रविवार, 8 फ़रवरी 2026
संघी भाजपाई नेताओं के झूठ का पर्दाफाश लखनऊ में एक भी बांग्लादेशी व रोहंगडियां मुस्लिम नहीं मिला
संघी भाजपाई नेताओं के झूठ का पर्दाफाश
लखनऊ में एक भी बांग्लादेशी व रोहंगडियां मुस्लिम नहीं मिला
उत्तर प्रदेश समेत देश के अलग-अलग राज्यों में दक्षिणपंथी समूह लगातार अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों के घुसपैठ करने का दावा करते रहे हैं. दक्षिणपंथी के विरोध और दबाव की वजह से बांग्ला भाषी मुसलमानों को जबरन बांग्लादेश में पुशबैक कर दिया गया. देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी अवैध घुसपैठ के दावे किए जा रहे थे. इस मामले की जांच पड़ताल के लिए लगातार प्रशासन एक्टिव भी रहता था.
लखनऊ में कथित अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की तलाश को लेकर लंबे समय से चल रही सियासी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब पुलिस की जांच ने अलग तस्वीर पेश की है. योगी सरकार के दौर में बार-बार उठे दावों और खास तौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाए जाने के आरोपों के बीच चली व्यापक सत्यापन मुहिम के बाद राजधानी पुलिस का कहना है कि शहर में एक भी अवैध बांग्लादेशी नागरिक की पहचान नहीं हो सकी है.
लखनऊ पुलिस ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की जांच के लिए कई महीने तक बड़े पैमाने पर सत्यापन मुहिम चलाई. लखनऊ पुलिस ने स्वीकार किया कि राज्य की राजधानी में गैरकानूनी रूप से रह रहे किसी भी बांग्लादेशी नागरिक की पुष्टि नहीं हुई. यह नतीजा उन लगातार राजनीतिक दावों और आरोपों के बावजूद सामने आया है, जिनमें कहा जाता रहा कि शहर की झुग्गी बस्तियों में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी मौजूद हैं.
पुलिस ने क्या कहा?
सीनियर अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग थाना क्षेत्रों में व्यापक जांच की गई. खास तौर पर झुग्गी बस्तियों और घनी आबादी वाले इलाकों को फोकस में रखा गया, जहां यह आशंका जताई जा रही थी कि कुछ लोग खुद को असम से आए प्रवासी बताकर रह रहे हैं. इस अभियान में घर-घर सत्यापन, दस्तावेजों की सख्त जांच और खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय शामिल था. हालांकि, जांच के दौरान कहीं भी किसी अवैध बांग्लादेशी नागरिक की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हो सकी.
'इंकलाब' ने लखनऊ के जॉइंट पुलिस कमिश्नर बबलू कुमार के हवाले से बताया कि पुलिस को जांच के दौरान कोई भी बांग्लादेशी या रोहिंग्या नहीं मिला. उन्होंने बताया कि ज्यादातर कूड़ा उठाने वाले कर्मचारी असम के बारपेटा और कामरूप जिलों से जुड़े पाए गए.
बीजेपी नेताओं के दावों की खुली पोल
इस मामले को लेकर पहले पूर्व आईपीएस और बीजेपी के राज्यसभा सदस्य बृज लाल, मेयर सुषमा खर्कवाल और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने नगर निगम से जुड़े कूड़ा उठाने वालों को बांग्लादेशी और रोहिंग्या बताते हुए उनकी जांच की मांग की थी. कुछ नेताओं ने यह भी दावा किया था कि राजधानी में दो लाख से ज्यादा बांग्लादेशी रह रहे हैं.
सियासी दबाव के बाद राजधानी पुलिस ने सभी थाना प्रभारियों और एलआईयू टीम को शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थित झुग्गी बस्तियों की जांच का आदेश दिया था. इसी कड़ी में 18 नवंबर को मेयर सुषमा खर्कवाल ने गोमती नगर के जोन-4 स्थित विनीत खंडर में बने पोर्टेबल कंपैक्टर ट्रांसफर स्टेशन (PTS) का अचानक दौरा किया. वहां उन्होंने कथित तौर पर अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों या रोहिंग्याओं की पहचान के लिए सफाई कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच कराई. खास तौर पर असम से जुड़े कर्मचारियों के कागजात की पुष्टि की गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सफाई या कचरा प्रबंधन के काम में कोई बांग्लादेशी या रोहिंग्या तैनात न हो.
इसके बाद 4 दिसंबर को मेयर ने गड़ंबा थाना क्षेत्र के पास फूलबाग कॉलोनी और इंदर नगर में भी बांग्लादेश और म्यांमार से आए कथित अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए जमीनी जांच शुरू की. उन्होंने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी के एक पार्षद की शह पर इलाके में अवैध रूप से बांग्लादेश से आए लोगों को बसाया जा रहा है.
'नहीं मिला एक भी रोहिंग्या या बांग्लादेशी'
मेयर सुषमा खर्कवाल के सख्त रुख के बाद पुलिस सक्रिय हुई और थाना प्रभारियों को बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की तलाश के निर्देश दिए गए. इस काम में एलआईयू को भी लगाया गया है. पुलिस ने गोमती नगर, हजरतगंज, आशियाना, गड़ंबा, गोसाईंगंज, कृष्णा नगर और अन्य थाना क्षेत्रों की झुग्गी बस्तियों में जाकर रहने वाले लोगों के प्रमाणपत्र और दस्तावेजों की जांच की.
फिलहाल जांच के दौरान राजधानी पुलिस को किसी भी बांग्लादेशी या रोहिंग्या नागरिक की पहचान नहीं हुई है. जॉइंट कमिश्नर बबलू कुमार के अनुसार ज्यादातर झुग्गी बस्तियों की जांच पूरी कर ली गई है और वहां काम करने वाले अधिकतर लोग असम के बारपेटा, कामरूप और आसपास के इलाकों से जुड़े पाए गए हैं.
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