शुक्रवार, 26 अक्तूबर 2012

गिरफ्तारी के आठ माह बाद लगाया गया चार्ज

बाराबंकी। कचेहरी बम काण्ड धमाका केस के मुकदमा की कार्यवाही शुरू से ही ऐसी रही कि अभियुक्तों को सजा से पहले ही सजा मिल जाए। कोर्ट का कार्य ऐसा रहा कि अभियुक्तों के खिलाफ चार्ज गिरफ्तारी के आठ माह बाद लगाया गया। इस दौरान अभियुक्तों को जेल काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिसकी जानकारी अभियुक्तों ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश मायावती को जेल से भेजे गए पत्र में भी किया गया है।
अभियुक्तों के वकील रणधीर सिंह सुमन एडवोकेट के अनुसार 22 दिसम्बर 2007 को बाराबंकी जेल में पहला जुडिशियल रिमाण्ड उस समय के सी0ओ0सिटी दयाराम सरोज ने विवेचक अधिकारी के तौर पर सी0जे0एम0 से इन्हे जेल में बुलाकर किया। लेकिन जब जेल से सूचना अधिकार अधिनियम के तहत ये सूचना मांगी गयी कि सी0ओ0सिटी दयाराम सरोज 22दिसम्बर को जेल के अन्दर गए थे तो वहां से उत्तर मिला कि नही। यानि सी0ओ0सिटी का बयान गलत निकला किन्तु कोर्ट में कहीं भी दयाराम सरोज ने इस बात को नही कही कि उन्होने जेल में सी0जे0एम0की मौजूदगी में अभियुक्तों का जूडीाियल रिमाण्ड प्राप्त किया। सुमन एडवोकेट के अनुसार जेल में सी0जे0एम0 किस के आदो से रिमाण्ड लेने गयी इस बात की भी जानकारी कहीं भी मौजूद नही है। सुमन ने आगे बताया कि विवेचक अधिकारी दयाराम सरोज ने सी0जे0एम0 से अभियुक्तो के 164 दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत इकबालिया बयान दर्ज करने की प्रार्थना की। इस पर कोर्ट ने इनसे कहा कि बयान लिंक मजिस्ट्रेट ए0सी0जे0एम0 के यहां करा ले। किन्तु कोर्ट के आदो के बावजूद पुलिस ने अभियुक्तों के बयान नही कराए। सुमन के अनुसार ऐसा पुलिस ने इसलिए नही किया, ताकि अगर अभियुक्तों के बयान हो जाते तो फिर उनके 161 दण्ड प्रक्रिया संहिता के बयान की कलाई खुल जाएगी।
मुकदमें में पुलिस के विवेचक अधिकारी दयाराम सरोज सी0ओ0सिटी ने आर0डी0एक्स0 की बरामदगी लगभग 1.25 किग्रा दिखाई है जबकि उन्होने और उनके बाद मुकदमें के दूसरे विवेचक अधिकारी चिरंजीव नाथ सिन्हा ने कहीं भी इस बात का उल्लेख नही किया है कि बरामद आर0डी0एक्स0 का कहीं वजन कराया गया है। सुमन के अनुसार मुकदमें में सबसे मजेदार बात यह है कि अभियुक्तों की 22दिसम्बर 2007 को बाराबंकी से गिरफ्तारी दिखाने के बाद बाराबंकी पुलिस ने उनकी जूडीाियल रिमाण्ड उसी दिन लेने के बाद उन्हे जेल भेज दिया। लेकिन उसके बाद अभियुक्तों को लखनऊ जेल किसके आदो से भेजे गए इस बात का कहीं भी मुकदमें की फाइल में उल्लेख नही है। अभियुक्तों के घर वाले खालिद असलम निवासी अनूक थाना रानी की सरायं जिला आजमग़ (तारिक के ससुर) व जहीर आलम फलाही निवासी मोहल्ला महतवाना थाना व कस्बा मड़ियाहू जिला जौनपुर में मुख्यमंत्री मायावती को एक पत्र भेजकर उनसे निर्दोश तारिक कासमी व खालिद मुजाहिद की रिहाई की प्रार्थन की थी। और पुलिस, एस0टी0एफ0 तथा अन्य जाँच एजेन्सियों की भूमिका के बारे में जांच कराए जाने की अपील भी की थी।
