शुक्रवार, 30 सितंबर 2011

9/11 के दस साल अंतिम भाग

बुश सरकार ने यह अफवाह फैलाई कि ईराक के पास महासंहारक शस्त्र हैं परंतु सद्दाम को अपदस्थ कर दिए जाने के बाद वहां ऐसा एक भी शस्त्र नहीं मिला और इससे पूरी दुनिया के सामने अमरीका का झूठ उजागर हो गया। इस प्रकार, 9/11 के हमले ने अमरीकी प्रजातंत्र के बारे में कई भ्रमों दूर कर दिया है। ओसामा ने यह दावा किया था कि वह अमरीका को कमजोर करके रहेगा। उस समय हम सबने उसके इस दावे को हंसी में उड़ा दिया था। परंतु यह विडंबना ही है कि अंततः 9/11 के हमले से अमरीका कमजोर ही हुआ।
लगातार युद्घों ने अमरीकी अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। इन दोनों युद्घों में अरबों डालर खर्च हुए परंतु अमरीका के हाथ कुछ नहीं लगा। आज अमरीका का बजट घाटा लगभग 1,40,000 करोड़ डालर है। यह अमरीकी इतिहास का सबसे बड़ा बजट घाटा है। यद्यपि अमरीका कभी आधिकारिक रूप से यह स्वीकार नहीं करेगा कि इन युद्घों ने उसकी अर्थव्यवस्था की री़ तोड़ दी व इनके कारण हजारों निर्दोषों ने अपनी जानें गंवाईं परंतु सच यही है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था की बदहाली के लिए काफी हद तक ये युद्ध जिम्मेदार हैं।
ये युद्ध तथाकथित रूप से आतंकवाद को खत्म करने के लिए लड़े गए थे परंतु इस्लामिक दुनिया में आतंकवाद अब भी जीवित है। यद्यपि यह सही है कि अमरीका ने आतंकवाद को अपने देश से बाहर धकेल दिया है और अब वह इस्लामिक देशों में तांडव कर रहा है। 9/11 के पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईराक में आतंकी हमले नहीं होते थे परंतु अब इन देशों में आतंकी घटनाएं आम हो गई हैं।
रमजान के पवित्र माह में भी पाकिस्तान, ईराक व अफगानिस्तान में आतंकवादी चुप नहीं बैठते। ईराक में ईद के दिन भी आतंकी हमला हुआ जिसमें कई मासूमों को अपनी जानें गंवानी पड़ीं। तहरीकए–तालिबान–ए–पाकिस्तान दिन ब दिन ताकतवर होती जा रही है और अमरीकी ड्रोन हमले भी उसे कमजोर नहीं कर पा रहे हैं। अमरीका ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि अफगान युद्ध जीतना उसके लिए संभव नहीं है और अब वह "शरीफ तालिबानियों" से बातचीत के लिए तैयार है। अमरीका की कमजोरी पूरी दुनिया के सामने आ गई है। इसके पहले, वियतनाम में भी अमरीका के बड़ेबड़े दावों का खोखलापन उजागर हो गया था। वियतनाम जैसे छोटे व गरीब देश से अमरीकी फौजों को अपमानित होकर वापस जाना पड़ा था। वियतनामियों के मनोबल को अमरीका तोड़ न सका। फौजी ताकत कभी लोगों की आतंरिक शक्ति, उनके मनोबल को नहीं तोड़ सकती।
भारत भी 9/11 के परिणाम भोग रहा है। जबसे अमरीका ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान व ईराक में आतंकवाद का निर्यात किया है, तब से भारतविरोधी आतंकी संगठन भी सक्रिय हो गए हैं और भारत पर आतंकी हमले कर रहे हैं। 26/11 का हमला इसी सिलसिले का हिस्सा था। भारत में हो रहे आतंकी हमलों के पीछे आतंरिक कारण भी हैं परंतु इसमें कोई संदेह नहीं कि 9/11 और उसके बाद अमरीका द्वारा किए गए हमलों के कारण पाकिस्तानस्थित आतंकी मशीनरी और ताकतवर बनकर उभरी है।
इन आतंकी हमलों, विशेषकर 9/11 व इस्लाम को लगातार आतंकवादियों का धर्म बताए जाने का एक सुखद परिणाम यह हुआ कि मध्यपूर्व के कुछ देशों के मुसलमानों ने यह तय किया कि वे दुनिया के सामने यह साबित करेंगे कि वे भी प्रजातंत्र और स्वतंत्रता से प्यार करते हैं और उन्होंने पूरी तरह अहिंसक रास्ते पर चलकर यह साबित किया भी। इस घटनाक्रम, जिसे "अरब में वसंत" भी कहा जा रहा है, ने इस झूठ को दफन कर दिया है कि इस्लाम हिंसा का धर्म है और सभी मुसलमान जेहादी हैं।

डॉ़ असगर अली इंजीनियर
समाप्त

1 टिप्पणी:

Tarkeshwar Giri ने कहा…

अच्छा लगा