शुक्रवार, 17 दिसंबर 2010

सत्तारूढ़ दल की लठैत है पुलिस

सत्तारूढ़ दल के लठैत

यूपी पुलिस के दामन में दाग ही दाग हैं। आम तौर पर उसकी छवि जनता के खिलाफ बर्बर गिरोह के रूप में उभरती है, जिसे वर्दी की आड़ में कुछ भी करने की आजादी है। भ्रष्टाचारियों और अपराधियों की साथ गाँठ चलती रहती है। सत्ता के इशारे पर खाकी वर्दी कुछ भी करने को तैयार रहती है।
-जस्टिस आनंद नारायण मुल्ला, इलाहाबाद उच्च न्यायालय (1967 में की गयी टिप्पणी)
भारत में राजा महाराजाओं के पास शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए पुश्तैनी व परंपरागत लठैत होते थे जो राज्य में शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए कार्य करते थे। वह लठैत लोग कभी-कभी डकैती, बलात्कार, आगजनी जैसे अपराध भी करते रहते थे। ये लठैत लोग लौकी, तुरोई से लेकर बहुमूल्य चीजें नागरिकों से जबरदस्ती छीन लेते थे। नागरिक उनके खिलाफ कुछ कर नहीं पाते थे। कभी कभी लठैत और उनके सरदार राजा की भी संपत्तियों में भी सेंधमारी कर लेते थे लेकिन राजा द्वारा उसकी अनदेखी कर दी जाती थी। उसी तर्ज पर गाँव देहात में आज भी भारतीय पुलिस व्यवस्था काम कर रही है और राज्य उसके कुकृत्यों की अनदेखी कर रहा है। आज किसी की हत्या करानी हो तो एनकाउन्टर विशेषज्ञ से मिल लीजिये ट्रांस्पेरेंसी इन्टरनेशनल के सर्वे के अनुसार भारतीय पुलिस 214 करोड़ रुपये जनता से अवैध वसूली करती है। उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती घोटाला, फायर ब्रिगेड में पम्प घोटाला सहित अनेकों घोटाले पुलिस के उच्चाधिकारियों ने किये किन्तु कोई दंडात्मक कार्यवाई उनके खिलाफ अभी तक संभव नहीं हो पायी है।
पुलिस का वर्तमान समय में प्रमुख कार्य यह है कि सत्तारूढ़ दल के नेताओं को हर संभव तरीके से खुश रखो और मनचाहे तरीके से नागरिकों को लूटो, कोई कार्यवाई नहीं हो सकती है। न्याय, संविधान, विधि का शासन सब खोखले नारे हैं। जिला पंचायत के चुनाव में पुलिस विभाग के अधिकारियों ने जिस तरह जिला पंचायत सदस्यों को डरा, धमका कर, बाद में देख लेने की धमकी देकर प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर सत्तारूढ़ दल के नेताओं को निर्वाचित करने में अहम् भूमिका अदा की है और अब ब्लाक प्रमुख पद पर सत्तारूढ़ दल के नेताओं को निर्वाचित करने के लिए पुलिस अधिकारी स्टार प्रचारकों की भूमिका में नजर आ रहे हैं। बाराबंकी जनपद के रामनगर ब्लाक में अनुसूचित जाति की क्षेत्र पंचायत सदस्य श्रीमती रामदुलारी के लड़के योगेश का अपहरण सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी संजय तिवारी ने कर लिया था लेकिन पुलिस प्रशासन ने कोई कार्यवाई न करके संजय तिवारी के हौसलों को और बुलंद किया और स्थानीय पुलिस अधिकारी उनके चुनाव प्रचार भी कर रहे हैं।
आज जरूरत इस बात की है कि पुलिसिया लठैतों के काले कारनामो से नागरिको को बचाने के लिए एक अलग व्यवस्था कायम करने की है जिससे वर्दी पहने अपराधियों को दण्डित कराया जा सके।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

4 टिप्‍पणियां:

सतीश चन्द्र सत्यार्थी ने कहा…

अब तो गुंडों से ज्यादा डर तो लोगों को पुलिस से ही लगता है. पुलिस की गंदी इमेज का ही नतीजा है कि अच्छे छात्र पुलिस की नौकरी में जाने से हिचकते हैं.
ब्लॉगिंग: ये रोग बड़ा है जालिम

Kajal Kumar ने कहा…

लंदन में पुलिस वालों के पास हथियार नहीं होते. हथियार बंद दस्तों के लिए अलग से विभाग है जहां से पुलिस को ज़रूरत पड़ने पर ही बुलाया जाता है. भारत में यह क्यो ज़रूरी है कि हर पुलिसिये के पास डंडा-लाठी हो. जब वह डंडा उठाए घूमेगा तो उसे चलाने में उसे क्यों परहेज़ होगा. भारत में भी इन लंगूरों के हाथ से उस्तरे ले लेने चाहिये.

Dr. shyam gupta ने कहा…

- जैसा अन्न हो जैसी सन्गति सोई धर्म धरे....

'उदय' ने कहा…

... gambheer samasyaa !!!