अभियुक्तों के रिश्तेदारों ने अपने पत्र में लिखा था कि एक ओर मुकदमें के विवेचक अधिकारी दयाराम सरोज अपनी 22दिसम्बर की केस डायरी में यह लिखते है कि अभियुक्तों के शरीर पर कोई भी चोटे नही है। और अभियुक्तों से जब मेडिकल जांच कराने को कहा गया तो उन्होने मना कर दिया जबकि बाद में अभियुक्तों की मेडिकल जांच दोपहर 1 बजकर 50 मिनट पर जिला अस्पताल तारिक कासमी की हुई और 1:55 बजे खालिद मुजाहिद की किए जाने का उल्लेख अस्पताल रिकार्ड में और कोर्ट की फाइल में तो भी मौजूद जिसमें दोनो अभियुक्तों के भारीर पर चोटो का उल्लेख मौजूद है।
इस बात का भी तत्कालीन मुख्यमंत्री को लिखी गयी थी कि 22दिसम्बर 2007 को सुबह 6:20 बजे जब अभियुक्तों को गिरफ्तार करना बताया गया है तो गवाहान की तला रेलवे स्टोन से चार सौ मीटर दूर बस स्टैण्ड पर करन के बाद पुलिस के दस्ते बगैर स्थानीय गवाहो के ही अभियुक्तों को गिरफ्तार करने जा पहुँची फिर इसके दूसरे दिन अर्थात 23दिसम्बर 2007 को जनता के दो गवाह विवेचक अधिकारी को मिल गए जिसमें एक विवनाथ होटल के मालिक में से एक रूपो गुप्ता उर्फ बच्चू है और दूसरे राम कयप एक दुकानदार है। दोनो की गवाही में इस बात का कहीं उल्लेख नही है कि इन्होने अभियुक्तों को अपनी आँखों से गिरफ्तार होते हुए देखा है। दोनो ने यही बताया है जब वह सुबह आठ बजे अपनी दुकान के करीब से गिरफ्तार किया है। इसमे सबसे मजेदार बात यह है कि विवनाथ की दुकान सुबह छः बजे के करीब खुल जाती है और रूपो के बजाय इसका बड़ा भाई गिरीश दुकान खोलता है। रूपो छाया चौराहे के पास इन्दिरा मार्केट में सरस्वती स्वीट हाउस की दुकान सुबह खोलने जाता है। अभियुक्तों के रितेदारों ने इस बात की भी उल्लेख किया तत्कालीन मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में किया था। विवेचक अधिकारी तारिक कासमी के कब्जे से बरामद बस टिकट और साइकिल स्टैण्ड की पर्ची का उल्लेख अपनी फर्द में किया है। लेकिन यह कहीं उल्लेख नहीं है कि मोटर साइकिल किस गवाह के सामने साइकिल स्टैण्ड पर 16दिसम्बर 2007 को रखी गई और साइकिल स्टैण्ड की पर्ची पर सिर्फ नम्बर 030719 पड़ा है और मोटर साइकिल का मेक स्पलेण्डर लिखा हुआ है। इसके अलावा घर से बरामद किए गए दो मोबाइल सेटों में ई0एम0आई नम्बर 3536320159083 और 355519018975300 लिखा हुआ है। पुलिस ने इस बात का दावा किया है कि इन दोनो मोबाइलों को किसने 18दिसम्बर 2007 को 18:17:37 के बाद 22दिसम्बर को 14:00:04 पर सट्टी बाजार बारबंकी और 23दिसम्बर को 13:41:09 को सरस्वतीपुरम से बात होना काल डिटेल रिकार्ड में दिखाया गया है। इसी तरह ई0एम0आई0नम्बर 355519018975300 से 22दिसम्बर 2007 को 13:40:24 तक बात करना काल डिटेल में बताया गया है। इससे साफ पता चलता है कि दोनों के मोबाईल तारिक कासमी के घर पर बरामदगी के समय मोहर बन्द नही किए गए बल्कि इनसे बराबर 22 तथा 23दिसम्बर 2007 को बात की जाती रही।

खालिद 

तारिक 

  -मुहम्मद तारिक खान
     अनुवादक -नीरज वर्मा एडवोकेट
        (इंकलाब से साभार)

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