शनिवार, 31 जनवरी 2026
विदेश राज मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह पर जालसाजी का मुकदमा दर्ज करने का आदेश
⚖️ गोंडा MP/MLA कोर्ट से विदेश राज्यमंत्री को झटका
निगरानी वाद व स्थगन प्रार्थना पत्र खारिज, लगातार अनुपस्थिति बनी वजह
गोंडा की एमपी/एमएलए कोर्ट ने विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैया के लिए दायर निगरानी वाद और स्थगन प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश (एडीजे) राजेश कुमार तृतीय की अदालत ने पारित किया। कोर्ट ने यह फैसला निगरानीकर्ता पक्ष की लगातार अनुपस्थिति को आधार बनाकर लिया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि निगरानीकर्ता (मंत्री पक्ष) की ओर से बार-बार कोई उपस्थित नहीं हो रहा था, जबकि विपक्षी अजय सिंह लगातार न्यायालय में उपस्थित रहे। कई बार पुकार लगाने के बावजूद निगरानीकर्ता पक्ष की ओर से न तो कोई अधिवक्ता उपस्थित हुआ और न ही कोई ठोस कारण प्रस्तुत किया गया।
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🧾 स्थगन पर जताई गई आपत्ति
विपक्षी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि निगरानीकर्ता पक्ष बार-बार स्थगन प्रार्थना पत्र देकर सुनवाई से बचने का प्रयास कर रहा है और मामले को आगे नहीं बढ़ने देना चाहता।
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📌 क्या है पूरा मामला
बीते 11 अगस्त को गोंडा एमपी/एमएलए कोर्ट ने मनकापुर थाना क्षेत्र के भिठौरा गांव निवासी अजय सिंह के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए मनकापुर कोतवाली को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश में विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैया, उनके निजी सचिव राजेश सिंह, पिंकू, सहदेव यादव और कांति सिंह के नाम शामिल थे।
आरोप है कि इन लोगों ने एक महिला की जमीन को धोखाधड़ी से किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया। जब पीड़िता मनीषा ने इस संबंध में शिकायत की, तो कथित रूप से सुलह का दबाव बनाया गया और बाद में झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
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🔍 निगरानी वाद हुआ खारिज
एमपी/एमएलए कोर्ट के एफआईआर दर्ज करने के आदेश को चुनौती देते हुए विदेश राज्यमंत्री की ओर से उच्च अदालत में निगरानी वाद दायर किया गया था, जिसे बाद में एमपी/एमएलए कोर्ट के एडीजे राजेश कुमार तृतीय की अदालत में स्थानांतरित किया गया। यहां सुनवाई के दौरान मंत्री पक्ष की लगातार गैरहाजिरी के चलते अदालत ने निगरानी वाद को खारिज कर दिया।
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🗣️ विपक्षी अजय सिंह का बयान
निगरानी वाद खारिज होने के बाद विपक्षी अजय सिंह ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2012 में मनकापुर क्षेत्र में जमीन खरीदी थी, जिसे कथित रूप से योजनाबद्ध तरीके से हड़पने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने पहले ही भारतीय न्याय संहिता की धारा 173(4) के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था और अब वे चाहते हैं कि पुलिस निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करे।
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📍 आगे की स्थिति
निगरानी वाद खारिज होने के बाद अब निचली अदालत के एफआईआर दर्ज करने के आदेश के अमल का रास्ता साफ माना जा रहा है।
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