गुरुवार, 5 अगस्त 2010

यह नयना बिन काजल कारे

आदि काल से व्यक्ति को अपने सजने सवारने का बहुत शौक रहा है उस समय की कबीलाई और जंगली कौम के स्त्री-पुरुष पत्थरों, लकड़ियों एवं हड्डियों से बने जेवर पहना करते थे। खजुराहो के अति प्राचीन मंदिरों पर पत्थरों से उकेरी गयी मूर्तियों में भी यह भावनाएं साफ़ दिखाती हैं। शुरू में मेहँदी या अन्य चीजों से बाल रंग कर बूढ़े लोग अपने को जवान दिखाने की जुगत में लगे रहते थे। बाद में 'डाई' के आने से अंतर्मन की हीन भावना को छुपाने का एक अच्छा आवरण हाथ लगा। धीरे-धीरे यह धंधा घरों से निकल कर सैलून और ब्यूटी पार्लरों तक पहुंचा, जिस से अनेक लोगों को खाने कमाने के अवसर हाथ लगे। इस बीच कंपनियों ने बाल रंगने के नए नए कलर तथा प्रसाधन बाजारों में भेज दिए। अब युवा वर्ग भी इस अंधी-दौड़ में शामिल हो गया।
समाये बदलते देर नहीं लगती। नई चीज जाती हैं और पुरानी चीजों को 'ओवर टेक' करती हैं।
एक नई वैज्ञानिक खोज की और आपका ध्यान आकृष्ट करने के लिए मुझ को यह सब लिखना पड़ा।

हाल ही में एक फ्रांसीसी वैज्ञानिक ब्रुनो बर्नार्ड ने एक विशेष 'मैजिक लोशन' तैयार किया हैविशेषज्ञों का मानना है कि अब बालों को डाई टिन्ट्स या रोज-रोज के केमिकल ट्रीटमेंट करने से फुर्सत मिल जायेगीइसके इस्तेमाल से बालों का स्वाभाविक कलर और चमक वापस जाएगीप्रसाधन प्रेमियों के लिए तो यह एक अच्छी खबर हैपरन्तु इस धंधे में लिप्त कंपनियों, सैलूनो तथा ब्यूटी पार्लरो की कमी पर कुछ असर तो जरूर पड़ेगा
अब बात का दूसरा रुख यह भी देखिये केवल मके-उप से कोई खूब सूरत नहीं बन जाता, मैंने यह भी सुना है कि सुन्दरता व्यक्ति में नहीं, उसको देखने वाले की आँखों में होती है, उर्दू दां सोसाइटी में जब कोई किसी की प्रशंसा करता है तो वह ठेठ उर्दू में जवाब देता है कि 'यह आपका हुस्ने-नजर है। '
दरअसल कोई भी व्यक्ति अपने अच्छे व्यवहार अचार, विचार के कारण ही लोगों में पसंद किया जाता है, खूबसूरती व्यक्ति के चेहरे से नहीं उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व से झलकनी चाहिए - ऐसी ही स्तिथि के लिए किसी ने सांकेतिक भाषा में यह कहा था-
क्यों काजल दे, काहे सँवारे
यह नयना बिन काजल कारे

-डॉक्टर एस.एम हैदर

4 टिप्‍पणियां:

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

nice sir

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

नाइस सर!

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

हमरी सिरीमती जी त कहती हैं कि
मैं तो डर से ना डारूँ कजरवा
कि नैनों में सजन बसते हैं...
वैसे डॉक्टर साहब पोस्टवा जानकारी से भरपूर है... बहुत बढिया..

हास्यफुहार ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति।