शनिवार, 11 अप्रैल 2009

जानी जानी सब अनजानी हो गई।


जानी -जानी सब अनजानी हो गई।
मेरे संग थोडी बेईमानी हो गई॥
भूखी भोर रात भर कराहती रही -
कैसी बेमिसाल ये गरानी हो गई ॥
सत्ता -सुख-वैभव के जाल में फ़ँसी -
राम वाली आस्था पुरानी हो गई ॥
स्वप्न में भी जलती चिताएं दिखती -
हाय मेरी बिटिया सायानी हो गई ॥
तेरे इक इशारे से बदल गया सब-
सूनी सूनी शाम भी सुहानी हो गई ॥
------------------ डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल 'राही'

कोई टिप्पणी नहीं: