं

पतंजलि विज्ञापन केस में रामदेव-बालकृष्ण का माफीनामा खारिज:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जानबूझकर हमारे आदेश की अवमानना की, कार्रवाई के लिए तैयार रहें पतंजलि आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापन मामले में बाबा रामदेव और बालकृष्ण सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। पतंजलि के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने याचिका लगाई है। पतंजलि आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापन मामले में बाबा रामदेव और बालकृष्ण सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। पतंजलि के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने याचिका लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पतंजलि के विवादित विज्ञापन केस में बाबा रामदेव और बालकृष्ण के दूसरे माफीनामे को भी खारिज कर दिया। जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अमानतुल्लाह की बेंच ने पतंजलि के वकील विपिन सांघी और मुकुल रोहतगी से कहा कि आपने जानबूझकर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है, कार्रवाई के लिए तैयार रहें। उत्तराखंड सरकार की ओर से ध्रुव मेहता और वंशजा शुक्ला ने एफिडेविट पढ़ा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केंद्र से खत आता है कि आपके पास मामला है। कानून का पालन कीजिए। 6 बार ऐसा हुआ। बार-बार लाइसेंसिंग इंस्पेक्टर चुप रहे। इसके बाद जो आए, उन्होंने भी यही किया। तीनों अफसरों को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी। इससे पहले 2 अप्रैल को इसी बेंच में हुई सुनवाई के दौरान पंतजलि की तरफ से माफीनामा दिया गया था। उस दिन भी बेंच ने पतंजलि को फटकार लगाते हुए कहा था कि ये माफीनामा सिर्फ खानापूर्ति के लिए है। आपके अंदर माफी का भाव नहीं दिख रहा। इसके बाद कोर्ट ने 10 अप्रैल को सुनवाई की तारीख तय की थी। सुनवाई से ठीक एक दिन पहले 9 अप्रैल को बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद के मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्ण ने नया एफिडेविट फाइल किया। जिसमें पतंजलि ने बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि इस गलती पर उन्हें खेद है और ऐसा दोबारा नहीं होगा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने पतंजलि के खिलाफ याचिका लगाई है सुप्रीम कोर्ट इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की ओर से 17 अगस्त 2022 को दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रही है। इसमें कहा गया है कि पतंजलि ने कोविड वैक्सीनेशन और एलोपैथी के खिलाफ निगेटिव प्रचार किया। वहीं खुद की आयुर्वेदिक दवाओं से कुछ बीमारियों के इलाज का झूठा दावा किया। सॉलिसिटर जनरल: मैं राज्य को सलाह देता हूं कि अपने पहले के सभी एफिडेविट फेंक दें। जस्टिस हिमा कोहली: आप जो कर सकते थे, आपने वो किया। एफिडेविट में कथित जैसे शब्द है। कथित क्या, कथित नोटिस, कथित गलती, कथित अवमानना। सॉलिसिटर जनरल: ये सभी वकील हैं, जिन्होंने एफिडेविट बनाया। रोहतगी: हम एक सार्वजनिक माफीनामा दे सकते हैं। जस्टिस हिमा कोहली: हम यह सब देखेंगे, अभी हमें ऑर्डर देने दीजिए। जस्टिस कोहली: हमें अफसर का एफिडेविट चाहिए कि 3 साल तक फाइलें बढ़ाने के अलावा किया क्या। जस्टिस कोहली ने एडवोकेट बलवीर सिंह से कहा: यहां बहुत बड़ी गलतियां हैं। यहां आम आदमी की सेहत पर असर पड़ा है। अच्छी भावना के साथ रिप्लाई किया है, क्या ये अच्छी भावना है। हमें ऐसी सभी कंपनियों को लेकर फिक्र है, जो ऐसे लुभावने विज्ञापन देती हैं और लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। ध्रुव मेहता: हम एक्शन लेंगे। जस्टिस कोहली: भगवान का शुक्र है अब आप जाग गए। ध्रुव मेहता: हम कार्यवाही करेंगे। जस्टिस कोहली: ये सब कागजी कार्यवाही है। जस्टिस अमानतुल्लाह: अभी आपने ऐसी कौन सी घुट्टी ली है कि हम आपकी बात मान लें। आपकी चेतावनी के बाद फुल पेज ऐड आया है। आपके पास लोग रद्दी लेकर आएंगे क्या। जस्टिस हिमा कोहली: आप चाहते हैं कि हम एक आदमी को माफ कर दें। उन सभी लोगों का क्या, जिन्होंने आपकी दवा खाई थी, जिनके बारे में कहा गया था कि ये बीमारी दूर कर देंगी, जिनका इलाज नहीं हो सकता था। क्या आप ऐसा किसी आम आदमी के साथ कर सकते हैं? कुछ पत्र लिखे गए। ध्रुव मेहता: यह महज गलतियां हैं। जस्टिस कोहली: यह मूर्खता है। जस्टिस अमानतुल्लाह: मामला चला आ रहा है। तीन लेटर लिखे गए। यह पोस्ट ऑफिस की तरह है। ध्रुव मेहता: हम पार्टी नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट: वाह, आप पार्टी नहीं हैं तो आप अपनी जिम्मेदारी से बच जाएंगे। यह एकदम निराधार तर्क है। (डॉक्टर मिथिलेश कुमार हाजिर हुए।) जस्टिस अमानतुल्लाह: आप पोस्ट ऑफिस की तरह काम कर रहे थे? आपके पास यह सब कहने की हिम्मत है? जस्टिस हिमा कोहली: आपका कोई वकील है? जस्टिस अमानतुल्लाह: आपके लिए यह शर्मनाक है। जस्टिस हिमा कोहली: किस बुनियाद पर आपने यह कहा। किसने आपसे कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने ड्रग और मैजिक रेमिडीज एक्ट पर रोक लगा दी। कबसे हैं आप इस पोस्ट पर। आपके भीतर कोई संशय था तो आपने किस विभाग से सलाह ली? जस्टिस कोहली: हम यह क्यों ना मानें कि आपकी मिलीभगत नहीं थी। बताइए सारे लेटर आपकी ओर से गए हैं। डॉक्टर कुमार: ये हमारे आने से पहले का काम है। जस्टिस हिमा कोहली: कोई मरे तो मरे, हम वही करेंगे। जस्टिस अमानतुल्लाह: आपको भी अपराधी माना जाएगा। अभी तो यह शुरुआत है। ध्रुव मेहता ने जवाब पढ़ना शुरू किया। जस्टिस हिमा कोहली: अगर आप हिंदी को लेकर असहज हैं तो अपने साथी से कहिए कि वो पढ़े। अंग्रेजी में यह अपना भाव खो रहा है। वंशजा शुक्ला ने जवाब पढ़ना शुरू किया। जस्टिस कोहली: आप हमारे आदेशों का इंतजार कर रहे थे। जस्टिस अमानतुल्लाह: राज्य सरकारें लीगल एक्सपर्ट के सहारे ऐसा नहीं कर सकती हैं। अगर ऐसे जवाब स्वीकार कर लिए गए तो सुप्रीम कोर्ट का मजाक बन जाएगा। जस्टिस हिमा कोहली: सरकार और अफसर साथ मिले हुए थे। जस्टिस अमानतुल्लाह: सरकार को ऐसा अफसर नियुक्त करना चाहिए, जो इन सबसे जुड़ा हुआ ना हो। जस्टिस हिमा कोहली: जिसने जवाब दिया था, वो अफसर कहां है। जस्टिस हिमा कोहली: मिस्टर मेहता (उत्तराखंड सरकार के वकील) आपने जानबूझकर अपनी आंखें बंद रखीं। आपने जो लेटर बताया, उसे पढ़िए। क्या लिखा है उसमें। आपने कहा कि इन कंपनियों ने दवाएं बनाई हैं। आपने लिखा कि विज्ञापन केवल सांकेतिक हैं। वो आपकी नाक के नीचे ऐसा करते कहे, उन्होंने कहा कि विज्ञापन सांकेतिक है और आपने मान लिया! उन्होंने कहा कि उनका मकसद लोगों को आयुर्वेद से जोड़ना नहीं है। ऐसा लग रहा था कि वो पहले आदमी हैं, जिनके पास आयुर्वेदिक दवाएं हैं। जस्टिस खान: अफसरों को सहारा देना, हम इसे हल्के में नहीं लेंगे। जस्टिस हिमा कोहली: देखिए किस तरह से अफसर सिर्फ बैठे रहे और फाइलें खिसकाते रहे। जस्टिस खान: अफसरों के खिलाफ सख्त एक्शन लेना चाहिए। उत्तराखंड सरकार से जस्टिस हिमा कोहली: हां ध्रुव मेहता, अफसर फाइलें खिसकाने के अलावा क्या करते रहे। जस्टिस अमानतुल्लाह खान: अभी जवाब दीजिए। ध्रुव मेहता: बॉम्बे हाई कोर्ट का एक ऑर्डर है। जस्टिस खान: उसका यहां कोई आधार नहीं है। उत्तराखंड सरकार की ओर से ध्रुव मेहता और वंशजा शुक्ला ने एफिडेविट पढ़ा। सुप्रीम कोर्ट: हम आपको भी मुक्त नहीं करेंगे। केंद्र से खत आता है कि आपके पास मामला है। कानून का पालन कीजिए। 6 बार ऐसा हुआ। बार-बार लाइसेंसिंग इंस्पेक्टर चुप रहे। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद जो आए, उन्होंने भी यही किया। तीनों अफसरों को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए। जस्टिस हिमा कोहली: यह लापरवाही का मामला नहीं है, यह दिखाता है कि ड्रग ऑफिसर ने काम कैसे किया। उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए। अफसरों को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए। मुकुल रोहतगी: हमने कहा कि बिना शर्त माफीनामा है। मैंने उन्हें (रामदेव-पतंजलि) को भी बताया था। सुप्रीम कोर्ट: लेकिन हम संतुष्ट नहीं है। आपको गलत नहीं ठहरा रहे हैं। रोहतगी: कृपया अगले हफ्ते सुनवाई कीजिए। सुप्रीम कोर्ट: क्यों? यहां वो लोग गलत हैं। समाज में संदेश जाना चाहिए कि कोर्ट के आदेश का उल्लंघन ना हो। ये सिर्फ एक कंपनी का मामला नहीं है, यह कानून के उल्लंघन का मामला है। अपने जवाब देख लीजिए। जब राज्य सरकार ने आपसे विज्ञापन वापस लेने के लिए कहा तो आपने दलील दी थी कि हाईकोर्ट ने किसी भी एक्शन पर रोक लगा रखी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा: जब रामदेव और बालकृष्ण को पता चल गया कि वो गलत हैं, इसके बाद उन्होंने दस्तावेज पर माफीनामा दिया। हम इस माफीनामे को स्वीकार करने से इनकार करते हैं। हम मानते हैं कि जानबूझकर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। कार्रवाई के लिए तैयार रहें। वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी: यहां दो एफिडेविट हैं। एक पतंजलि का और दूसरा उसके MD का। हम बिना शर्त माफी मांगते हैं, आगे कोई गलती नहीं होगी। हमारा इरादा आदेश का उल्लंघन करने का नहीं था। जस्टिस हिमा कोहली: कंटेम्पट के मामले में आपको राहत चाहिए, आप कह रहे हैं कि आपको विदेश जाना है, टिकट है और फिर आप कहते हैं। आप प्रक्रिया को बहुत हल्के में ले रहे हैं।​​​​​​​ मुकुल रोहतगी: टिकट दस्तावेजों में है। ये अगले दिन आया था। SG तुषार मेहता: मेरी वकील साहब को सलाह है कि माफी बिना शर्त होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट: इन लोगों को सिफारिशों पर भरोसा नहीं है। मुफ्त की सलाह हमेशा ऐसे ही ली जाती है। हम एपिडेविट से संतुष्ट नहीं हैं। केस में लगाई एक और याचिका को बेंच ने देखा। कोर्ट ने पूछा: आप कौन हैं? याचिकाकर्ता के वकील: मुअक्किल की मां का किडनी का इलाज हुआ था। कोर्ट: हम इससे ज्यादा जरूरी चीज देख रहे हैं, पब्लिसिटी के लिए बीच में मत कूदिए। जस्टिस हिमा कोहली: इस याचिका का कोई आधार नहीं है। हम इसे खारिज कर देंगे। 