शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

काशी में अक्षय वृक्ष काटा - मूर्तियां तोडी मणिकर्णिका घाट की आग बुझाई किसी की आस्था को ठेस नहीं लगी

काशी में अक्षय वृक्ष काटा - मूर्तियां तोडी मणिकर्णिका घाट की आग बुझाई किसी की आस्था को ठेस नहीं लगी काशी की विरासत ध्वस्त कर रहे संघी सरकार 3 अक्षय वटवृक्षों में एक को काट डाला; कॉरिडोर के नाम पर मॉल बनाया मोदी-योगी की सरकार काशी की विरासत और हिंदू धर्म की सबसे बड़ी धरोहर को पूरी तरह से ध्वस्त करने में जुटी है। बाबा विश्वनाथ के दरबार में कॉरिडोर के नाम पर एक आधुनिक मॉल बना दिया गया। सैकड़ों मंदिर तोड़ दिए गए। इसे तबाह कर दिया गया। हिंदू धर्म में 3 प्रमुख स्थानों काशी, गया (बोधगया) और प्रयागराज का बड़ा महत्व है। यहां हजारों-हजार साल पुराने अक्षय वट वृक्ष थे। इनका इतिहास हिंदुस्तान में तीन अक्षय वटों का रहा है। पीएम मोदी भी उन अक्षय वट वृक्षों को नमन करते हैं। गया और प्रयागराज संगम के ही दो अक्षय वट वृक्ष बचे हैं। काशी वाला अक्षय वट काट दिया गया। 'बाबा विश्वनाथ और मां पार्वती के काशी आने से पहले से यह वृक्ष यहां विराजमान था, लेकिन गुजरात के ठेकेदारों ने इसे खत्म कर दिया।' बाबा विश्वनाथ के गुरु का मंदिर भी तोड़ा अमुक्तेश्वर महादेव मंदिर, जो बाबा विश्वनाथ के गुरु का मंदिर था, उसे भी तोड़ दिया गया। लक्ष्मी नारायण का मंदिर, जो कसौटी पत्थर पर बना था। जिस पत्थर पर सोने की असलियत जांच की जाती है, वह भी गायब है। वहां की मूर्तियां मिली नहीं, कहीं स्थापित भी नहीं की गईं। शनि भगवान का मंदिर सहित कई अन्य मंदिर पूरी तरह ध्वस्त कर दिए गए। काशी में हजारों साल पुरानी धरोहर को नष्ट कर दिया काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को भव्य बनवा दिया। असल में हजारों साल पुरानी हमारी धरोहर को नष्ट कर दिया। यह हिंदू धर्म की विरासत के साथ खिलवाड़ है।' अहिल्याबाई होल्कर की विरासत को भी मिटाया गया है। काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर मणिकर्णिका घाट के एक हिस्से को तोड़कर नया स्वरूप दिया जा रहा है। हिंदू समाज के लोगों की जब मृत्यु होती है, तो उनकी अंतिम इच्छा होती है कि उनका शरीर मणिकर्णिका घाट पर जलाया जाए। विदेश में भी रहने वाले लोग चाहते हैं कि उनके पार्थिव शरीर का दाह संस्कार मणिकर्णिका घाट पर किया जाए।जिस मणिकर्णिका घाट का जीर्णोद्धार लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जी द्वारा कराया गया, भाजपा सरकार ने उनकी मूर्तियों को, महादेव के शिवलिंग के साथ माता पार्वती की मणि को भी तोड़ दिया। हर साल मणिकर्णिका घाट पर 'पंचकोशी यात्रा' होती है, जिसमें करोड़ों लोग शामिल होते हैं और संकल्प लेते हैं। मणिकर्णिका घाट की आग आजतक नहीं बुझी है। वहां फूस में आग का छोटा सा टुकड़ा दिया जाता है, जिससे दाह संस्कार होता है- ये उस घाट की महत्ता है, जो आत्मा उस घाट में शांत होती है, उन्हें 'तारक मंत्र' दिया जाता है, ताकि उस आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो इसीलिए काशी को 'मोक्ष की नगरी' कहा जाता है।

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