शनिवार, 2 मई 2026

मजदूर नेताओं की पिटाई और मजदूर संघों की चुप्पी

मजदूर नेताओं की पिटाई और मजदूर संघों की चुप्पी नोएडा पुलिस ने जिस उच्च शिक्षित आदित्य आनंद को नोएडा मजदूर आंदोलन के कथित साज़िश का मुख्य अभियुक्त बताया है, उसकी जेल में बहुत बुरी हालत है।गिरफ्तारी से पहले उसे 3 दिन थाने में रख कर मारा गया। फिर अभी 3 दिन की पुलिस कस्टडी ली गई और उसमें भी बस पीटा गया। खबर यह भी है कि उसकी हिरासत गुरुग्राम पुलिस, मानेसर आंदोलन के सिलसिले में मांग रही है। चमड़े की बेल्ट से उसकी खाल उधेड़ ली और न तो मेडिकल करने वाले डॉक्टर और न ही नोएडा अदालत के जज कुछ सुनने को तैयार है। उसे सरेआम एनकाउंटर करने की धमकी दी जा रही है। इतनी निराशा और असहायता है कि नोएडा पुलिस के दमन के खिलाफ किससे कहो? सुप्रीम कोर्ट जाओ तो वह कहता है पहले हाई कोर्ट जाओ। हाई कोर्ट यानी इलाहबाद हाई कोर्ट जहां विश्वसनीय और निशुल्क वकील मिलना जटिल है। फिर वहां के जज भी महान हैं। आज भी मई दिवस पर नोयडा छावनी बना था। किसी को कोई आवाज़ उठाने की न अनुमति थी न हिम्मत। जेल में बंद श्रेयश कश्यप असम के चरियारी जिले की बेहत कम उम्र की गरीब बच्ची है। नेहा ठाकुर काशीपुर की है।।जान आंदोलन में आई इन युवतियों के परिवार की यह हालत नहीं कि वकील, अदालत के खर्चे उठा सकें।ऊपर से यूपी पुलिस कारखाना मालिकों के दवाब में दमन पर जुटी है। यहां संवेदना मत दिखाइए। क्या आपके पास कोई विकल्प है? आप किस तरह की मदद कर सकते हैं? -पंकज चतुर्वेदी

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