5 साल तक आप बैठे रहे। हमें आपकी सहायता नहीं चाहिए। हम इसे खारिज करते हैं और 10 हजार जुर्माना लगाते हैं। याचिकाकर्ता: हमें इसे वापस लेने की इजाजत दीजिए। जस्टिस हिमा कोहली: आपको पहले दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए था। 2 अप्रैल को कोर्ट ने कहा- रामदेव की माफी मान्य नहीं, सरकार ने आंखें क्यों मूंदे रखीं 2 अप्रैल को सुनवाई के दौरान रामदेव के वकील बलवीर सिंह ने कोर्ट से कहा कि योगगुरु माफी मांगने के लिए यहां मौजूद हैं। भीड़ की वजह से कोर्टरूम नहीं आ पाए। अदालत ने एफिडेविट देखने के बाद फटकार लगाई और कहा कि यह प्रॉपर एफिडेविट नहीं है। जब बलवीर सिंह ने माफीनामा पढ़ा तो अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में आदेशों का उल्लंघन करने वाला माफी मांगता है। हमें रामदेव के वकील का माफीनामा नहीं सुनना। बेंच ने कहा, "केवल सुप्रीम कोर्ट नहीं, देश की हर अदालत के आदेश का सम्मान होना चाहिए। आपको अदालत के निर्देशों का पालन करना था और आपने हर सीमा लांघी। अदालत ने कहा कि जब पतंजलि हर कस्बे में जाकर कह रही थी कि एलोपैथी से कोविड में कोई राहत नहीं मिलती तो केंद्र ने अपनी आंखें क्यों बंद कर रखी थीं। सही एफिडेविट फाइल ना करने पर केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जो हुआ, वो नहीं होना चाहिए था। मेहता ने रामदेव और पतंजलि के वकीलों को सहयोग करने की पेशकश की। क्या है पूरा मामला 2022 में दिए गए इस विज्ञापन को लेकर पतंजलि के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। 10 जुलाई 2022 को पतंजलि ने एक विज्ञापन जारी किया। एडवर्टाइजमेंट में एलोपैथी पर गलतफहमियां फैलाने का आरोप लगाया गया था। इसके खिलाफ 17 अगस्त 2022 को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। 21 नवंबर 2023 को हुई सुनवाई में जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा था- पतंजलि को सभी भ्रामक दावों वाले विज्ञापनों को तुरंत बंद करना होगा। कोर्ट ऐसे किसी भी उल्लंघन को बहुत गंभीरता से लेगा और हर एक प्रोडक्ट के झूठे दावे पर 1 करोड़ रुपए तक जुर्माना लगा सकता है। पतंजलि पर दो बड़े आरोप कोर्ट के आदेश के बाद भी पतंजलि ने जारी किए थे विज्ञापन इससे पहले हुई सुनवाई में आईएमए ने दिसंबर 2023 और जनवरी 2024 में प्रिंट मीडिया में जारी किए गए विज्ञापनों को कोर्ट के सामने पेश किया। इसके अलावा 22 नवंबर 2023 को पतंजलि के CEO बालकृष्ण के साथ योग गुरु रामदेव की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बारे में भी बताया। पतंजलि ने इन विज्ञापनों में मधुमेह और अस्थमा को 'पूरी तरह से ठीक' करने का दावा किया था। पतंजलि पर दो कानून उल्लंघन का आरोप ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट 1954 क्या है ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट अधिनियम, 1954 - यह कानून फर्जी इलाज और दवाओं के प्रचार और उनके मार्केटिंग पर रोक लगाता है। इसके अलावा जो किसी बीमारी को बिना साइंटिफिक प्रूफ के पूरी तरह से ठीक करने का दावा करता है, उन्हें इस कानून के उल्लंघन का दोषी माना जाता है। ये कानून ऐसे दावों को संज्ञेय अपराध की कैटेगरी में मानता है। कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 क्या है इस कानून के तहत यदि कोई कंपनी झूठा या भ्रामक प्रचार करती है जो कंज्यूमर के हित के खिलाफ है तो उसे 2 साल की सजा और उस पर 10 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। अगर कंपनी ऐसा अपराध दोबारा करती है तो जुर्माना बढ़कर 50 लाख रुपए और पांच साल की सजा मिलती है। कोर्ट ने सरकार से पूछा था- आपने पतंजलि पर क्या कार्रवाई की कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि पतंजलि के विज्ञापनों के खिलाफ ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम 1954 के तहत क्या कार्रवाई की गई है। केंद्र की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने कहा कि इस बारे में डेटा इकट्ठा किया जा रहा है। कोर्ट ने इस जवाब पर नाराजगी जताई और कंपनी के विज्ञापनों पर नजर रखने का निर्देश दिया था। पतंजलि से जुड़े अन्य विवाद... कोरोना के अलावा रामदेव बाबा कई बार योग और पतंजलि के प्रोडक्ट्स से कैंसर, एड्स और होमोसेक्सुअलिटी तक ठीक करने के दावे को लेकर विवादों में रहे हैं। 2018 में भी FSSAI ने पतंजलि को मेडिसिनल प्रोडक्ट गिलोय घनवटी पर एक महीने आगे की मैन्युफैक्चरिंग डेट लिखने के लिए फटकार लगाई थी। 2015 में कंपनी ने इंस्टेंट आटा नूडल्स लॉन्च करने से पहले फूड सेफ्टी एंड रेगुलेरिटी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) से लाइसेंस नहीं लिया था। इसके बाद पतंजलि को फूड सेफ्टी के नियम तोड़ने के लिए लीगल नोटिस का सामना करना पड़ा था। 2015 में कैन्टीन स्टोर्स डिपार्टमेंट ने पतंजलि के आंवला जूस को पीने के लिए अनफिट बताया था। इसके बाद CSD ने अपने सारे स्टोर्स से आंवला जूस हटा दिया था। 2015 में ही हरिद्वार में लोगों ने पतंजलि घी में फंगस और अशुद्धियां मिलने की शिकायत की थी।

