सोमवार, 16 अप्रैल 2012

महान क्रांतिकारी महावीर सिंह


.लोग भगत सिंह के साथ रहे क्रांतिकारी महावीर सिंह के बारे में शायद कम ही जानते होंगे | महावीर सिंह का जीवन संघर्ष और उसमे उनके पिता का उत्कृष्ट प्रेरणादायक योगदान आज के पिताओं ,पितामहो के लिए भी शिक्षाप्रद है |क्योंकि वर्तमान दौर के पिताओं का लक्ष्य अपने बेटो ,पोतो को धन ,पद -प्रतिष्ठा और पेशो की उंचाइयो पर येन -केन प्रकारेण चढाना हो गया है |अगर महावीर सिंह और उनके पिता जैसे लोगो के त्याग -बलिदान के फलस्वरूप हमारे राष्ट्र व समाज को कुछ अधिकार मिले थे व मिले है ,तो साम्राज्वाद की वर्तमान विश्वव्यापी चढ़ता -बढ़ता और पितामहो व पिताओं तथा बेटे -बेटियों की निरी स्वार्थी मनोदशाए राष्ट्र व समाज के खासकर बहुसंख्यक जन साधारण के वर्तमान व भविष्य को संकटग्रस्त भी जरुर करेगी |
                      महावीर सिंह का जन्म 16 सितम्बर 1904 के दिन शाहपुर टहला नामक एक छोटे से गाँव में हुआ था |यह गाँव उत्तर प्रदेश के एटा जिले में है |पिता कुंवर देवी सिंह अच्छे वैद्ध थे और आस -पास के क्षेत्र में उनका अच्छा प्रभाव था |माता श्रीमती शारदा देवी सीढ़ी -सादी एक धर्मपरायण महिला थी |महावीर सिंह की प्रारंभिक शिक्षा गाँव के ही स्कूल में हुई और उन्होंने हाईस्कूल परीक्षा पास की गवर्मेंट कालेज एटा से |
बगावत की भावना महावीर सिंह में बचपन से ही मौजूद थी और राष्ट्र -सम्मान के लिए मर -मिटने की शिक्षा उन्होंने अपने पिता से प्राप्त की थी |घटना जनवरी सन 1922 की है |एक दिन कासगंज तहसील (जिला एटा ) के सरकारी अधिकारियों ने अपनी राजभक्ति प्रदर्शित करने के उद्देश्य से अमन सभा का आयोजन किया | ज़िलाधीश , पुलिस कप्तान ,स्कूलों के इंस्पेक्टर ,आस -पड़ोस के अमीर -उमरा राय बहादुर ,खान बहादुर आदि जमा हुए | छोटे -छोटे बच्चो को भी जबरदस्ती ले जाकर सभा में बिठाया गया |उनमे महावीर सिंह भी थे |लोग बारी -बारी उठकर अंग्रेजी हुक़ूमत की तारीफ़ में लम्बे -लम्बे भाषण दे रहे थे |तभी बच्चों के बीच से किसी ने जोर से से नारा लगाया 'महात्मा गांधी की जय '!बाकी लड़कों ने भी उसके स्वर मिलाकर ऊँचे कंठ से समर्थन किया 'महात्मा गांधी की जय '! देखते -देखते गांधी विरोधियों की वह सभा गांधी की जय जय कार के नारों से गूँज उठी |जांच के फलस्वरूप महावीर सिंह को विद्रोही बालको का नेता घोषित कर दिया गया |सजा भी मिली पर उससे उनकी बगावत की भावना और भी मजबूत हो गयी |
1925 में जब वे कालेज पढने के लिए कानपुर आये तो असहयोग आन्दोलन समाप्त हो चुका था लेकिन देश की जनता के दिलो की आग ठंडी नही हुई थी |चारो ओर असंतोष की आग सुलग रही थी |स्वत:स्फुरित संघर्षो के रूप में किसानो की बगावते जारी थी |मजदुर तथा मध्यम वर्ग के लोग भी अपने -अपने तरीको से लड़ रहे थे |नौजवानों की क्रांतिकारी टोलियों ने फिर से हथियार उठा लिए थे |परिस्थितियों ने महावीर सिंह को अछूता नही छोड़ा |कालेज में क्रांतिकारी दल से उनका सम्पर्क हुआ और वे उसके सदस्य बन गये |
