मंगलवार, 21 अगस्त 2012

बुद्धि की झोरिया : कहाँ टांग दिहो

आज कल घटित हो रही घटनाओ से यह लग रहा है कि अफवाहबाजों तथा कट्टरपंथियों की हरकतों से देश की एकता और अखंडता को जबरदस्त खतरा हैमहाराष्ट्र सहित दक्षिण भारत में रह रहे पूर्वोत्तर राज्यों के नागरिकों को जिस तरह अफवाहबाजों की हरकतों के कारण पलायन करना पड़ा वह अद्भुद है इससे यह कहीं भी नहीं प्रतीत हुआ की हमारे समाज में वैज्ञानिक सोच का भी कहीं विकास हुआ हैसमय-समय पर कथित धार्मिक कट्टरवादी अफवाहों के माध्यम से गणेश को दूध पिलाने से लेकर तरह-तरह के प्रयोग करते रहते हैं और सरकारी तंत्र जबतक चले चलाये जाओ वाली स्तिथि में मूक रहता हैसमाज के जिम्मेदार प्रबुद्ध लोग इस वजह से चुप रहते हैं कि कहीं उनके बोलने से उनकी शरीफाना छवि को धक्का लग जायेशरीफाना का मतलब यह होता है कि जो व्यक्ति गलत को गलत कह सके और सही को सही वही सबसे शरीफ व्यक्ति होता हैजर्मन नाजीवाद से प्रेरित विचारधारा के लोग इन्टरनेट से लेकर मीडिया तक में जाति, धर्म, प्रांतीयता, क्षेत्रिययता, भाषा के सवाल को लेकर नफरत फ़ैलाने के अलावा कोई कार्य नहीं करते हैं और आज कल यही लोग अमेरिकन साम्राज्यवाद की विचारधारा की सेवा में हैं जो इस देश की एकता और अखंडता को नष्ट करना चाहते हैं
मुंबई में असाम म्यांमार की दुर्भाग्यशाली घटनाओ को लेकर धरना प्रदर्शन होता है और उसके बाद तोड़ फोड़ की घटनाएं शुरू हो जाती हैंयह इस बात का प्रतीक है की तालिबानी तबका भारतीय समाज में अपना घर मजबूत बना रहा है और हद की सीमाएं टूट जाती हैं कि सरकारी तंत्र चुप चाप उनकी गुंडागर्दी को बर्दाश्त करता रहता है और पिटता भी हैलखनऊ में अलविदा की नमाज पढ़कर लोग निकले उनके हाथ में तलवारे थीं और जेबों में पत्थर थे और उन्होंने गौतम बुद्ध की मूर्ति तोड़ दी, आग लगनी शुरू कर दी, कई हजार पुलिस के जवान और प्रशासनिक अफसर चुपचाप तमाशा देखते रहेसवाल यह उठता है कि अलविदा की नमाज पढने गए लोग ऊपर वाले से प्रार्थना करने गए थे या तलवार, पत्थर, चाकू लेकर युद्ध करने की तैयारी के साथ गए थेइस बात का कोई भी जवाब इन लोगों के पास नहीं हैवहीँ राजनीतिक लोगों की स्तिथि यह है कि वोट बैंक गड़बड़ाने पाए इस वजह से वह कुछ भी बोलने की स्तिथि में नहीं रहते हैंअभी कुछ दिन पूर्व मायावती की मूर्ती तोड़ दी गयी थी जिस पर मायावती की पार्टी ने आन्दोलन खड़ा कर दिया जिस पर 24 घंटे के अन्दर उनकी नयी मूर्ती स्थापित कर दी गयी किन्तु गौतम बुद्ध की कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है इसलिए उनकी मूर्ति पुन: स्थापित हो पाई और ही अखिलेश यादव की सरकार ने कोई नोटिस ही लिया और सरकार उन अराजक तत्वों को बचाने की कोशिश में है
इन सब घटनाओ से यह पता लगता है कि समाज में हिन्दुवत्व वादी तालिबानी संस्कृति की जडें कितनी गहरी हो गयी हैं कि वह देश की एकता और अखंडता के लिये खतरा हैं और आम जनता की बुद्धि की झोरिया कहाँ खो गयी है यह मालूम ही नहीं देता है या कहाँ टांग दी गयी है कि जो वैज्ञानिक चीजों को भी समझ नहीं पाती हैहमें सावधान रहना चाहिए अफवाहबाजों से इन कट्टर पंथियों से

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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