सोमवार, 11 मई 2026
भाजपा की पिछलग्गू माकपा
मार्क्स वादी कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय जनता पार्टी की मित्रता आपातकाल के समय से जारी है। तब जनसंघ और आर एस एस की पिछलग्गू थी और अब भारतीय जनता पार्टी की पिछलग्गू है। नरेंद्र मोदी सरकार को आधिकारिक तौर पर "फासीवादी" या "नव-फासीवादी" शासन के रूप में परिभाषित करने से इनकार कर दिया है।इस मामले से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:नव-फासीवादी लक्षण, न कि पूर्ण फासीवाद: माकपा का मानना है कि भाजपा के 10 वर्षों के शासन के बाद सरकार और नीतियों में "नव-फासीवादी विशेषताएं" (neo-fascist characteristics) तो दिख रही हैं, लेकिन पार्टी ने इसे सीधे तौर पर फासीवादी शासन नहीं माना है।पार्टी का बचाव: सीपीआई(एम) के केंद्रीय समिति के सदस्य ए.के. बालन ने स्पष्ट किया कि पार्टी ने कभी भी भाजपा सरकार को "फासीवादी" नहीं कहा है और उनका मानना है कि देश में फासीवाद नहीं आया है।पूर्व रुख से भिन्नता: यह रुख पूर्व महासचिव सीताराम येचुरी के पिछले बयानों से अलग है, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार को फासीवादी कहा था।विपक्ष और गठबंधन में सवाल: माकपा के इस रुख पर सीपीआई और कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस ने इसे माकपा और भाजपा के बीच कथित 'गुप्त समझौता' बताया है, जबकि सीपीआई ने इस पर आश्चर्य व्यक्त किया है।संक्षेप में, माकपा भाजपा को 'फासीवादी' (जो चुनावी प्रणाली को पूरी तरह खत्म कर दे) के बजाय 'नव-फासीवादी' या 'सत्तावादी' प्रवृत्तियों वाला मानती है।
'मोदी सरकार फासीवादी नहीं है, उसमें नव-फासीवादी लक्षण हैं': सीपीआई(एम) के ...सीपीआई(एम) पार्टी कांग्रेस के मसौदा प्रस्ताव में भारतीय जनता पार्टी और उसके वैचारिक मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गुट को "नवफासीव...The News MinuteCPM ने मोदी सरकार को फासीवादी मानने से किया इनकार, कांग्रेस बोलीसीपीएम ने राज्यों की ईकाइयों को भेजे गए मसौदे में कहा है कि मोदी सरकार फासीवादी नहीं है। सीपीएम के इस रुख पर कांग्रेस और सीपीआई भड़क गई हैं। कांग्रेस ने सीपीएम ...Hindustan Hindi Newsजागरण संपादकीय माकपा के बदले सुर का मतलब बड़े राजनीतिक बदलाव का सूचककेरल में 2026 में विधानसभा का चुनाव है जबकि बिहार में इसी साल है। बिहार के विपक्षी मोर्चे में कांग्रेस भी है और वाम दल भी। केरल में माकपा के भाजपा समर्थक रुख का...Jagran
मित्रता का बंगाल में एक ही उदाहरण काफी है,माकपा के अखबार गणशक्ति में भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण से पहले ही भाजपा सरकार का विज्ञापन पहले दिन ही प्रकाशित हुआ।
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