सोमवार, 31 अगस्त 2009

जीवन है केवल छाया


जीवन सरिता का पानी ,
लहरों की आँख मिचौनी
मेघों का मतवालापन ,
बरखा की मौन कहानी

गल बाहीं डाले कलियाँ,
है लता कुंज में हँसती
चलना,जलना , जीवन है
आहात स्वर में हँस कहती

संसार समर में कोई,
अपना ही है पराया
सम्बन्ध ज्योति के छल में,
जीवन है केवल छाया

डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल 'राही'

5 टिप्‍पणियां:

Harkirat Haqeer ने कहा…

जीवन सरिता का पानी ,
लहरों की आँख मिचौनी ।
मेघों का मतवालापन ,
बरखा की मौन कहानी॥

अच्छी लगी डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल 'राही' कविता ....आभार...!!

AlbelaKhatri.com ने कहा…

उम्दा कविता.......
वाह !
बहुत ख़ूब चित्रण ........बधाई !

महफूज़ अली ने कहा…

jeevan waaqai mein ek chhaya hi hai......

रश्मि प्रभा... ने कहा…

bahut hi badhiyaa........

kabeeraa ने कहा…

अच्छी कविता बधाई