गुरुवार, 18 जून 2026

करोड़ों का सोना कुछ बारिश में गला, कुछ ले गए बंदर... पुलिस की कोर्ट में दलील

करोड़ों का सोना कुछ बारिश में गला, कुछ ले गए बंदर... पुलिस की कोर्ट में दलील लो भई, मालखाने से गायब हुआ करोड़ों का सोना, पुलिस बोली- कुछ बारिश में गला, कुछ बंदर उठा ले गए लखीमपुर खीरी: आजकल दहेज प्रताड़ना और उसके बाद हत्या के मामले काफी सामने आते हैं. मगर, हर बार लड़का गलत नहीं होता ये एक मामले में सिद्ध हुआ. मगर पीड़ित आज एक साल बाद भी दुखी है. दरअसल, करीब 17 साल पहले एक महिला ने आत्महत्या कर ली थी. इस पर मायके वालों ने ससुरालियों पर दहेज हत्या का केस दर्ज करा दिया. उस समय पुलिस महिला के शव से करीब 1 करोड़ के सोने के गहने उतारकर ले गई थी. अब जब कोर्ट ने कहा कि जब्त जेवरों को ससुराल वालों को सौंप दो तो पुलिस ने एक अलग ही कहानी सुना दी. कहा कि जेवर बारिश में खराब हो गए. बाकी बचे जेवरों को बंदर उठा ले गए. ये सुनकर कोर्ट भी सन्न रह गया. आइए जानते हैं पूरा मामला… साल 2007 में शहर के मोहल्ला कपूरथला निवासी मुदित अग्रवाल की पत्नी रानी अग्रवाल उर्फ जूली ने दीपावली की रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. पोस्टमार्टम के दौरान उसके शरीर से नाक की सोने की कील, गले की चेन व लॉकेट, सोने की अंगूठी और 10 सोने की चूड़ियां उतारकर पुलिस को सौंप दिया गया. उस समय कहा गया कि इन गहनों को सदर कोतवाली के मालखाने में जमा करा दिया गया है. यूपी कल का मौसम 18 जून : पहले भयानक गर्मी, फिर होगी बल्ले-बल्ले, 48 घंटे में 29 जिलों में आएगा भारी तूफान महिला की मौत पर हंगामा हुआ और मायके वालों ने ससुरालियों पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज करवा दिया. मुदित अग्रवाल समेत अन्य आरोपियों को जेल भेजा गया. 28 फरवरी 2024 को साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपी बरी कर दिए गए. मुकदमे के निस्तारण के बाद मुदित अग्रवाल ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर जेवर अपने पक्ष में रिलीज करने की मांग की. इस पर पुलिस की ओर से दाखिल रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया. पुलिस ने कोर्ट से कहा कि 7 सितंबर 2013 तक की मालखाने की सोने के जेवर से भरी पोटलियों भीग गई थीं. उन्हें छत पर सुखाने रखा था. बारिश होने से ज्यादातर जेवर खराब हो गए. बाकी बचे जेवरों को बंदर उठा ले गए. तत्कालीन सत्र न्यायाधीश लक्ष्मीकांत शुक्ल इस स्पष्टीकरण को सुनकर हैरान रह गए. उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया और गंभीर लापरवाही माना. अदालत ने टिप्पणी की कि सोने के जेवर बारिश में नष्ट नहीं हो सकते. साथ ही यह भी कहा कि मालखाने जैसी संवेदनशील जगह के कीमती सामान को खुले में बिना निगरानी के रखने का दावा स्वीकार्य नहीं है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित पुलिसकर्मियों ने सीलबंद पोटली में रखे बहुमूल्य जेवरों का अपने हित में उपयोग किया. बाद में अभिलेखों में फर्जी प्रविष्टियां कर दीं. कोर्ट ने मामले की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने और पीड़ित को क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए. पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ के अनुसार, महिला के शरीर से मिले जेवरों को अदालत में पेश नहीं किया गया. इसके चलते करीब 7 सालों तक गवाही शुरू नहीं हो सकी. तत्कालीन जिला जज लक्ष्मीकांत शुक्ल ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई थी. अदालत ने जेवरों के अभाव में गवाही शुरू कराने के साथ दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे. साथ ही पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने के भी आदेश दिए थे. इसके बावजूद अभी तक पीड़ित को राहत नहीं मिल सकी है.

कोई टिप्पणी नहीं:

Share |