गुरुवार, 16 अप्रैल 2009

मन नदी तट गावँ




मन नदी तट गाँव है तेरे बिना ।
डूबती सी नाव है तेरे बिना ॥
चल लहर सा पर कही पंहुँचा नही -
जिंदगी बस पाँव है तेरे बिना॥
अनगिनत है जाल माया हाथ में -
तन मगन मन दाँव है तेरे बिना ॥
है अतल तल को उजेरे की ललक-
चिल चिलाती छाँव है तेरे बिना ॥

डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल 'राही '

3 टिप्‍पणियां:

अरविन्द श्रीवास्तव ने कहा…

पहली प्रतिक्रिया - बधाई!

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत बढिया ...

Udan Tashtari ने कहा…

बढ़िया है-जारी रहिये.