शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026

खुदा इन्हें माफ कर - रिजवान मुस्तफा

या रब्बुल आलमीन… यह धरती तूने हमें अमानत में दी है। यह सरज़मीन हमारे बुज़ुर्गों की दुआओं से बसी है, शहीदों के कुर्बानियों से पाक हुई है। अगर आज हमारे दिलों में बेचैनी है, तो इसलिए कि हमें अपनी पहचान से मोहब्बत है। हम अपने वतन को किसी और के नाम में ढलता हुआ नहीं देख सकते। ऐ मालिक… हमारे दिलों से नफ़रत निकाल दे, लेकिन हमारी गैरत सलामत रख। हमारी मोहब्बत वतन से कम न हो, और हमारी इंसानियत भी कम न हो। भारत एक ख़ूबसूरत गुलदस्ता है — जहाँ हर रंग की खुशबू है। इसे एक रंग में रंग देने की कोशिश उसकी रूह को छोटा कर देगी। या अल्लाह… हमारे मुल्क को अमन दे, इंसाफ़ दे, और ऐसी रहनुमाई दे जो इसे अपने पैरों पर खड़ा रखे न कि किसी और की छाया में।

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