सोमवार, 2 नवंबर 2026
दिल्ली पुलिस का विरोध प्रदर्शन देखा?
दिल्ली पुलिस का विरोध प्रदर्शन देखा?
वो भी दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर पर सुबह से चल रहा है।
गृह मंत्री के राजकाज में यह दूसरा प्रदर्शन बताया जा रहा है। इससे पहले 2019 में भी हुआ था।
इसके पीछे की वजह शाहदरा के SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार और ACP मनस्वी वशिष्ठ को सजा के तौर पर तबादले को रद्द किए जाने की माँग बताई जा रही है। सुबह से ही सैकड़ों पुलिसकर्मी, यहां तक कि एसीपी रैंक के अधिकारी भी प्रदर्शन में शामिल हैं।
एसीपी रैंक के एक अधिकारी को खुलेआम वकील समुदाय को गुंडों का समूह कहते सुना गया। ये दोनों बिरादरी कानून के रखवाले और न्याय करने वाले हुए। आज ही दिल्ली की अदालतों में वकीलों ने हड़ताल का भी आह्वान किया था।
आम दिल्ली वासियों को समझ नहीं आ रहा कि कल तक यही दिल्ली पुलिस छात्र छात्राओं और जेन जी पीढ़ी को भले ही वे एक दो की ही संख्या में क्यों न हो, पकड़ पकड़ कर लट्ठ बजाते हुए गिरफ्तार कर रही थी। अब खुद पर बीत रही तो बगैर पूर्व परमिशन के सैकड़ों की संख्या में कानून कैसे तोड़ सकती है?
गृह मंत्रालय के आंखों का तारा बन चुकी दिल्ली पुलिस ने तमाम लोकतांत्रिक आंदोलनों को सख्ती से कुचलने के लिए क्या क्या नहीं किया। किसके लिए? किसके खातिर सार्वजनिक तौर पर बगैर वर्दी वाले गुंडों को अपने साथ लट्ठ लेकर खड़े रहने की इजाजत दी, ताकि वे मनमानी कर सकें और यदि प्रदर्शनकारियों ने पलटकर जवाब देना शुरू किया तो उनके खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्यवाही कर सकें।
संभवतः यही वजह है, उनके वकील समुदाय के साथ पुरानी अदावत को अब सेटल करने का। आखिर जब आम लोगों, छात्रों, अल्पसंख्यकों के ऊपर दमन करने पर शाबासी मिलती हो, पर अदालतों और काले कोट वालों से फटकार तो मन कचोटेगा ही। जब मन बढ़ ही गया, दिन रात एक कर बदनामी सहकर साहेब के निर्देशों का पालन किया, तो ये काले कोट वालों से अब क्यों डरना?
क्यों उनके हड़ताल की धमकी से हमारे अधिकारी का तबादला या निलंबन हो? जिस तरह की डिमांड्स खुले मंच से रखी जा रही हैं, उससे साफ समझा जा सकता है कि पुलिस का यह आंदोलन जल्दी संभलेगा नहीं।
अगर उन्हें जबरन उनकी ड्यूटी और पुलिस रूल्स से साधने का प्रयास किया जाता है तो प्रतिकार में वे उल्टा सीधा हुक्म बजाने के बजाय संविधान प्रदत्त रुल का पालन कर सरकार के लिए सिर दर्द बन सकते हैं।
साइबर सेल वाले अभी से दिल्ली पुलिस के बारे में उड़ाने लगे हैं कि इन्होंने ध्रुव राठी की कल वाली वीडियो देख ली है, जिसमें उनकी गैरत को ललकारा गया था।
अब पता नहीं राठी ने ऐसी वीडियो कल डाली है या नहीं, लेकिन इतना तो तय है कि साइबर सेल वाले किसी के भी सगे नहीं हैं। हुक्म बजाते रहो तभी तक ठीक, पीठ फेरते ही हो गया सत्यानाश।
The Hindu reports:
"Delhi Police personnel gathered outside the police headquarters on November 2 morning to protest against the transfers of Assistant Commissioner of Police (ACP) Manasvi Vashistha and Shahdara Station House Officer (SHO) Inspector Arun Kumar, demanding that the two officers be reinstated to their previous postings. Around 100 police personnel, including women officers, were seen protesting holding placards and posters."
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