उसी दौरान महावीर के पिता जी ने उनकी शादी तय करने के सम्बन्ध में उनके पास पत्र भेजा |पत्र पाकर वे चिंतित हुए |क्रांतिकारी साथियो से सलाह मशवरा किया |फिर उसी अनुसार पिता जी को राष्ट्र की आजादी के लिए क्रांतिकारी संघर्ष पर चलने की सूचना देते हुए शादी -व्याह के पारिवारिक संबंधों से मुक्ति देने का आग्रह किया |चंद दिनों बाद पिता का उत्तर आया |उन्होंने लिखा कि '' मुझे यह जानकर बड़ी ख़ुशी हुई कि तुमने अपना जीवन देश के काम में लगाने का निश्चय किया है |मैं तो समझता था कि हमारे वंश में पूर्वजों का खून अब नही रहा और उन्होंने दिल से गुलामी कबूल कर ली है |तुम्हारा पत्र पाकर आज मैं अपने को बड़ा भाग्यशाली समझ रहा हूँ |शादी की बात जहा चल रही थी ,उन्हें जबाब लिख दिया है |निश्चिन्त रहो ,मैं ऐसा कोई काम नही करूंगा जो तुम्हारे मार्ग में बाधक हो |
देश कि सेवा का जो मार्ग तुमने चुना है वह बड़ी तपस्या का और बड़ा कठिन मार्ग है लेकिन जब तुम उस पर चल ही पड़े हो तो पीछे न मुड़ना ,साथियो को धोखा मत देना और अपने बूढ़े पिता के नाम का ख्याल रखना | तुम जहा भी रहोगे मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है ..............तुम्हारा पिता .देवी सिंह
क्रांतिकारी गतिविधियों में लगातार लगे रहे महावीर सिंह लाहौर में बुरी तरह बीमार पड़े |वे संग्रहणी व पेचिश से परेशान थे |कुछ भी हजम नही हो पा रहा था |साथियो ने राय दी कि कुछ दिनों के लिए एटा चले जाओ |तुम पर तो वारंट नही है |ठीक हो जाने पर वापस चले आना |महावीर ने साथियो से कहा कि -क्या पिता जी कि चिट्ठी उन्हें याद नही है |उन्होंने स्पष्ट लिखा था कि पीछे मुड़कर मत देखना उसमे घर का माया -मोह आदि सब शामिल था और उन्होंने वे शब्द बहुत सोच -समझ कर लिखे थे |फिर साथियों से हंस कर बोले -चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा |इसी बीच लाहौर में पंजाब बैंक पर छापा मारने कि योजना बनी |पहले दिन साथी बैंक पर भी गये |लेकिन महावीर सिंह को जिस कार द्वारा साथियों को बैंक से सही -सलामत निकाल कर लाना था वही ऐसी नही थी कि उस पर भरोसा किया जा सकता |अस्तु भरोसे लायक कार न मिलने तक के लिए योजना स्थगित कर दी गयी |तभी लाहौर में साइमन कमिशन आया |'साइमन कमीशन वापस जाओ " के नारों के साथ काले झंडे के एक विराट प्रदर्शन से उसका स्वागत किया गया |फिर अंधाधुंध लाठिया बरसी ,लाला जी आहत हुए और कुछ दिनों में उनकी मृत्यु हो गयी |यह राष्ट्र के पौरुष को चुनौती थी और क्रान्तिकारियो ने उसे सहर्ष स्वीकार कर लिया |बैंक पर छापा मारने कि योजना स्थगित कर दी गयी और लाला जी पर लाठियाँ बरसाने वाले पुलिस अधिकारी को मारने का निश्चय किया गया |उस योजना को कार्यान्वित करने में भगत सिंह आजाद तथा राजगुरु के साथ महावीर सिंह का भी काफी योगदान था |
  क्रमश:
- सुनील दत्ता .
पत्रकार

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