रविवार, 3 अक्तूबर 2010

कुत्ते की जाति - मालिक की जाति होती है ?

(मेरी जाति मेरे मालिक की जाति है)
भारतीय समाज में कुत्तों की भी जाति होने लगी है। कुत्ते की वही जाति होती है जो उसके मालिक की जाति होती है। अभी हाल में मध्य प्रदेश के मुरैना जनपद में सुमावली थाना क्षेत्र के मुत्ता ठाकुर के कुत्ते को गाँव के दलित चन्दन जाटव व उसकी पत्नी सुनीता जाटव ने अपने घर की रोटी खिला दी थी। जिससे ठाकुर जाति के कुत्ते को दलित की रोटी खाने से उसकी जाति को ठेस पहुंची। जिस पर मुत्ता ठाकुर ने दोनों लोगों पर 15 हजार रुपये का जुर्माना का दंड दे दिया। जिसे अदा न कर पाने के कारण दलित दंपत्ति गाँव छोड़ कर भाग गया। सिटी मजिस्टेट ने हरिजन कल्याण थाना से उक्त मामले की जांच कराई, मामला सत्य पाया गया। पुलिस अभी तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पायी है।
भारतीय समाज में जाति के नाम पर आज भी अत्याचार हो रहे हैं। जातिगत अत्याचारों के कारण एक बहुत बड़ी आबादी अपने को प्रताड़ित महसूस करती है जाति व्यवस्था भारतीय समाज को आगे बढ़ने से रोकती है हम सैकड़ों वर्षों के पूर्व जातिगत अहम् को लेकर फंसे हुए हैं। उन्नति के लिए हमको इस सोच से बाहर निकलना होगा।

-सुमन
लो क सं घ र्ष !



आजमगढ़ के सुप्रसिद्ध नाटककार, पत्रकार श्री सुनील दत्त ने यह मार्मिक कविता रोटी पर भेजी है। यहाँ प्रकाशित की जा रही है।
यह अजब है रोटी का खेल

यह गजब है रोटी का खेल
कभी हंसाती है रोटिया
कभी रुलाती है रोटिया
अमीरों कि शान है रोटिया
अमीरों कि खिलवाड़ है रोटिया
हाड़तोड़ मेहनत कराती है रोटिया
फिर भी नसीब नही होती दो जून कि रोटिया
अमीरों के पास रहने का इसे है शगल
गरीबो कि अस्मत बेचती है रोटिया
यह अजब है रोटी का खेल
यह गजब है रोटी का खेल
कभी हंसाती है रोटिया
कभी रुलाती है रोटिया
मेहनतकश इंसानों का पसीना
लहू बनाकर खाती है रोटिया
आदमियों को एक जिन्दा लाश बनाती है रोटिया
कभी दिखाती है सपने यह रोटिया
कभी तोडती है सपने यह रोटिया
कभी तो सुंदर होगी यह दुनिया
यह एहसास दिलाती है रोटिया

-सुनील दत्ता

1 टिप्पणी:

राज भाटिय़ा ने कहा…

लोग पागल हे जो आज भी इन बातो के पीछॆ लगे है.