सोमवार, 30 नवंबर 2015

राहुल गाँधी : एक सरकार बलात्कार, नरसंहार, किसानो के घर जलाने का का कार्य करती रही, आपकी केंद्र सरकार भी चुप बैठी रही


काहे के युवराज हो- क्या कर पाओगे

ग्रेटर नोएडा देश की राजधानी दिल्ली से सटा हुआ है। ग्रेटर नोएडा के भट्ठा, परसौल गाँव में किसान आन्दोलन पर फायरिंग के पश्चात प्रदेश सरकार बलात्कार, नरसंहार, किसानो के घरो को आग लगाने का कार्य करती रही। वहीँ दिल्ली में बैठे हुए प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, खबरिया चैनल व खुफिया तंत्र की रिपोर्टों को देखने के बाद भी चुप बैठे रहे। राहुल गाँधी के धरना पर बैठने के बाद प्रदेश सरकार ने यह घोषणा कर दी कि मंगलवार की रात को ही धारा 144 सी.आर.पी.सी वापस ले ली गयी थी और फिर राहुल गाँधी की गिरफ्तारी के लिये कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह के अनुसार धारा 144 समाप्त नहीं हुई थी और 151 सी.आर.पी.सी के तहत गिरफ्तार कर उनको रिहा कर दिया जाता है। इससे बड़ा महाझूठ सरकार का नहीं हो सकता है।
जब सरकारें लोकतंत्र, न्याय, समानता या अपने संवैधानिक दायित्वों को छोड़ कर अपराध में लिप्त हो जाती हैं तो उस समय आम आदमी की कीमत मच्छर से भी बदतर होती है। खबरिया चैनलों के सामने सरकार किसानो के घरों को जला रही थी, लूटपाट कर रही थी और किसी भी चैनल के संवाददाता की हैसियत नहीं थी कि सरकार के प्रतिनिधि पुलिस, पी.एस.सी के दिशा निर्देशों का उल्लंघन कर सके। राष्ट्रीय महिला आयोग के सामने महिलाओं ने बलात्कार की भी बात कही है। सरकार ने राहुल गाँधी की एक भी मांग नहीं मानी। राहुल गाँधी कांग्रेस सांसद के साथ-साथ केंद्र में सरकार पर सत्तारूढ़ दल के महासचिव भी हैं। अगर वह वास्तव में किसानो को न्याय दिलाना चाहते हैं तो अविलम्ब केंद्र सरकार भट्ठा और पारसोल में अपना प्रतिनिधिमंडल भेजें और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक करमवीर सिंह तथा विशेष पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था श्री बृजलाल के खिलाफ उक्त मामलों की प्राथमिकी दर्ज करा कर अविलम्ब कार्यवाई करें अन्यथा यह समझा जायेगा कि राहुल गाँधी भी एक राजनीतिक ड्रामा कर रहे हैं। जो इस देश के लोकतंत्र में बहुत सारे मदारी करते आ रहे हैं। यह कहना बहुत आसान है कि सरकार की दरिन्दिगी देख कर भारतीय होने पर शर्म आई। केंद्र सरकार तुरंत पहल करे।
लोकसंघर्ष की माननीय उच्चतम न्यायालय से प्रार्थना है कि किसानो के नरसंहार के मामले का स्वत: संज्ञान लेकर दोषी अधिकारीयों के खिलाफ जांच न्यायालय की निगरानी में कराये जिसे भारतीय लोकतंत्र में न्यायपालिका की गरिमा को नई उचाईयाँ मिल सके।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

2 टिप्‍पणियां:

sunil kumar ने कहा…

हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी
फिर भी तन्हाइयो का शिकार आदमी |
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ
अपने ही लाश का खुद मजार आदमी |

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

nice