मंगलवार, 6 सितंबर 2011

बृजलाल जी : पुलिस है या डकैत

उत्तर प्रदेश में कानपुर जनपद के पलकी सी ब्लाक नाहर पुल के पास जेब्रा मोबाइल के दो सिपाहियों ने ट्रक के क्लीनर को मात्र 50 रुपये की वसूली को लेकर पीट-पीट कर मार डालाजेब्रा मोबाइल के सिपाहियों ने ट्रक के ड्राईवर इरशाद को वसूली के लिये पीटना प्रारंभ कर दिया तो उसे बचाने के लिये ट्रक का क्लीनर 35 वर्षीय सियाराम कुशवाहा दौड़ा तो दोनों सिपाहियों ने उसे पीट-पीट कर मार डालादोनों सिपाही लाल सिंह और सुरेन्द्र के खिलाफ ट्रक ड्राईवर ने पलकी थाने में ऍफ़.आई.आर दर्ज कराई
उक्त ट्रक का नंबर एच आर 38 बी 0728 है जिससे दस मिनट पहले पलकी ब्लाक रोड पर तैनात सिपाहियों ने एंट्री के नाम पर 50 रुपये ले लिये थे ट्रक 500 मीटर भी नहीं चला होगा की जेब्रा मोबाइल के सिपाहियों ने उसे रोक लिया और फिर 50 रुपये मांगने लगे प्रदेश में लगभग हर चौराहों पर यही स्तिथि हैविभाग के उच्चाधिकारी चाहे जो कहें लेकिन वस्तुस्तिथि यह है कि चौराहे-चौराहे वर्दी पहन कर राहजनी हो रही हैउत्तर प्रदेश .डी.जी.पी कानून व्यवस्था बृजलाल सरकार की प्रतिनिधि की हैसियत चाहे जो स्टेटमेंट जारी करते हैं लेकिन पुलिस विभाग से ही सबसे ज्यादा अपराध हो रहे हैं और समुचित कार्यवाई नहीं हो पा रही है राजधानी लखनऊ क्राईम ब्रांच में तैनात सिपाही जावेद ने रायबरेली जनपद के लालगंज कोतवाली अंतर्गत ढाबे पर जमकर उधम मचाया और असलहों से फायरिंग की इसके पूर्व जावेद सिपाही पुलिस अधिकारीयों की नाक का बल था और रायबरेली जनपद में ही स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप का सदस्य थास्पेशल ऑपरेशन ग्रुप पुलिस अधीक्षक से जुड़ा हुआ ग्रुप होता है

सुमन
लो क सं घ र्ष !

4 टिप्‍पणियां:

रविकर ने कहा…

लो क सं घ र्ष ! पर मेरी टिप्पणी

कोतवाल ने रोक ली, इक गरीब की लाश |
कोचवान से मांगता, खाने को कुछ मांस |

खाने को कुछ मांस, राम-लखन का वास्ता |
अखिलेश्वर भी नहीं, कराता उन्हें नाश्ता |

पर माया तू जान , न गली पुलिस की दाल |
अन्नाजन को देख, दुम दाब भगा कुत्त्वाल ||

Vijai Mathur ने कहा…

शायद यह आनना आंदोलन का ही प्रभाव है कि,पुलिस ने रिश्वत का रेट दोगुना कर दिया है। पुलिस की अपनी रिश्वत के साथ अन्ना जी का कमीशन भी बेचारे सिपाहियों को ही तो वसूलना पड़ता है।

Vijai Mathur ने कहा…

शायद यह आनना आंदोलन का ही प्रभाव है कि,पुलिस ने रिश्वत का रेट दोगुना कर दिया है। पुलिस की अपनी रिश्वत के साथ अन्ना जी का कमीशन भी बेचारे सिपाहियों को ही तो वसूलना पड़ता है।

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