बुधवार, 28 जनवरी 2026

असम के मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं - भारतीय जनता पार्टी

असम बीजेपी में घमासान जारी, पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मुख्यमंत्री हिमंता और उनकी पत्नी के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला* असम बीजेपी में घमासान अब खुली जंग में बदल चुका है। जिस पार्टी को कभी “अनुशासित संगठन” कहा जाता था, आज वही पार्टी अंदर से सड़ती हुई दिखाई दे रही है। ताज़ा विस्फोट खुद असम के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता सर्बानंद सोनोवाल के पत्र से हुआ है, जिसमें उन्होंने सीधे-सीधे मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी पर भ्रष्टाचार के आरोपों को बीजेपी के नुकसान की सबसे बड़ी वजह बताया है। यह कोई विपक्ष का आरोप नहीं है, न ही किसी बाहरी आलोचक की टिप्पणी। यह बीजेपी के भीतर से उठी वह आवाज़ है, जो लंबे समय से दबाई जा रही थी। सर्बानंद सोनोवाल का यह कहना कि हिमंता और उनके परिवार के भ्रष्टाचार के कारण पार्टी को राजनीतिक नुकसान हो रहा है, दरअसल उस सच्चाई की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति है, जिसे असम की जनता पहले से महसूस कर रही है। हिमंता बिस्वा सरमा का शासन अब विकास नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, डर और सत्ता के दुरुपयोग का प्रतीक बन चुका है। सरकारी तंत्र परिवार के इर्द-गिर्द सिमटता गया, फैसले चंद लोगों के हित में होने लगे और आम असमिया खुद को ठगा हुआ महसूस करने लगा। जनता में बढ़ता आक्रोश अब बीजेपी के भीतर भी फूट के रूप में सामने आने लगा है। *सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिस मुख्यमंत्री को पार्टी का चेहरा बनाकर बीजेपी चुनाव मैदान में उतरना चाहती है, वही चेहरा अब पार्टी के लिए सबसे बड़ा बोझ बन चुका है। जब खुद एक पूर्व मुख्यमंत्री यह कहने पर मजबूर हों कि मौजूदा मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी के भ्रष्टाचार से पार्टी को नुकसान हो रहा है, तो यह साफ संकेत है कि असम बीजेपी नैतिक, राजनीतिक और संगठनात्मक संकट में फंस चुकी है।* बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व चाहे जितना पर्दा डालने की कोशिश करे, लेकिन सच्चाई अब सामने आ चुकी है। अंदरखाने असंतोष, नेताओं की मजबूर चुप्पी और अब खुले आरोप इस बात का सबूत हैं कि असम बीजेपी की बुनियाद हिल चुकी है। सत्ता के नशे में चूर नेतृत्व यह समझने में नाकाम रहा कि जनता सब देख रही है और सब समझ रही है। आज असम में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बीजेपी चुनाव हारेगी या जीतेगी। असली सवाल यह है कि भ्रष्टाचार से घिरी सरकार जनता का भरोसा कैसे बचाएगी। जब पार्टी के अपने वरिष्ठ नेता ही नेतृत्व पर सवाल खड़े कर रहे हों, तो यह मान लेना चाहिए कि असम में बदलाव की आहट तेज़ हो चुकी है। *असम बीजेपी का यह अंदरूनी घमासान आने वाले राजनीतिक भूचाल का साफ संकेत है। जनता का गुस्सा, पार्टी की अंदरूनी फूट और नेतृत्व की साख एक साथ गिरती दिखाई दे रही है। अब फैसला असम की जनता के हाथ में है कि उसे भ्रष्टाचार से घिरी सत्ता चाहिए या एक ईमानदार, जवाबदेह और भरोसेमंद विकल्प।*

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