शुक्रवार, 16 जनवरी 2026
देश हमारों कहाँ जा रहा, कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
देश हमारों
कहाँ जा रहा,
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
जनता भूखी मर रही है,
तुमको क्या मज़ा आ रहा?
इलाहाबाद प्रयाग हो गया
और बनारस टूटा,
धनी राम का खेत बिक गया,
तार बजाना लौटा।
टूटी चप्पल पहन के मनसुख,
बोरा उठा रहा है,
और हमारा देसी नीरो,
बंसी बजा रहा है।
देश हमारा कहाँ जा रहा,
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
डॉलर सर पर पाँव जमाए,
मुँह बल पड़ा रुपैया भैया,
डॉलर सर पर पाँव जमाए,
मुँह बल पड़ा रुपैया।
और भक्त चिल्लाए रहे हैं
जय गंगा, जय गैया!
और भक्त चिल्लाए रहे हैं
जय गंगा, जय गैया!
जो गंगा के लिए लड़ा,
वो जीवन गँवा रहा है,
और इधर मनमा ,
जीवन की बातें सुना रहा है।
देश हमारा कहाँ जा रहा,
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
महंगाई ने कमर तोड़ दी,
सुख-सुविधा सब पीछे छोड़ दी।
तेल, गैस के दाम बढ़ रहे,
आम आदमी अब रो रहा।
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
बेरोजगारी चरम पे है,
युवा डिग्री लेकर खड़ा है।
नौकरी का कहीं पता नहीं,
भविष्य अंधकार में पड़ा है।
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
भाई को भाई से लड़वाया,
नफरत का ये बीज उगाया।
संविधान अब खतरे में है,
लोकतंत्र का गला दबाया।
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
अन्नदाता सड़कों पर बैठा,
हक अपना वो मांग रहा।
लाठी और आंसू गैस मिली,
किसान बेचारा जाग रहा।
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
जनता भूखी मर रही है,
तुमको क्या मज़ा आ रहा?
इलाहाबाद प्रयाग हो गया
और बनारस टूटा,
धनी राम का खेत बिक गया,
तार बजाना लौटा।
टूटी चप्पल पहन के मनसुख,
बोरा उठा रहा है,
और हमारा देसी नीरो,
बंसी बजा रहा है।
देश हमारा कहाँ जा रहा,
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
डॉलर सर पर पाँव जमाए,
मुँह बल पड़ा रुपैया भैया,
डॉलर सर पर पाँव जमाए,
मुँह बल पड़ा रुपैया।
और भक्त चिल्लाए रहे हैं
जय गंगा, जय गैया!
और भक्त चिल्लाए रहे हैं
जय गंगा, जय गैया!
जो गंगा के लिए लड़ा,
वो जीवन गँवा रहा है,
और इधर मनमा ,
जीवन की बातें सुना रहा है।
देश हमारा कहाँ जा रहा,
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
महंगाई ने कमर तोड़ दी,
सुख-सुविधा सब पीछे छोड़ दी।
तेल, गैस के दाम बढ़ रहे,
आम आदमी अब रो रहा।
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
बेरोजगारी चरम पे है,
युवा डिग्री लेकर खड़ा है।
नौकरी का कहीं पता नहीं,
भविष्य अंधकार में पड़ा है।
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
भाई को भाई से लड़वाया,
नफरत का ये बीज उगाया।
संविधान अब खतरे में है,
लोकतंत्र का गला दबाया।
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
अन्नदाता सड़कों पर बैठा,
हक अपना वो मांग रहा।
लाठी और आंसू गैस मिली,
किसान बेचारा जाग रहा।
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
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