शुक्रवार, 27 अगस्त 2010

साहब क्या अंधे होते हैं ?

उत्तर प्रदेश की जेलों में जेल व्यवस्था को सुधारने के लिए आए दिन जिला मजिस्टे्ट, पुलिस अधिकारी छापे डालते रहते हैंन्यायिक अधिकारी गण जिसने आदेश से जेल में बंदियों को रखा जाता हैवह भी बराबर निरीक्षण का कार्य करते रहते हैंइसके अतिरिक्त कारागार विभाग के अधिकारी मानवाधिकार आयोग तथा विभिन्न उच्चाधिकार समीतियों के लोग भी निरीक्षण करते रहते हैं लेकिन इन सभी को जेल में निरीक्षण के दौरान कोई भी भ्रष्टाचार नहीं दिखाई देता हैइस मामले में सभी साहबगण आँखों से सूरदास हो जाते हैंजेल में रहने के लिए कैदियों को सादाहरण तरीके से 5 हजार रुपये प्रति माह खर्च करना होता हैजेल के अन्दर खेती रसोई में कार्य करने से बचने के लिए 120 रुपये प्रति सप्ताह देने होते हैंरात में पहरा देने से बचने के लिए 300 रुपये, मुलाकात करने के लिए 50 रुपये अगर बीमार हैं तो 100 रुपये सामान्य खाना खाने के लिए 30 रुपये खर्च करने पड़ते हैंमुलाकात में मिले खाने-पीने के सामान में भी हिस्सा देना पड़ता है
जेल में बीडी, सिगरेट, अफीम, गांजा, चरस आदि नशीले पदार्थों के अतिरिक्त रेट हैंयह सभी सामान भी जेल में उपलब्ध होता हैजेल में साहब लोगों के आए दिन मुआयने का क्या मतलब है
मेरा यह सब लिखने का बस इतना मतलब है कि कारागार जैसी जगह पर बंद रहने के लिए भी इतनी तरह की घूस देनी पड़ती है तो सामाजिक जीवन में आप कितनी तरह की घूस अदा करते हैं उसका आकलन करने की जरूरत है

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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