गुरुवार, 15 नवंबर 2012

डर है या वास्तविकता

मुंबई में शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे की तबियत अत्यधिक ख़राब है। प्रदेश सरकार से लेकर भारत सरकार तक चिंतित है कि  कहीं बाला साहेब की मृत्यु न हो जाए और मृत्यु के बाद मुंबई समेत महाराष्ट्र में दंगा फसाद न होने लगे। इस सदी के महानायक तथा बाराबंकी जनपद में जमीन की जालसाजी में लिप्त रहे श्री अमिताभ बच्चन का कुर्ता फाड़ कर मार पिटाई उस वक्त की गयी है जब वह बाला साहेब को देखने उनके निवास गए थे . प्राप्त समाचारों को देखने के बाद यह प्रतीत होता है कि बॉलीवुड के अधिकांश अभिनेता बाला साहेब के स्वास्थ्य को लेकर विशेष रूप से चिंतित हैं। उद्योगपति भी उनको देखने विशेष रूप से जा रहे हैं। इन समाचारों का विश्लेषण करने से यह भी अनुभव होता है कि बाला साहेब की न्यूसेंस वैल्यू की धमक के डर से लोग ज्यादा अपने को व्याकुल दिखा रहे हैं। मुंबई में कर्फ्यू जैसे द्रश्य अगर देखने को मिल रहे हैं तो उसके पीछे डर ही काम कर रहा है। 
                     बाला साहेब कभी पाकिस्तान के साथ खेलों के खिलाफ रहे हैं तो कभी उत्तर भारतियों को महाराष्ट्र छोड़ने की धमकी देना, उनका प्रिय कार्य था। उग्र हिन्दुवात्ववादियों की वह पहचान थे। भारतीय समाज में मरणासन्न व्यक्ति को कुछ कहा नहीं जाता है और मरने के बाद भी उस पर टिपण्णी करना भी सभ्यता के खिलाफ माना  जाता है किन्तु इसके बावजूद यह भूला भी नहीं जा सकता है कि हजारों लोगों की हत्याएं जो पूर्णतया निर्दोष थे, महाराष्ट्र में होती रही हैं जो भाषा, प्रान्त, धर्म के नाम पर हुई हैं जिसका श्रेय  हिन्दू ह्रदय सम्राट बाला साहेब को जाता है और उनका डर महाराष्ट्र में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को था। शिव सैनिको का खौफ आज भी है और सरकार की नियत अगर साफ़ नहीं रही तो आगे भी जारी रहेगा। सभी परिस्तिथियों को देखने के बाद विधि का शासन व भारतीय संविधान का अर्थ महाराष्ट्र में शिव सैनिको के आगे नहीं था।

सुमन
लो क सं घ र्ष !


3 टिप्‍पणियां:

PPRA GROUP ने कहा…

ye tho dar hai

madhu singh ने कहा…

SHRANDHANJAI

बेनामी ने कहा…

Ek hain janab shahi imama jama maszid delhi k un k khilaaf suprem court ka gair zamanti varrant hai jo dharm nirpeksh govt. taameel nahi kara paai aaj tak. un k ugr muslimvaadk baare me aapka kya khayaal hai.