गुरुवार, 10 सितंबर 2026

गुजरात की छह राजनीतिक पार्टियों को मिले ₹1,700 करोड़ के चंदे की जांच की मांग की-डां गिरीश

गुजरात की छह राजनीतिक पार्टियों को मिले ₹1,700 करोड़ के चंदे की जांच की मांग की-डां गिरीश नई दिल्ली।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त करती है कि गुजरात में पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त छह राजनीतिक पार्टियों को 2023-24 में ₹1,700 करोड़ का भारी-भरकम चंदा मिला, जबकि उनकी कोई खास राजनीतिक गतिविधि नहीं देखी गई। आम जनमत पार्टी को ₹620 करोड़, सत्यवादी रक्षक पार्टी को ₹330.55 करोड़, स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी को ₹219.69 करोड़, न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी को ₹200.69 करोड़, भारतीय नेशनल जनता दल को ₹191.61 करोड़ और गरीब कल्याण पार्टी को ₹138 करोड़ मिले। इतनी बड़ी रकम पाने वाली इन पार्टियों ने न तो ठीक से चुनाव लड़ा और न ही कई मामलों में चुनाव आयोग को सही ऑडिट और वित्तीय रिपोर्ट सौंपी; यह बात इन फंड के स्रोत और मकसद पर बेहद गंभीर सवाल खड़े करती है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मांग करती है कि सीबीआई इन फंड के पूरे लेन-देन की गहन और समयबद्ध जांच करे और सीएजी इनका व्यापक ऑडिट करे। आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय को भी चंदे के स्रोत, चंदा देने वालों की पहचान, पैसे के ट्रांसफर के तरीकों और इसके अंतिम लाभार्थियों की जांच करनी चाहिए। चुनाव आयोग को उन पार्टियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए जिन्होंने कानूनी नियमों का उल्लंघन किया है, यह जांचना चाहिए कि क्या उनका पंजीकरण रद्द किया जाना चाहिए, और नतीजों को जनता के सामने रखना चाहिए। वित्तीय या चुनावी गड़बड़ी के दोषी पाए जाने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डां गिरीश शर्मा ने कहा कि इन चंदे का बहुत बड़ा पैमाना और असामान्य तरीका इस गंभीर आशंका को जन्म देता है कि इनमें से कुछ पार्टियां शायद सिर्फ़ राजनीतिक फंड को इधर-उधर करने के लिए बनाई गई थीं या इस्तेमाल की गई थीं, और अंत में यह पैसा भाजपा तक पहुंच गया। यह भारत के चुनावी लोकतंत्र की ईमानदारी से जुड़ा एक गंभीर मामला है और इसे केवल कुछ छोटे-मोटे राजनीतिक संगठनों का मामला बताकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अगर सत्ताधारी पार्टी को फ़ायदा पहुँचाने वाले फ़ंड के स्रोत या मंज़िल को छिपाने के लिए प्रॉक्सी पार्टियों का इस्तेमाल किया गया है, तो भारत की जनता को फ़ंड के पूरे लेन-देन का ब्यौरा जानने का अधिकार है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी इस मामले की हर कड़ी की पारदर्शी जाँच और जाँच के नतीजों को पूरी तरह से सार्वजनिक करने की माँग करती है, साथ ही इसमें शामिल पाए जाने वाले हर व्यक्ति और संगठन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की भी माँग करती है, चाहे उनका राजनीतिक ओहदा कुछ भी हो।

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