शुक्रवार, 6 अगस्त 2010

करहुं प्रणाम, जोड़ जुग पाणि

एक मजेदार खबर उर्दू अखबार में देख कर मैं चौंक पड़ा। जलालपुर, आंबेडकर नगर (यू.पी)के इस 'डिस्पैच' का हिंदी रूपांतरण आप भी पढ़ लीजिये -
" देश की राजनीति में मुलायम सिंह, राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, मनमोहन सिंह, बाल ठाकरे व जयललिता भले ही अलग अलग राजनैतिक पार्टियों का प्रतिनिधित्व कर रहे हों, लेकिन स्थानीय तहसील की ग्राम पंचायत हैदराबाद में यह सब एक ही छत के नीचे अपनी जिंदगी बसर कर रहे हैं।
यहाँ के मिठाई लाल ने इन नेताओं से प्रभावित होकर अपने आधा दर्जन बच्चों के नाम इन बड़े राजनीतज्ञयों के नाम पर कर रखा है। इन के बड़े पुत्र मुलायम सिंह ने इस वर्ष इंटर पास किया है। दूसरे राजनाथ सिंह ने हाई स्कूल कर लिया है, तीसरा कल्याण आठवी का विद्यार्थी है, चौथी संतान जय ललिता -चौथी कक्षा में गयी है, मनमोहन सिंह ने प्राइमरी में दाखिला लिया है, आखिरी पुत्र बाल ठाकरे मां की गोद में खेल रहे हैं। मिठाई लाल को इस बुढ़ापे में एक और बेटी की इच्छा है, जिसका नाम उन्होंने पहले ही मायावती सोच लिया है।'
मिठाई लाल जी की यह दूर द्रष्टि प्रशंसनीय है, यदि कभी मिल गए तो मैं इन्हें बिना मिलावटी लड्डू जरूर खिलाऊंगा, इन्होने नया ढंग निकाल कर बड़ो-बड़ो को मात दी है। ग्वालियर एवं रामपुर के राजघरानो में देखा गया था कि इनमें वफादारी, वैचारिक स्वतंत्रता या स्वार्थवश यह आपसी व्यवस्था थी कि इनके सदस्य अलग अलग पार्टियों में अपनी सीट रिजर्व रखते थे। बाद में इस तरकीब को बहुतों ने अपनाया, सरकारें बदलने पर भी कोई कष्ट नहीं होता था।
हाँ ! एक प्रश्न मिठाई जी से करना है, वह यह कि अगर लड़का हो जाए तो क्या नाम रखेंगे ? नाम पर न किसी की बपौती है न ये 'पेटेंट' होते हैं, नसीमुद्दीन तो ठीक नहीं रहेगा, मेरा सुझाव है कि सतीशचन्द्र या स्वामी प्रसाद रख लें, सब से बढ़िया यह रहेगा कि काशीराम रख दे। सत्ताधारी पार्टी के प्रति श्रद्धा प्रदर्शित होगी। बड़े लड़के को नौकरी बिना 'पेमेंट' भी मिलने का चांस बनेगा, यह बात और है कि उसके नाम बदलवाने की शर्त रखी जाए।
कभी कभी 'सब साधै' का दांव उल्टा भी बैठता है। मगर हम को क्या हक़ है कि किसी की नीयत पर शक करें। हो सकता है कि इसमें 'नेशनल सरकार' बनाने का या नैतिक या अध्यात्मिक पहलु हो या सन्देश हो अगर न भी हो, तो यह दोहा पढ़ते रहे, मन शुद्ध हो जायेगा।
सियाराम मय सब जग जानी,
करहुं प्रणाम, जोड़ जुग पाणि
-डॉक्टर एस.एम हैदर

3 टिप्‍पणियां:

Arvind Mishra ने कहा…

सर्व पार्टी समभाव की अच्छी मिसाल :)

हास्यफुहार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

विजय प्रकाश सिंह ने कहा…

डॉ. हैदर साहब आप की यह पोस्ट बहुत ज्ञान वर्धक रही । मिठाई लाल को मिठाई ( लड्‍डू) वह भी मिलावटी, खिलाने का इरादा भी नेक है । प्रभु आप की यह मुराद पूरी करे ।

एक बात और, अगले साल जनगणना होने वाली है, मिठाई लाल जी और उन जैसों की कोशिशों के
नतीजतन हम १२० का अन्दाजा है लेकिन १२५ करोड़ तक भी जा सकते हैं ।