मंगलवार, 2 अक्तूबर 2012

लम्पट तत्वों से भरा है आइ ए एस कैडर

उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा सचिव शशि भूषण लाल सुशील को बलात्कार की कोशिश में राजधानी लखनऊ में गिरफ्तार किया गया और जी आर पी प्रभारी निरीक्षक अनिल राय को बहाना बनाकर निलंबित भी कर दिया गया। अनिल राय का दोष यह था की वह सम्पूर्ण प्रकरण को दबा नहीं पाए और एक आइ ए एस को जेल जाना पड़ा। जिससे आइ ए एस कैडर की तौहीन हो गयी लेकिन वास्तविक आत्मनिरीक्षण करने की भी जरूरत है। इससे पूर्व मध्य प्रदेश में ज्ञानेश्वर पाटिल इससे भी शर्मनाक मामले में निलंबित हो चुके हैं। नैतिकता विहीन जिम्मेदारी से मुक्त ये प्रशासनिक अफसर पहले भी यह सब करते रहे हैं। ब्रिटिश कालीन भारत में इस कैडर का नाम आइ सी एस था इसके अधिकांश अधिकारी अंग्रेज होते थे और यह शीत कालीन  ग्रीष्म कालीन शिविर के नाम पर रंगरलियाँ मनाया करते थे। राजा, महाराजा, जमींदार, सामंत भडुवागिरी की भूमिका निभाते थे. आज भी उनकी भूमिका में कोई सुधार नहीं हुआ है। राजा, महाराजाओं की जगह समाज के दलाल तबके ने ले ली है। कार्य सभी जारी हैं, देश में विकास हुआ है, धन बढ़ा  है तो धन की लूट भी बढ़ी है। लूट का एक निश्चित हिस्सा कमीशन के रूप में भारतीय प्रशासनिक अधिकारीयों का भी होता है।
                 उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव, अखंड प्रताप सिंह, जैसे अधिकारी कारागार हो आये हैं।  टॉपर अधिकारी प्रदीप शुक्ल भ्रष्टाचार के आरोप में कारागार से रिहा होकर आये हैं। इस कैडर पर कोई विशेष नियंत्रण नहीं है। आय से अधिक संपत्ति कानून के ये अधिकारी दोषी हैं लेकिन इस व्यवस्था में और राजनीतिक दलों की स्तिथि भ्रष्टाचार के मामले में इनसे ज्यादा ख़राब होने के कारण कुछ किया नहीं जा सकता है। यदि इमानदारी से जांच करा ली जाए तो इस कैडर का नब्बे प्रतिशत अधिकारी देश के विभिन्न कारागारों में आराम करता नजर आएगा।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

1 टिप्पणी:

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

मनुष्य में कुछ मनोवृत्तियां होती हें और जिन्हें चाहे वह आई ए एस बन जाये या फिर बड़ा मंत्री, या उससे भी बड़ा जनसेवक उन्हें छोड़ नहीं पाता है. पकड़े कम ही जाते हें और अगर कोई सिर उठा भी ले तो फिर पहले से उससे निपटने के लिए अपने तरीके अपनाते हें और न सफल हुए और किसी दबंग के चंगुल में फँस गए तो फिर यही हश्र होता है. अभी क्या हुआ? कुछ दिन बाद बाइज्जत बरी हो जाएँ तो कोई बड़ी बात नहीं.