शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

पंडित नेहरु और सार्वजानिक क्षेत्र में धोखाधड़ी

सार्वजानिक क्षेत्र के बारे में भी बहुत संक्षेप में कुछ कहना जरूरी है। सार्वजानिक क्षेत्र के उपक्रम हमारी नयी विकसित होती अर्थव्यवस्था की मॉस-पेशियों हैं। बेशक ये ठीक ही कहा गया कि वे ही समाजवाद नहीं हैं लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि वे हमारी उम्मीदें हैं। और हमारे सार्वजानिक क्षेत्र के उपक्रम भला कैसे चलाये जा रहे हैं ? उन्हें चलाने की जिम्मेदारी सेवानिवृत्त हो चुके, नाकाबिल अधिकारीयों को दी हुई है। जो अधिकारी किसी भी अन्य विभाग के लिये नाकाबिल समझे जाते हैं उन्हें सार्वजानिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रबंधक पद के लिये पूरी तरह काबिल मान जाता है। और ये अधिकारी इस प्रबंधन का पूरा सत्यानाश करते हैं।
श्रीमान, मै पूरे विश्वास और जिम्मेदारी के साथ आपको बता रहा हूँ कि इन अधिकारीयों ने खुद प्रधानमंत्री का मखौल बनाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी।
कुछ ही महीनो पहले प्रधानमंत्री जी खूब जोर-शोर के साथ भोपाल में बिजली की मोटरों का भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स (भेल) में उत्पादन का उद्घाटन करने आये थे। मै दावे के साथ कह रहा हूँ कि जो भोपाल भेल में बना बताया गया, उसमें कोई पुर्जा, कोई हिस्सा, यहाँ तक कि एक कील तक भी भोपाल में बनी हुई नहीं थी। लेकिन चूँकि वक्त पर काम ख़त्म दिखाना था इसलिए ये बदमाशी की गयी। सम्बंधित अधिकारीयों को साबित करना था कि उन्होंने दिए हुए वक्त में काम पूरा कर दिया वर्ना उनकी नौकरी चली जाती।
इसलिए इंग्लैंड में बनी हुई मोटरें लायी गयीं और उन्हें सिर्फ भोपाल हैवी इलेक्ट्रिकल्स में पेंट किया गया, उन पर रातों-रात लेबल बदला गया ताकि वे भोपाल में बनी दिखाई जा सकें और वहीँ मोटरें प्रधानमंत्री जी को दिखाई गयी जिनका उन्होंने अगले दिन जोरदार गाजे-बाजे के साथ उद्घाटन किया।
जिन कर्मचारियों ने रात में उन मोटरों को पेंट किया था, उन्ही कर्मचारियों को प्रधानमंत्री जी ने ये भाषण भी दिया कि उन्हें इन मशीनों को भोपाल में बनाये जाने पर गर्व है। वे कर्मचारी मुंह छिपाकर कनखियों से एक-दूसरे को देखते हुए हंस रहे थे और अधिकारीयों पर भी। मै ये घटना पूरी जिम्मेदारी के साथ बयान कर रहा हूँ।

पंडित जवाहर लाल नेहरु ने भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स भोपाल का उद्घाटन 6 नवम्बर 1960 को भोपाल में किया था उसके बाद कम्युनिस्ट सांसद होमी दाजी ने संसद के अन्दर उक्त भाषण दिया थायह भाषण पेरिन दाजी की किताब "यादों की रौशनी में" संपादक विनीत तिवारी से साभार लिया गया है

3 टिप्‍पणियां:

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

"कुछ ही महीनो पहले प्रधानमंत्री जी खूब जोर-शोर के साथ भोपाल में बिजली की मोटरों का भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स (भेल) में उत्पादन का उद्घाटन करने आये थे। मै दावे के साथ कह रहा हूँ कि जो भोपाल भेल में बना बताया गया, उसमें कोई पुर्जा, कोई हिस्सा, यहाँ तक कि एक कील तक भी भोपाल में बनी हुई नहीं थी। लेकिन चूँकि वक्त पर काम ख़त्म दिखाना था इसलिए ये बदमाशी की गयी।"


उसी परिपाटी पर कौंग्रेस और उनके आला अफसर आज भी चल रहे है ! बेवकूफ बनाने के सिवाए इन्होने देश को खास दिया क्या है ?

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

G.N.SHAW ने कहा…

यह घटना उस समय हुयी थी , आज कल सभी सरकारी क्षेत्रो में व्यसन बनता जा रहा है ! अच्छी पोल खोली आपने ! बधाई