मंगलवार, 9 अप्रैल 2024

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है. सीपीआई ने सीएए खत्म करने का वादा किया है

लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है. सीपीआई ने सीएए खत्म करने का वादा किया है. जानिए घोषणा पत्र में और क्या है. नई दिल्ली : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने शनिवार को लोकसभा चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया, जिसमें नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को खत्म करने, एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा हटाने का वादा किया गया है. इसके साथ ही मनरेगा के तहत दैनिक मजदूरी 700 करने को कहा है. वाम दल ने धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र को बचाने के लिए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने का आह्वान किया. इसमें कहा गया कि 10 साल का भाजपा शासन देश के लिए विनाशकारी साबित हुआ है. सीपीआई ने सत्ता में आने पर नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को खत्म करने, आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा हटाने, जाति जनगणना कराने, संपत्ति कर और विरासत कर जैसे कराधान उपायों को लागू करने, कॉर्पोरेट कर बढ़ाने, निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करने और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत दैनिक वेतन 700 रुपये करने का वादा किया है. सीपीआई घोषणापत्र में कहा गया है, '18वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव हमारे धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं.' घोषणापत्र जारी करने के बाद सीपीआई महासचिव डी राजा ने कहा, 'चुनाव देश और उसके भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदी का शासन देश के लिए विनाशकारी रहा है.' उन्होंने आरोप लगाया कि 'संविधान पर हमला हो रहा है. आरएसएस की राजनीतिक सेना होने के नाते भाजपा संविधान को बदलने की कोशिश कर रही है.' वाम दल ने कहा कि अगर वह सत्ता में आई तो बढ़ती असमानता को दूर करने के लिए कदम उठाएगी. सीपीआई ने यह भी कहा कि उसका लक्ष्य प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों को संसद के दायरे में लाना है. पार्टी ने कहा कि वह 'संघवाद को मजबूत करने के लिए राज्यपाल कार्यालय को खत्म करने के लिए अपने संघर्ष को तेज करेगी.' घोषणापत्र में कहा गया है, 'राज्यों में निर्वाचित सरकारों को प्रमुख नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार दिया जाना चाहिए...' सीपीआई ने कहा कि वह एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण पर 50 प्रतिशत की 'मनमानी' सीमा को हटाने और परिसीमन और जनगणना से संबंधित खंड को हटाकर महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने के लिए राजनीतिक और कानूनी रूप से लड़ाई जारी रखेगी. पार्टी ने मनरेगा के तहत उपलब्ध कार्य दिवसों को एक कैलेंडर वर्ष में 200 तक बढ़ाने के साथ-साथ शहरी रोजगार गारंटी अधिनियम और श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा शुरू करने का वादा किया. राजा ने कहा कि 'नई सरकार बनने पर हमारी पार्टी जनता के मुद्दों को उठाने में अपनी भूमिका निभाएगी.'

सोमवार, 8 अप्रैल 2024

बांदा संसदीय क्षेत्र से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने रामचन्द्र सरस को प्रत्याशी घोषित किया

