बुधवार, 18 मई 2011

उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ दल में अपराधी विधायकों का बोलबाला

मेरा क्या कर लोगे

शेखर तिवारी को लखनऊ में सजा होने के बाद पूर्व मंत्री आनंद सेन को भी उम्रकैद की सजा फैजाबाद में विशेष न्यायालय एस.सी/एस.टी द्वारा सुनाई जा चुकी है और इस समय अशोक यादव, उस्मानुल हक़, पुरषोत्तम द्विवेदी, मुख्तार अंसारी सहित कई माननीय विधायक जेलों में निरुद्ध हैंयह सब लोग गंभीर अपराधिक मामलों में निरुद्ध हैं
वहीँ बाराबंकी से विधायक राज्य मंत्री डॉक्टर संग्राम सिंह हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वह मार्फीन, हेरोइन या यूँ कहिये नारकोटिक्स ड्रग के बड़े स्मगलर्स में से हैं डॉक्टर संग्राम सिंह साधारण किसान के घर में जन्में व्यक्ति हैं और आज अपनी फितरत और हिकमत अमली की बदौलत अरबों रुपयों की परिसंपत्तियों के मालिक हैं और अगर सत्तारूढ़ दल के माननीय विधयाकों के गंभीर आर्थिक मामलों के अपराधों की सूची बनायीं जाए तो उत्तर प्रदेश पूरी दुनिया में टॉप पर होगा डॉ. सिंह ने शहर के बीचोबीच पार्क की जमीन की प्लाटिंग कर रहे हैं और जिला प्रशासन के अधिकारी इस आर्थिक अपराध में उनकी मदद कर रहे हैं पास ले आउट में पार्क यदि किसी जमीन को घोषित कर दिया गया है तो उसके ऊपर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है और ही उसके स्वरूप को बदला जा सकता हैइस खेल के बाद जनता के काफी लोग जब प्लाट खरीद लेंगे और निर्माण कार्य कर लेंगे तब डॉ सिंह अगर मंत्री नहीं रहते हैं तो यही जिला प्रशासन उस निर्माण कार्य को ध्वस्त करने का कार्य करने लगेगादेखने में यह रहा है कि पहले जिला प्रशासन आर्थिक अपराधों को अपने सहयोग से करवाता है और फिर नाराजगी होने पर आर्थिक अपराध में कार्यवाई करने लगता हैइस तरह से यह साबित होता है कि शासन और प्रशासन अपराध को रोकने में रुचि नहीं रखता है और उसके अधिकारी रुपया खा कर अपराध कराएँगे भी और साफ़ बच निकलेंगेअभी मध्य प्रदेश में काफी अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया हैजिससे अरबों रुपये का नुक्सान जनता को उठाना पड़ा है और जिन अधिकारियों के समय में वह निर्माण कार्य हो रहे थे तत्कालीन अधिकारीयों ने रुपये लेकर निर्माण कार्य कराये होंगेआज जरूरत इस बात की भी है कि अधिकारीयों की भी जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए कि उनके समय में अगर अपराध हुआ है और उन्होंने उसको रोकने का कोई प्रयास नहीं किया है तो उनके ऊपर भी अपराधिक विधि के अनुरूप कार्यवाई की जाए
जनप्रतिनिधियों के निर्वाचन प्रक्रिया के प्रारंभ होते ही आर्थिक अपराध की भूमिका शुरू हो जाती हैउनके चुनाव में बड़ी-बड़ी कंपनियों का कला धन खर्च होता है अपराधी तस्कर अपने-अपने मोहल्लों में जनप्रतिनिधियों को चुनाव की वैतरणी पार कराने में मदद करते हैंशराब, सेक्स, कला धन से ओत-प्रोत चुनाव प्रक्रिया से निर्वाचित अधिकांश प्रतिनिधि से अच्छा होने की उम्मीद करना ही बेमानी हैउसी का प्रतिबिम्ब माननीय विधायक मंत्रीगणों में दिखाई देता है
सुमन
लो क सं घ र्ष !

3 टिप्‍पणियां:

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

सेकुलर लोग है जी इनका कोई क्या कर लेगा | इनके खिलाफ बोलने वाले को साम्प्रदायिक करार दे दिया जायेगा |

राजीव तनेजा ने कहा…

हर जगह का यही हाल है...शायद!...इसलिए कि ये हिन्दोस्तान है

Vijai Mathur ने कहा…

अधिकारियों के लिए कानूनी बाध्यता का आपका सुझाव शीघ्रातिशीघ्र अमल में लागू होना चाहिए तभी इस प्रकार के तथाकथित जन-प्रतिनिधी भी काबू किये जा सकेंगें.