शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

इम्तिहान


बड़ा हैरान हूँ ये सब देखकर मैं

न जाने देश में क्या हो रहा है ?

हर शख्स जो चल रहा है पैरों पर

एक अजीब सा ख्वाब जी रहा है

नैतिकता नाचती है नंगी रोज़

न्याय कलमुहाँ मुँह छिपाए रो रहा है

अजीब चलन चला है "कादर" अब

सच का इम्तिहान झूठ ले ले रहा है

-केदारनाथ "कादर"

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