बांदा संसदीय क्षेत्र से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने रामचन्द्र सरस को प्रत्याशी घोषित किया चित्रकूट में पार्टी कार्यकर्ता सम्मेलन में का.अमित यादव (जिला सचिव) चित्रकूट,का.श्याम सुंदर राजपूत (जिला सचिव) बांदा,का.रामप्रसाद सिंह पूर्व विधायक,का. चन्द्रपाल पाल (राज्य कौंसिल सदस्य),का.जयकरन प्रजापति (राज्य कौंसिल सदस्य),का.महेन्द्र प्रताप वर्मा (पूर्व लोकसभा प्रत्याशी),का.जमाल आलम मंसूरी,का.मदन भाई पटेल,का.दिनेश पटेल,का.राना साहब, सहित सैकड़ों पदाधिकारी व कार्यकर्ताओ ने प्रत्याशी का.रामचंद्र यादव सरस को घोषित किया। पार्टी नेताओ ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी अपने आंदोलनों और अभियानों में उजागर करती रही है कि भाजपा के 9 वर्षों के शासनकाल में देश के किसानों, मजदूरों, नौजवानों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों, दलितों और आम आदमी की दिक्कतों में भयावह इजाफा हुआ है। आवाम की ज्वलंत समस्याओं से निपटने में सरकार पूरी तरह असफल रही है। किसानों को उनकी फसलों का समर्थन मूल्य सरकार द्वारा वायदा करने के बावजूद नहीं दिया जा रहा, जबकि उनकी जरूरत की चीजें बेहद महंगी हो चुकी हैं। निरंतर घाटे में जा रहे किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं या फिर आंदोलन करने को। उनके आंदोलनों को भी पुलिस- प्रशासन के बल पर कुचला जा रहा है। मजदूर वर्ग के लंबे संघर्ष द्वारा हासिल किए गए कानूनी अधिकार लगभग समाप्त कर दिये गए हैं और वे ठेकेदारी प्रथा के तहत अल्प वेतन पर अधिक समय काम करने को अभिशप्त हैं। बेरोजगार नौजवानों से 2 करोड़ रोजगार देने के वायदे से ये सरकार मुकर गई और आज करोड़ों नौजवान दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। पर्चा लीक व अन्य कारणों से प्रतियोगी परीक्षाएँ रद्द कर दी जाती हैं और नौजवान गहरे आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न का दंश झेलते हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण से ये आम छात्रों और आमजनों के लिए दुर्लभ होती जा रही है। गरीबी अमीरी की खाईं निरंतर चौड़ी हो रही है। एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार देश की 40 प्रतिशत संपत्तियों पर 1 प्रतिशत लोगों का कब्जा है। गरीबी की इस भयावह स्थिति को सरकार भी कबूल करती है और 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने के दावे करती रहती है। जीवन से जुड़े अन्य सूचकांकों पर भी देश अंतरराष्ट्रीय मानकों में पिछड़ रहा है। विकास कार्यों में भारी भ्रष्टाचार है। महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है। दलितों महिलाओं और अल्पसंख्यकों का जिस तरह उत्पीड़न देखने को मिल रहा है ऐसा पहले कभी नहीं दिखा। उत्तर प्रदेश को ही लें होली के त्यौहार पर ही दर्जनों महिलाओं का शारीरिक मानसिक उत्पीड़न हुआ और दबंगों के हमलों के शिकार कमजोर तबके हुये हैं। हत्याओं की मानो बाढ़ सी आ गयी। कानून व्यवस्था चरमराई हुयी है और कुख्यात बुलडोजर अब आम लोगों को ही निशाना बना रहा है। अपनी तमाम असफलताओं से डरी सरकार लोकतन्त्र को कुचलते हुये विपक्ष को तहस नहस करने पर आमादा है। तमाम विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों को ईडी, सीबीआई, आईटी आदि की कार्यवाहियों से जेलों में डाला जा रहा है। अनेक असली भ्रष्टाचारी भाजपा में प्रवेश कर रहे हैं और सत्ता का सुख भोगते हुये निर्भय बने हुये हैं। संविधान और लोकतन्त्र को खत्म करने की साजिश है। विभाजन पैदा करने को हर हथकंडा प्रयोग किया जा रहा जिनमें एक CAA है। बावजूद इन हथकंडों के भाजपा का आत्मविश्वास डिगा हुआ है। देश हित में और जनहित में भाजपा को हराया जाना बहुत जरूरी हो गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी "भाजपा हराओ देश बचाओ" के नारे के साथ वामपंथी दलों के साथ मिल कर लगातार संघर्षरत है। वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा है और पूरे देश में भाजपा को हराने का काम करेगी'। उत्तर प्रदेश में भी हम मिल कर लड़ने की प्रबल इच्छा रखते थे, लेकिन कुछ दलों ने संकीर्णता का परिचय देते हुये लोकसभा सीटों का बंदरबांट कर लिया। हाल में इलैक्शन बांड भुनाने के हुये खुलासों से यह स्पष्ट तो हो ही गया है कि सभी पूंजीवादी दल कारपोरेट घरानों और माफियाओं से बड़े पैमाने पर रक़में लेते हैं। लेकिन वामपंथी दल देश की मेहनतकश जनता के हित में संघर्ष करते हैं और उन्हीं के सहयोग से चुनाव लड़ते हैं। अतएव कारपोरेट घरानों और धनमाफिया उसके प्रति असहिष्णुता का भाव रखते हैं। लगता है उन्हीं को तुष्ट करने को वामपंथ को अलग थलग किया जा रहा है। नेताओं ने कहा कि अपने जनाधार को संबोधित करने और भाजपा की जनविरोधी नीतियों को उजागर करते हुये उसे परास्त करने तथा लोकसभा में भाकपा का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आज 48 बांदा संसदीय सीट से पार्टी के का. रामचन्द्र सरस को उतारने की घोषणा कर रही है। कामरेड रामचन्द्र सरस एक किसान नेता हैं, विद्वान हैं तथा गरीबों, किसानों व बेरोजगारों के लिए लगातार मुखर होकर संघर्ष करते रहते हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी हमेशा टिकाऊ उम्मीदवार खड़ा करती है।

रविवार, 7 अप्रैल 2024

चुनाव महाराज! चुनाव!

राजा और आधुनिकता __________________________________________ राजा ने अचानक विद्वानों की आपात मीटिंग आहूत की। राज्य में बचे-खुचे विद्वान भागे-भागे आए। डरे-डरे उपस्थित हुए। सभी के मन में एक ही सवाल था,'आखिर क्यों बुलाए हैं राजा ने!' कुछ समय उपरांत राजा ने मीटिंग का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा,'जैसा कि विदित है मुझे आखेट बहुत पसंद है। परंतु अब मैं चाहता हूँ कि आप सब आखेट शब्द की जगह कोई नया शब्द खोजे या बनाएं! मुझे यह शब्द भाता नहीं! नकारात्मक झलकती है...प्रजा मुझे क्रूर समझती है।' राजा विद्वानों के चेहरों का एक्सप्रेशन देखने के लिए एक पल को रुका। फिर आगे बोला,'यह शब्द मुझे पुरातन,घिसा-पीटा लगता है। मुझे कोई आधुनिक, नया शब्द दें! और हाँ, एक बात और...जब तक मेरी समस्या का समाधान नहीं हो जाता, तब तक आप में से कोई भी राजधानी से जाएगा नहीं!' राजा के मकसद बताते ही विद्वान जुट गए अपने काम में। खूब किताबें खंगालीं गईं। पोथन्ना बाँचे गये। गरमा-गरम बहसें हुईं। कई नए शब्द लिखे गए। फिर काटे गए। खूब गोजा-गाजी हुई। अंततः उनको एक नया शब्द मिला,जिस पर बनते-बनते सबकी सर्वसहमति भी बन गई। विद्वानों की टोली खुशी-खुशी वह शब्द लेकर राजा के सामने उपस्थित हुई। 'तो आपने क्या नया शब्द खोजा!' राजा ने पूछा। 'चुनाव महाराज! चुनाव!' विद्वानों की टोली ने समवेत स्वर में कहा। यह शब्द सुनते ही राजा खुशी से उछल पड़ा। वह उत्साहित होकर बोला,'वाह! हमें भाया यह शब्द। खूब भाया। तो तय रहा आज से हम आखेट पर नहीं चुनाव पर जाया करेंगे!' अनूप मणि त्रिपाठी

