मंगलवार, 1 दिसंबर 2015

गेरुवा बुर्के के अपराधी

कर्नाटक में विगत 12 नवम्बर को संघ के कार्यकर्त्ता हरीश पुजारी की हत्या कर दी गयी थी और आरोप हिन्दुवत्व वादी संगठनो ने मुस्लिम संगठनो के ऊपर लगाया था. हरीश पुजारी के हत्यारों को गिरफ्तार करने के लिए हिंदुवत्व वादी संगठनो ने दक्षिण कन्नड़ जिला को जबरदस्ती बंद कराया था और पूरे कर्नाटक में एक सांप्रदायिक उन्माद व सांप्रदायिक वातावरण को तैयार किया था किन्तु अब जब उक्त केस में जांच की जा रही है तो जो आरोप-प्रत्यारोप हिंदुवत्व वादी संगठन लगा रहे थे उसके विपरीत उन्ही संगठन के लोग हत्यारे के रूप में गिरफ्तार हो रहे हैं. इस केस में अब तक तीन अभियुक्त गिरफ्तार किये जा चुके हैं जिसमें मुख्य अभियुक्त बजरंग दल के नेता भुविथ शेट्टी उसके साथी अच्युता तथा मिथुन गिरफ्तार किये गए. मिथुन को आज गिरफ्तार किया गया है.
दक्षिण कन्नड़ के पुलिस अधीक्षक शरणअप्पा ने बताया कि मिथुन को पुत्तूर बस स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया गया है. कर्णाटक में कांग्रेस की सरकार है. बजरंग दल से लेकर श्रीराम सेना तक मुस्लिम विरोध के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं. कभी पाकिस्तानी झंडा लहराकर, कभी अपने किसी साथी की हत्या कर सांप्रदायिक उन्माद पैदा कर रहे हैं. यह सारी कार्यवाईयां नागपुरी मुख्यालय से संचालित होती हैं. इन कार्यवाइयों से बहुसंख्यक आबादी एक काल्पनिक विरोध मुस्लिम संप्रदाय के प्रति पैदा कर उसकी भावनाओं को वोटों के रूप में तब्दील करने का काम किया जाता है.
  वही कुरनूल जिला आन्ध्र प्रदेश में 29 नवम्बर को भारी मात्रा  में विस्फोटक  संघियो के पास  से  बरामद हुए है ऐथवा श्रीनिवास व बोया सुरेश  को पुलिस ने गिरफ्तार किया है इन लोगो के पास से  2,680 डिकोंनेटर, 1,200 गिलेटीन राड, 180 बूस्टर , 1,200 मीटरफ्यूज वायर  व  1.50टोंस अमोनियम नाइट्रेट बरामद हुआ  है  .
 पुलिस के वरिष्ठ अधिकारीयों के अनुसार यह विस्फोटक सामग्री कर्नूल के ओरवाकल से दोरनाला जनपद प्रकाशम जानी थी.
यह उसी तरह से होता है कि आतंकवाद के नाम पर या हिंदुवत्व संगठन जगह-जगह विस्फोट कर मुस्लिम नौजवानों के ऊपर दोषारोपण कर आतंकवाद की राजनीति कर बहुसंख्यक आबादी की आतंकवाद विरोधी भावनाओ को हिंदुवत्व वादी राजनीति के तहत मतों में तब्दील करने का काम किया था. हरीश पुजारी की हत्या के बाद केन्द्रीय मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा और डीके सांसद नलिन कुमार कतील ने अपने उग्र भाषणों से कर्णाटक में सांप्रदायिक उन्माद पैदा किया था. आतंकवाद में जब साध्वी प्रज्ञा से लेकर असीमानंद तक पकडे गए तो नागपुर मुख्यालय के हत्यारे गिरोहों का पर्दाफाश होना शुरू हुआ है. मुख्य सवाल यह है कि इस देश की एकता और अखंडता को बचाए रखने के लिए खुद घटना करके दुसरे के ऊपर आरोप लगाओ तो कैसे एकता बची और बनी रहेगी. भारत पाक विभाजन के समय यही हिंदुवत्व वादी शक्तियां अफवाहें फैला कर सांप्रदायिक उन्माद पैदा कर जगह-जगह नरसंहार कराये थे और उसमें मरने वाले लोगों के हत्यारों को सजा दिला पाने में हमारा लोकतंत्र मजबूत साबित नहीं हुआ. आज जरूरत इस बात की है की इस तरह की घटनाओं में अभियुक्तों को न्यायालयों से सजा कराकर नागपुरी हत्यारों पर लगाम लगाओ.

सुमन 

1 टिप्पणी:

Ankur Jain ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति।