मंगलवार, 20 जुलाई 2010

तुम हो जीवन-हृदय


तुम हो जीवन-हृदय
मैं हृदय का हृदय
तुम हो सूरज-किरण
मैं किरण का उदय
इस जगत को यही रास आई नहीं
मैं तुम्हारी हूँ कोई परायी नहीं,

तुम हो इक साधना
प्रार्थना, भक्ति हो
सुप्त मानव हो तुम
जागरण -शक्ति हो
कौन है जिसको तुमने जगाया नहीं ?
मैं तुम्हारी हूँ कोई पराया नहीं...!

-मीत

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