गुरुवार, 4 अप्रैल 2024

महिला कर्मी से छेड़छाड़ के आरोप में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस भेजे गए एडीजी बीके सिंह

महिला कर्मी से छेड़छाड़ के आरोप में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस भेजे गए एडीजी बीके सिंह आईपीएस अधिकारी विनोद कुमार सिंह को उनके मूल कैडर में वापस भेजा जा रहा है. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के पूर्व बीके सिंह यूपी पुलिस में एडीजी सुरक्षा के पद पर तैनात थे. महिला कर्मी उत्तर प्रदेश के तेज तर्रार 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे विनोद कुमार सिंह को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से समय पूर्व ही उनके मूल कैडर में वापस भेजा जा रहा है. विनोद कुमार सिंह इस वक्त एडीजी सीआरपीएफ (पूर्वोत्तर) के तौर पर तैनात थे. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के पूर्व बीके सिंह यूपी पुलिस में एडीजी सुरक्षा के पद पर तैनात थे. जानकारी के मुताबिक बीके सिंह के ऊपर गुवाहाटी एयरपोर्ट के लाउंज में महिला कर्मी से छेड़छाड़ करने के आरोप के बाद हुई प्रारंभिक जांच में मामले को सही पाए जाने पर उनको उनके मूल कैडर वापस भेजा गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने महिला कर्मी की शिकायत के बाद हुई जांच में महिला के आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाया है. इसी कारण एडीजी बी के सिंह की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को समय पूर्व ही समाप्त कर दिया गया है. महिला ने आरोप लगाया कि गुवाहाटी एयरपोर्ट के रिजर्व लाउंज में एडीजी विनोद कुमार सिंह ने 16 मार्च को उसके अभद्रता की. महिला ने अपनी शिकायत में कहा की लाउंज में बनी हेल्प डेस्क पर आकर एडीजी बीके सिंह ने पहले उसकी सुंदरता की तारीफ की और इसके बाद उसके साथ छेड़खानी करने लगे. जब महिला कर्मी ने इस बात का विरोध किया तो एडीजी हेल्प डेस्क एरिया के भीतर जाकर उसके साथ दुर्व्यवहार करने लगे. महिला ने अपनी शिकायत में मारपीट और हमला करने जैसी बात कही है. महिला ने अपनी शिकायत को एयरपोर्ट के अधिकारियों से किया, जिसके बाद गुवाहाटी के पुलिस उपायुक्त को पूरे प्रकरण से अवगत कराया गया और उसके बाद जांच हुई है. इसी जांच में प्रारंभिक तौर पर एडीजी बीके सिंह प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं, जिसके बाद उनको उनके मूल कैडर वापस भेजा गया है. पिछले साल जून महीने में ही आईपीएस अधिकारी विनोद कुमार सिंह को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया था. केंद्र सरकार की ओर से उन्हें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में एडीजी के पद पर तैनात किया गया था. योगी सरकार के भरोसेमंद आईपीएस अधिकारियों में भी उन्हें गिना जाता है.

रविवार, 24 मार्च 2024

बुरा न मानो होली है-कैसे गिर गई नथुनिया बताओ रानी

'कैसे गिर गई नथुनिया बताओ रानी - ई डी इंडिया अगेन्स्ट करप्शन के नेता व पुलिस कस्टडी रिमांड में होते हुए भी देश की राजधानी दिल्ली की सरकार चलाने वाले अरविन्द केजरीवाल से पूछ रही है और केजरीवाल होली की बधाई गीत गाते हुए कहते हैं कि 'कैसे गिर गई नथुनिया - हम का जानी'
भारतीय लोकतंत्र का दुर्भाग्य है और संविधान निर्माताओं ने स्वपन में भी नहीं सोचा होगा कि मुख्यमंत्री जेल से सरकार चलाएंगे। लोकतंत्र संघ नहीं मानता है तो उसके चेले कैसे मान ले। अभी हेमंत सोरेन को ईडी ने गिरफ्तार किया था हेमंत सोरेन ने लोकतांत्रिक समझ और परंपरा के गिरफ्तारी के पहले इस्तीफा दे दिया था। साल 2014 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने से पहले 2011 में देश में जो भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन हुआ था वह भाजपा और संघ नियंत्रित और प्रशिक्षित था। इंडिया अगेन्स्ट करप्शन की जो मुहिम चली थी उसके पीछे भाजपा और संघ के अपने राजनीतिक हित थे. यह सारी बातें अरविंद केजरीवाल को पता थी . माना जाता है कि अन्ना हज़ारे के नेतृत्व में हुई इस मुहिम से मनमोहन सिंह की अगुआई वाली यूपीए सरकार की स्थिति कमज़ोर हुई जिसके बाद साल 2014 में भाजपा सरकार केंद्र में सत्ता में आई थी, और दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी सरकार बनी थी. मोदी सरकार तो लोकतंत्र को समाप्त करने के लिए संविधान बदलने के लिए तैयार बैठी है उससे किसी तरह की उम्मीद करना अपने सपनों के साथ धोखा करना है। अरविन्द केजरीवाल के साथ जो हो रहा है वह भी निंदनीय है और केजरीवाल द्वारा अन्ना आंदोलन के समय भी किये गये कृत्य भी निंदनीय है। इसलिए दो पैसे की आभासी नथुनिया को सरकार गाना गा रही है - कैसे गिर गई नथुनिया बताओ रानी!

शनिवार, 23 मार्च 2024

जो हुकूमत जनता के मौलिक अधिकार छीनती है उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है - भगत सिंह

बाराबंकी ।जो हुकूमत जनता के मौलिक अधिकार छीनती है उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। यह बात भगतसिंह ने कही थे आज सत्ता में बैठे लोगों ने जनता के उन अधिकारों को भी छीन लिया जो गुलाम भारत जनता को प्राप्त थे यह बात भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने भगत सिंह राजगुरु सहदेव के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए। पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि साम्प्रदायिक व विघटन कारी ताकतों को परास्त करने के लिए पार्टी अयोध्या सीट पर अपना उम्मीदवार खडा करेगी। कोषाध्यक्ष शिवदर्शन वर्मा ने कहा कि संघी गिरोह की सरकार अब जांच के नाम दिल्ली के मुख्यमंत्री को पकड कर जेल में रखकर देश की राजधानी की सरकार चलवा रही है। लोकतंत्र का मजाक बनाया जा रहा है। पार्टी के सह सचिव प्रवीण कुमार ने कहा कि नए भारत का निर्माण भगत सिंह के विचारों के आधार पर हो चाहिए था किन्तु अफसोस है कि सावरकर के विचारों के आधार मुखविरों की सरकार चल रही है जिससे मेहनतकश आवाम भूखमरी का शिकार हो गई है। सभा का संचालन किसान सभा अध्यक्ष-विनय कुमार सिंह ने किया व अध्यक्षता मो कदीर ने किया ।सभा में नैमिष कुमार सिंह प्रेमचन्द पवन कुमार संदीप तिवारी राघवेन्द्र सिंह योगेश प्रताप सिंह राजकुमार मुनेश्वर बक्श आशीष महेंद्र यादव दीपक कुमार दिग्विजय यादव राजेश सच्चिदानंद श्रीवास्तव धर्मेन्द्र शर्मा ज्ञानेश्वर जितेंद्र श्रीवास्तव जित्तू भैया आदि प्रमुख लोगों ने चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

गुरुवार, 21 मार्च 2024

देश में लोकतंत्र है, यह कोरा झूठ है',

आज भारत में लोकतंत्र है, यह कोरा झूठ है', राहुल गांधी बोले- हमारे बैंक खाते फ्रीज किए गए, हम प्रचार नहीं कर पा रहे हैं कांग्रेस पार्टी ने नरेंद्र मोदी सरकार और भाजपा सरकार की कलई खोल कर रख दी है कांग्रेस पार्टी के तीन दिग्गजों मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि कांग्रेस पार्टी के बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए गए हैं, जिस वजह से वह प्रचार नहीं कर पा रही है। राहुल गांधी ने कहा कि एक महीने पहले कांग्रेस पार्टी के सारे बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए गए। अगर किसी परिवार के बैंक अकाउंट फ्रीज करेंगे तो वह भूखा मर जाएगा।यह कांग्रेस पार्टी के साथ किया गया लेकिन किसी संस्था ने, कोर्ट ने, चुनाव आयोग ने, किसी ने कुछ नहीं कहा। आज हम रेलवे टिकट नहीं खरीद सकते, हम अपने नेताओं को एक जगह से दूसरे जगह नहीं भेज सकते। राहुल गांधी ने बताया कि मुद्दा सात साल पुराना है और 14 लाख रुपये का मुद्दा है, जिस वजह से कांग्रेस पार्टी के सारे बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए गए और 200 करोड़ रुपये का फाइन लगाया गया है। सोनिया गांधी ने क्या कहा? कांग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि बैंक खातों से लेनदेन पर रोक का मुद्दा अत्यंत गंभीर है, यह न केवल कांग्रेस को बल्कि हमारे लोकतंत्र को भी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि खातों से जबरन धन लिया जा रहा है। आइए आपको बताते हैं सोनिया गांधी द्वारा कही गई बड़ी बातें। सोनिया गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को आर्थिक रूप से पंगु बनाने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है। जनता से जुटाए गए पैसे को रोका जा रहा है और हमारे खातों से जबरन पैसा छीना जा रहा है। इलेक्टोरल बॉन्ड पर बीजेपी को घेरते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ 'चुनावी बॉण्ड' का मुद्दा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया है। चुनावी बॉण्ड से बीजेपी को भारी और बड़े पैमाने पर फायदा हुआ है। दूसरी तरफ कांग्रेस की वित्तीय स्थिति पर लगातार हमले हो रहे हैं उन्होंने कहा, "हम सभी का मानना ​​है कि यह अभूतपूर्व और अलोकतांत्रिक है।" कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव कराना जरूरी है, सभी को समान अवसर मिलने चाहिए। सत्ता में बैठे लोगों का संसाधनों पर एकाधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों का संवैधानिक संस्थाओं पर प्रत्यक्ष या परोक्ष नियंत्रण नहीं होना चाहिए। बीजेपी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठी पार्टी ने चुनावी बॉण्ड के जरिए से धन जुटाया, वहीं हमारे खातों से लेनदेन पर रोक लगाकर हमारे लिए उसने चुनाव लड़ने में अड़चन पैदा की जा रही है।

