बुधवार, 21 जुलाई 2010

सभी लुटेरे हाथी पर




आजादी के बाद लुटेरों का समुदाय विकसित होने लगा जो प्राकृतिक संपदाओं पर अपना कब्ज़ा कर अपनी सम्रद्धि का नया रास्ता खोला। उस नए समुदाय ने ग्राम समाज की जमीन तालाब, बालू, मौरंग, जंगल, पहाड़, वन्य जीव आदि पर घोषित और अघोषित तरीके से अपना कब्ज़ा किया। उस समुदाय का एक कार्य यह भी होता था कि चुनाव के समय कांग्रेस की सरकार बनाओ और राज्य का संरक्षण प्राप्त करो। 1977 में गैर कांग्रेस वाद के नाम पर छोटे-छोटे दलों ने मिलकर जनता पार्टी बनाई और केंद्र से लेकर प्रदेश तक सरकार स्थापित की। उस सरकार ने अपना 3 वर्ष का कार्यकाल राज्य को समझने और आपस में लड़ने में गंवान दिए। पहली बार उत्तर प्रदेश में जब मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में गैर कांग्रेसी सरकार बनी तो प्राकृतिक संपदाओं के लुटेरे बेबस हुए क्योंकि उनको राज्य का संरक्षण नहीं मिल पा रहा था । भारी संख्या में ऐसे तत्व समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। उन्होंने पूरे प्रदेश में बालू, मौरंग, गिट्टी, जल, जंगल, जमीन पर अपनी लूट बनाए रखी और इस लूट से वंचित जातियों को भी लूट करने की कला सिखाई और सारे बाहुबली समाजवादी हो गए जो बाहुबली समाजवादी नहीं हुए उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव में समाजवादी पार्टी की मदद कर अपनी लूट को बनाये रखा फिर दौर आया सुश्री मायावती का उसमें प्राकृतिक सम्पदा के लुटेरे बाहुबलियों को अपने प्रशासन के डंडे से हांक कर अपने पक्ष में किया और स्तिथि यहाँ तक आ पहुंची की लगभग सभी लुटेरे हाथी पर आज सवार हो गए ।
आज के दौर में संगठित अपराध का मुख्य कारण राज्य को संचालित करने वाले लोग प्राकृतिक सम्पदा को लूटने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। जिससे कानून व्यवस्था नाम की चीज नष्ट होती है। उत्तर प्रदेश के मंत्री नन्द कुमार नंदी के ऊपर हुआ हमला उसी का परिणाम है। नंदी साहब ने इलाहाबाद में सभी प्राकृतिक संपदाओं के ऊपर राज्य की ताकत का इस्तेमाल कर लूट खसोट मचा रखी है। हद तो यहाँ तक हो गयी कि पहले से लूट कर रहे लोगों को ठेके पट्टे ही नहीं मिले और राज्य की मदद से उनकी संपत्तियों की नीलामी कर दी गयी। लोकसंघर्ष पहले भी लिख चुका है की खनन मंत्री के कारण 1500 रुपये में एक ट्रक बिकने वाली बालू आज 6000 रुपये की बिक रही है। उसका मुख्य कारण बालू खनन पर राज्य की मदद से एकाधिकार हो जाना है।
प्रदेश में कमोबेश स्तिथि अफसरशाही की भी है। अफसरशाही भ्रष्टाचार में बुरी तरीके से लिप्त ही है। इसके अतिरिक्त तमाम सारे व्यवसायों के ऊपर भी उनका कब्ज़ा है। दूसरे लोग प्रकृति प्रदत्त चीजों का उपयोग नहीं कर सकते हैं और यही मुख्य संघर्ष है।

पुरानी बिल्डिंगो से किरायेदारों को मार-पीट कर खाली कराने का कार्य राज्य पर काबिज लोग कर रहे हैं। न्यायलय की भूमिका समाप्त हो चुकी है। यह पोस्ट लिखी ही जा रही थी कि सांस्कृतिकर्मी, युवा कवि श्री सुनील कुमार दत्ता आजमगढ़ शहर में किराए के मकान में रह रहे हैंन्यायलय में विवाद विचाराधीन है जिसपर फैक्स फीड के संविदा सहायक अभियंता राजेश सिंह कब्ज़ा कर लेना चाहते हैं, का उधम जारी थाजिला प्रशासन मौन है न्यायपालिका तारीखें देने में व्यस्त हैइसका कोई विकल्प नहीं हैयह बात टेलेफोन से अभी-अभी उन्होंने बताईफैक्स फीड का अभियंता 5-6 साल की नौकरी में अगर 20-25 करोड़ का स्वामी हो गया है तो यह सब होगा हीआय से अधिक संपत्ति रखने पर कानून मौन है

आज सभी गुंडे चाहे वह नौकरशाह के रूप में हों या राजनेता के रूप में सभी हाथी की सवारी कर रहे हैं।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

3 टिप्‍पणियां:

शरद कोकास ने कहा…

और वे इस बात को भी बहलिभाँति जानते है कि " कुत्ते भौंके हज़ार हाथी चले बज़ार " बेहतरीन रचना है ।

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

कल तक हाथ लुट रहा था अब हाथी पर सवार लोग लुट रहे है | इस देश की नियति ही यही है |
कहीं नेता , कहीं कार्यकर्ता , कहीं पार्टी काडर , कहीं बाबा लोग , कही कारखाने वाला ,कहीं दुकानदार ,कहीं वकील ,कहीं डाक्टर ,कहीं शिक्षक ,तो कहीं गरीबों को उनका हक़ दिलाने के नाम पर नक्सली सब लुटने में ही लगे है |

नीरज जाट जी ने कहा…

nice