सोमवार, 24 जनवरी 2011

उदास मौसम के लिए ........




हम लड़ेंगे साथी, उदास मौसम के लिए
हम लड़ेंगे साथी, गुलाम इच्छाओं के लिए
हम चुनेंगे साथी, जिन्दगी के टुकड़े
कत्ल हुए ज़ज़्बों की कसम खाकर
बुझी हुई नजरों की कसम खाकर
हाथों पर पड़े घट्ठों की कसम खाकर
हम लड़ेंगे साथी
जब बंदूक हुई, तब तलवार होगी
जब तलवार हुई लड़ने की लगन होगी
लड़ने का ढंग हुआ, लड़ने की जरूरत होगी
और हम लड़ेंगे साथी.....
हम लड़ेंगे
कि लड़े बगैर कुछ नहीं मिलता
हम लड़ेंगे कि अब तक लड़े क्यांे नहीं
हम लड़ेंगे अपनी सजा कबूलने के लिए
लड़ते हुए जो मर गए
उनकी याद जिंदा रखने के लिए
हम लड़ेंगे साथी......

-पाश

1 टिप्पणी:

निर्मला कपिला ने कहा…

लड़ते हुए जो मर गए
उनकी याद जिंदा रखने के लिए
हम लड़ेंगे साथी......
जरूर उन शहीदों के लिये तो लडना ही पडेगा नही तो उनके सब सपने हमारे नेता बेच कर खा जायेंगे। आभार।