औरतों की इज्जत न अंग्रेज़ करते थे और आज उनके मुखविर भी नहीं करते हैं

औरतों की इज्जत न अंग्रेज़ करते थे और आज उनके मुखविर भी नहीं करते हैं - महिलाओं की इज्जत न अंग्रेज करते थे न हिन्दुस्तानी एक फोटो में कुली प्रथा के तहत एक बंगाली औरत के ऊपर सवारी करता हुआ अंग्रेज। दूसरी फोटो में हिन्दुवत्व के पैरोकार विधवा औरत को जलाते हुए।

बुधवार, 20 मार्च 2024

धार्मिक व्यक्तियों को सत्ता के पदों पर रहना चाहिए’-उच्च न्यायालय ने इस टिप्पणी को खारिज किया

धार्मिक व्यक्तियों को सत्ता के पदों पर रहना चाहिए’-उच्च न्यायालय ने इस टिप्पणी को खारिज किया बरेली दंगे को लेकर 5 मार्च, 2023 को बरेली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दिवाकर अपने आदेश में कहा था कि सत्ता के पदों पर बैठे लोगों को “धार्मिक व्यक्ति” होना चाहिए। इस दौरान कोर्ट ने उदाहरण के तौर पर सीएम योगी आदित्यनाथ का हवाला दिया था इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में बरेली के अतिरिक्त सत्र जज रवि कुमार दिवाकर की उन टिप्पणियों को खारिज कर दिया। जिसमें जज रवि कुमार दिवाकर ने 2010 बरेली दंगे की सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना की थी। बरेली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दिवाकर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा था कि धार्मिक व्यक्तियों को सत्ता के पदों पर रहना चाहिए’, अच्छे परिणाम दे सकता है। जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने बरेली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दिवाकर की टिप्पणियों को खारिज करते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारी से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती है कि वो अपनी व्यक्तिगत या पूर्व धारणाओं और लगाव को व्यक्त या प्रर्दशित करे। सिंगल बेंच ने कहा कि न्यायिक आदेश लोगों के लिए होते हैं और इस प्रकार के आदेश को जनता द्वारा गलत समझा जा सकता है। बेंच ने कहा कि न्यायिक अधिकारी से यह उम्मीद की जाती है कि उन्हें अपने मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करते वक्त एक सीमा में रहकर अभिव्यक्ति का उपयोग करना चाहिए। साथ ही ऐसे मुद्दे का जिक्र नहीं करना चाहिए जो मूल मुद्दे से संबंधित या अलग हों। बता दें, 2010 के बरेली दंगे को लेकर 5 मार्च, 2023 को बरेली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दिवाकर अपने आदेश में कहा था कि सत्ता के पदों पर बैठे लोगों को “धार्मिक व्यक्ति” होना चाहिए। इस दौरान कोर्ट ने उदाहरण के तौर पर सीएम योगी आदित्यनाथ का हवाला दिया था। ‘धार्मिक व्यक्तियों को सत्ता के पदों पर रहना चाहिए’, कोर्ट ने सीएम योगी का दिया उदाहरण, जानिए क्या पूरा मामला कोर्ट ने यह भी कहा था कि एक धार्मिक व्यक्ति का जीवन “त्याग और समर्पण” का होता है, न कि विलासिता में जीने का। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए यह कहा था कि कैसे तौकीर रजा ने एक धार्मिक व्यक्ति होने और बरेली में दरगाह आला हजरत के एक बेहद प्रतिष्ठित परिवार से संबंधित होने के बावजूद समुदाय के लोगों को भड़काने, कानून और व्यवस्था को बिगाड़ने में शामिल थे। कोर्ट ने कहा था कि शक्ति का उपयोग करने वालों को सत्ता का प्रमुख एक धार्मिक व्यक्ति होना चाहिए, क्योंकि एक धार्मिक व्यक्ति का जीवन आनंद का नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण का होता है। इस दौरान कोर्ट ने गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर महंत बाबा योगी आदित्यनाथ को उदाहरण दिया था, जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। कोर्ट ने कहा था कि उपरोक्त अवधारणा को उन्होंने सच साबित किया है।

सोमवार, 18 मार्च 2024

पुलिस ने शिक्षक की हत्या की मूल्यांकन कार्य बंद शिक्षक हड़ताल पर

शिक्षक की गोली मारकर हत्या, आक्रोशित शिक्षकों ने बंद किया मूल्यांकन कार्य, धरना प्रदर्शन पर बैठे, ये हैं मांगें शिक्षक संगठनों ने की घटना की निंदा और आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की मांग। लिखित आश्वासन पर अड़े हैं शिक्षक दस करोड़ रुपये मुआवजा की मांग वाराणसी-जनपद से यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं के बंडल लेकर मुजफ्फरनगर आए राजकीय हाईस्कूल महगांव के शिक्षक धर्मेन्द्र कुमार की साथ आए सुरक्षाकर्मी ने गोली मारकर हत्या कर दी। शिक्षक संगठनों में घटना की निंदा की और आरोपित पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिक्षकों ने यूपी बोर्ड परीक्षा का मूल्यांकन कार्य बंद कर दिया। राजकीय शिक्षक संघ के मंडल अध्यक्ष डॉ. रणवीर सिंह ने बताया, इस घटना से शिक्षक दुखी हैं। धर्मेन्द्र कुमार अपने परिवार में आजीविका के एकमात्र सहारा थे। शासन-प्रशासन से मांग की जाती है कि दोषी के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए एवं मृतक धर्मेंद्र कुमार के परिवार को मुआवजा प्रदान किया जाए। घटना के विरोध में जुटे शिक्षक प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष विजय कुमार शर्मा ने भी घटना की निंदा की है। वहीं चौधरी छोटू राम इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य नरेश प्रताप सिंह ने कहा, इस प्रकार की घटना फिर न हो, इसके लिए सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए। घटना के विरोध में शिक्षकों ने मूल्यांकन कार्य बंद कर दिया है। चौधरी छोटू राम इंटर कॉलेज के सामने शिक्षकों ने घटना को लेकर आक्रोश जताया। आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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