बुधवार, 6 मई 2009

संसदीय चुनाव और साम्राज्यवाद 3

इंदिरा गाँधी व राजीव गाँधी की हत्या साम्राज्यवादी शक्तियों ने ही करवाई थी । जिससे कांग्रेस का नेतृत्व डरकर साम्राज्यवादी शक्तियों के सामने अपने घुटने टेक दिए है जिसका असर देश की बहुसंख्यक जनता के ऊपर पड़ रहा है जिससे देश की गुट निरपेक्ष छवि ख़त्म होती जा रही है । साम्राज्यवादी शक्तिया चाहती है की देश में उसकी पिट्ठू सरकार बने जिससे देश को आर्थिक रूप से गुलाम बनाया जा सके ।
भारतीय राजनेताओं का कालाधन खरबों डॉलर अमेरिका ,इंग्लैंड,अंटीगुआ,स्विजेर्लैंड ,,बहामास,संत कृष आदि जगहों में जमा है । यह सभी सफेदपोश आर्थिक अपराधी है और इन आर्थिक अपराधियों से देश की जनता का भला नही होने वाला है। पूंजीपतियों का मुख्य काम है की टैक्स चोरी कालेधन का इस्तेमाल चुनाव और इन पार्टियों के विभिन्न कार्यो में करके अपने फायदे के लिए सरकार का चलाना है । भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी चुनाव में भी चंदा दिया था । टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने 67500 डॉलर की रहत प्राप्त की। इससे यह साबित होता है की भारतीय कंपनिया जब अमेरिका के चुनावो में लाखो डॉलर का चंदा देकर इससे कई गुना रहत प्राप्त करती है तो भारतीय चुनाव में छोटे से बड़े उद्योगपति करोडो ,अरबो रूपी कांग्रेस,बसपा,सपा,भाजपा को देकर देश का अधिकांश बजट को अपने मुनाफे में क्यों तब्दील नही कर सकती है ? किसान,मजदूर ,मेहनतकश आवाम उनके प्रचार तंत्र से गुमराह होकर पूंजीवादी,साम्राज्यवादी शक्तियों की सरकार बनवा देते है ।
चुनाव पश्चात् आम मतदाता ठगा महसूस करता है की उसने अपने मत का उपयोग अपने वर्ग शत्रुओ के लिए किया है। चुनावी प्रोपगंडा करते समय उसे जो सुनहरे सपने राज्नोतिक ठगों ने दिखाए थे वह सब के सब ढेर होने लगते है और किसान ,मजदूर व आम नागरिक को अपनी गलती का एहसास होता है की उसने एक बार फिर अपने हाथो अपना बुरा कर डाला।

-मोहम्मद शुएब 'एडवोकेट '
-रणधीर सिंह सुमन 'एडवोकेट'

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