गुरुवार, 4 अक्तूबर 2012

अदालत में भी मारा पीटा गया


    मैं मु0 याकूब पुत्र श्री अब्दुल सलाम निवासी ग्राम तारापुर थाना बदापुर तहसील नगीना जिला बिजनौर यू.पी.एस.टी.एफ. द्वारा लगाए गए झूठे मुकदमों में 5 साल से जिला कारागार लखनऊ में निरुद्ध हूँ। मैं एक अकेला और मेरी 5 बहिने हैं। पत्नी और चार छोटे-छोटे बच्चे व एक 70 साल के बूढ़े बीमार पिता हंै। मेरा सम्बन्ध निर्धन परिवार से है। कुछ जमीन है उस पर खेती करते हैं, कुछ समय मजदूरी करके जीवन यापन करता हूँ। मेरी गिरफ्तारी के बाद मेरे बच्चे मोहताज हो गए, अपने घर के बारे में कुछ नहीं मालूम कैसे चल रहा है।
गिरफ्तारी
    मैं अपनी छोटी बेटी के लिए दवा लेने गया था। रेलवे स्टेशन पर सामने एक गाड़ी खड़ी थी। ड्राइविंग सीट पर बैठे आदमी ने मुझे अपने पास बुलाया। गाड़ी में 3-4 आदमी और थे। पहले उन्होेंने मेरा नाम पूछा और जबरदस्ती मुझे पकड़ कर
गाड़ी पर बैठा लिया। मुझे शोर मचाने तक मौका नहीं दिया। 10-15 मिनट के बाद सुनसान जगह पर ले गए। वहाँ मेरी तलाशी ली, मेरे पास मोबाइल फोन था। 560 रूपये थे। दवा का पर्चा था। वह सब ले लिए जब मैंने विरोध किया तो मुझे मारने पीटने लगे। मैं बहुत घबरा गया। उन्होंने बताया हम पुलिस वाले हैं तुमसे पूछताछ करनी है इसलिए अपने साथ लाया हूँ। उन्होंने मेरी आँखों पर पट्टी बांध दी। हाथ पैर बांध कर जानवर की तरह से गाड़ी की पिछली दोनों सीटों के बीच में डाल दिया। कई घन्टे के सफर के बाद पहले मुझे एक कमरे में बन्द कर दिया। बाद में कुछ लोग और आ गए। मुझे वह सब आफिस में ले गए जहाँ लैपटाॅप और कम्प्यूटर आदि लगे हुए थे। ये वास्तव में यू.पी.एस.टी.एफ. का आफिस था पूछताछ का सिलसिला आरम्भ किया। बचपन से लेकर आज तक सब कुछ पूछ डाला। वह बराबर जोर देकर पूछ रहे थे कि क्या तू देवबन्द में पढ़ा है। कितनी बार तू पाकिस्तान ट्रेनिंग के लिए गया है और तू किस आतंकवादी संगठन से सम्बन्धित हैं। जब मैंने इन सब से अपने को अज्ञात बताया तो मुझे बहुत मारा पीटा। मुझे उल्टा लटका दिया जाता। मेरे मुँह पर भीगा कपड़ा रखा जाता। साँस लेने में कपड़ा मुँह में घुस जाता। मुँह से खून निकलने लगता, जब मैं बेहोश हो जाता तो मुझे पुनः होश में लाते और यही सिलसिला शुरू करते। मुझसे कहा जाता तुम्हारे घर वालों का भी यही हाल हम करेंगे। तुम्हारी बीबी को सबके सामने बेइज्जत करेंगे। आखिर में मैं बेबस हो गया और कहा मुझे क्या करना होगा? हम हर बात मानने को तैयार हैं? तब मुझे तत्कालीन एस.टी.एफ. के आई0जी0 या डी0आई0जी0 शैलजाकांत मिश्र के पास ले जाया गया, शैलजाकांत मिश्र द्वारा मुझे धमकी दी गई कि हम तेरी और तेरे घर वालों की जान बख्श देंगे बस जैसा हम कह रहे हैं वैसा ही कहते जाना नहीं तो हश्र बुरा होगा। फिर नहला धुलाकर 20 तारीख को कुछ गोला बारूद के साथ आतंकवादी के रूप में मीडिया के सामने लाया गया। मुझे डी0जी0पी0 आफिस ले जाया गया। वहाँ इलेक्ट्रानिक मीडिया के सामने मेरा झूठा बयान टेप कराया गया। वहाँ लखनऊ जेल में बंद कर दिया गया। दो हथियार बन्द वहाँ बैठा दिए गए। वहाँ न बिजली न पानी बदबूदार कमरा बहरहाल मैं वहाँ पर रहा। फिर मुझे बयान के लिए निकाला गया। एस.टी.एफ. की मौजूदगी में कागजी कार्यवाही पूरी की गई। शाम 3 बजे कोर्ट ले जाया गया। जज ने कहा सब कुछ सही-सही बता दो। हम तुम्हारा कुछ नहीं कर सकते। हमने पूरी कहानी सुना दी। नतीजा कुछ नहीं निकला अदालत में भी साजिश के तहत मारपीट हुई। जेल परिसर मेंएक कमरे को न्यायालय का रूप दिया गया। वहीं पर मेरा मुकदमा चल रहा है। वकील भी वहाँ जाते कतराते हैं। मात्र तारीख मिल जाती है। पिछले 5 सालों से नारकीय जीवन काट रहा हूँ। मेरे सामने मेरी धार्मिक पुस्तक कुरान शरीफ को जलाया गया। विरोध प्रदर्शन हुआ। केवल शांति बनाए रखने के लिए बन्दी रक्षक का और जेलर का तबादला किया गया। हमेशा बन्द रखा जाता था। हमंे भूख हड़ताल करनी पड़ी। बड़ी मुश्किल से 27 जनवरी 2009 दोपहर 2 बजे से खोलना शुरू किया गया। 5 साल से हम सब यही झेलते चले आ रहे हैं। यू.पी.एस.टी.एफ. द्वारा मेरा रिमाण्ड लेने के लिए 2 बार कोशिश की गई। मगर दोनों बार रिमाण्ड के लिए लगाई गई अर्जी खारिज कर दी गई।
लोकसंघर्ष पत्रिका सितम्बर 2012 अंक में प्रकाशित

2 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

बेनामी ने कहा…

SARE HINDU AATANKVAADI HAIN JI MUSLIM TO MAASOOM FARISHTE AUR AAZAMGARH UNKA DIVINE PLACE HAI