शुक्रवार, 16 नवंबर 2012

मिशन 2014 चूर चूर हो जाएगा


बाराबंकी। निमेष कमीशन ने जिला आजमगढ़ के थाना सराय मीर जाकर 7जुलाई 2009 को उस घटना स्थल की जांच की जहां से अभियुक्त तारिक कासमी को उठाने का आरोप तारिक कासमी और उसके घर वालों ने एस0टी0एफ0 पर लगाया था। इसी तरह कमीशन ने 6 जुलाई 2009 को जिला जौनपुर  के थाना मडि़याहू के तहत उस बाजार का भी मुआयना किया जहां से खालिद मुजाहिद को उठाने का आरोप खालिद मुजाहिद के घरवाले एस0टी0एफ0 पर लगा रहे है। दोनों घटना स्थलों से वहां के लोगो से पूछताछ की।
तारिक कासमी को गिरफ्तार करने की सनद कमीशन को जिन लोगो की गवाही से मिली उनमें कवंलधारी सिंह निवासी रानी की सरायं, हफीज निवासी रानी की सरायं रामायन निवासी रानी की सरायं, शाहआलम निवासी रानी की सरायं ,शमशाद अहमद एडवोकेट निवासी रानी की सरायं, तारिक शमीम निवासी रानी की सरायं, मौलवी असलम (तारिक कासमी के ससुर) अब्दुल शमीम, अरशद अब्दुल रहमान, मुहम्मद हारून, सर्फुद्दीन, शौकत अली, मुहम्मद आजम के नाम मुख्य रूप से है। उपरोक्त सभी लोगो ने कमीशन को ये बताया कि इन्होने 12 दिसम्बर 2007 के दिन या तो खुद अपनी आँखो से तारिक कासमी को थाना रानी की सरायं चेक पोस्ट के करीब दोपहर 12 बजे लखनऊ बलिया रोड पर घटना स्थल  मुहम्मदपुर से एक टाटा सूमो पर कुछ लागो ने जबरदस्ती उसको मोटरसाइकिल से उठाकर ले जाते देखा था और दो लोग उनकी मोटरसाइकिल नम्बर यू0पी0 50एन2943 पर बैठकर बनारस की तरफ चले गए थे उन्होने किसी न किसी से सुना था कि एस0टी0एफ0 के लोग उठा ले गए है।
             इसी तरह खालिद मुजाहिद को 12दिसम्बर 2008 को गिरफ्तार करने की बात जांच कमीशन को जिन लोगो से मिली उसमें कमला प्रसाद साहू, मुहम्मद मुस्लिम, राजेन्द्र प्रसाद, राजबली,फिरोज अहमद, राजेश कुमार, सुनील कुमार, सन्तोष कुमार, मन्नू चाट वाला( जिसकी दुकान से खालिद मुजाहिद को एस0टी0एफ0 के जरिए उठाए जाने की बात कही जा रही है),महताब आलम,चन्द्र मोहन यादव, इम्तियाज अहमद,निज़ामुद्दीन,फखरेआलम,जुल्फिकार,शकील अहमद, सईद आलम,जहीर आलम फलाही और मुहम्मद अनस, के नाम शामिल है। इसके अलावा सहाफी मुहम्मद  आरिफ , जो कि हिन्दी दैनिक अमर उजाला के प्रतिनिधि है और गुलाब चन्द केसरी, जोकि दैनिक हिन्दुस्तान के तहसील प्रतिनिधि है के भी बयान कमीशन ने दर्ज किए है।   
                   दोनो ही अभियुक्त तारिक कासमी व खालिद मुजाहिद की गिरफ्तारी की जांच गवाहों के बयान से कमीशन को मिली। निमेष कमीशन को इस  बात के भी प्रमाण मिले कि मदरसा जामिते अलसलहात वाक्या कस्बा व थाना मडि़याहू जहां खालिद मुजाहिद पढ़ाता था इसमें 12दिसम्बर को आखिरी बार इसने पढ़ाया था और मदरसा के रिकार्ड में इसकी गैर हाजिरी इस दिन के बाद से लिखी हुई है। फिर दोनो ही अभियुक्त के घर एस0टी0एफ0 ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर 18 दिसम्बर की दरमियानी शब को छापा मारकर तलाशी ली और इनके घर मंे मौजूद मज़हबी किताबें व दीगर सामान अपने कब्जे में ले लिए, जिसका जिकर स्थानीय पुलिस ने अपने रोजनामचे मंे भी किया है। साथ ही दोनो को अपनी हिरासत में रखकर इनसे सादे कागज पर हस्ताक्षर कराने  और उनके उंगलियों के निशान अपनी हिरासत में लगवाने के भी प्रमाण कमीशन को मिले। कमीशन ने दोनो ही अभियुक्त की गिरफ्तारी के बाबत 17दिसम्बर 2007,18दिसम्बर 2007, 20दिसम्बर 2007,21दिसम्बर 2007,22दिसम्बर2007 को बातरतीब अमर उजाला,हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण हिन्दी अख़बार में छपी खबरो का भी जायजा लिया। कमीशन ने सर्किल आफीसर मडि़याहू के इस जवाब का भी मुआयना किया जिन्होने अभियुक्त खालिद मुजाहिद के चचा जहीर आलम फलाही के सूचना अधिकार के तहत मांगी थी और जिसमंे सी0ओ0ने इस बात को स्वीकार किया है कि 12दिसम्बर 2007 की शाम साढ़े छःबजे एस0टी0एफ0ने खालिद मुजाहिद को मडि़याहू बाजार से गिरफ्तार किया है, लेकिन इसके मुतालिक जी0डी0की कापी इन्होने ये कहकर देने से इन्कार किया है कि इससे जांच में गड़बड़ी होने की खतरा हो जाएगा।
                   अभियुक्त तारिक कासमी व खालिद मुजाहिद के अधिवक्ता मुहम्मद शुएब और रणधीर सिंह सुमन ने बताया कि जस्टिस आर0डी0निमेष ने इस बात पर सवाल खड़ा किया था कि जब तारिक कासमी को गिरफ्तार किए जाने की खबरें कई हिन्दी दैनिक में छपी हुई थी तो पुलिस या सरकार ने इन खबरों की जांच की जहमत क्यों नही की। इसी तरह तारिक कासमी के दादा जहीर अली के जरिए जब स्थानीय थाना रानी की सरायं को तारिक की गुमशुदगी की सूचना दी गयी तो फिर इसने इसको नज़रअन्दाज क्यों किया? इसके अलावा इस बात पर सवालिया निशान खड़ा किया है कि जब तारिक कासमी के दादा के जरिए पुलिस को दी गयी तहरीर में ये कहा गया कि इसके पास मौजूद मोबाइल नम्बर 9450047342 से जब तारिक कासमी के घर वालों ने बातचीत कायम करने की कोशिश की तो वह कभी चालू हालत में मिलता रिंग जाती, लेकिन उठता नही और कभी बन्द हो जाता, लेकिन पुलिस ने इस बात को जानबूझकर कर नज़र अन्दाज़ किया क्योंकि हकीकत तो पुलिस को पता ही थी कि तारिक कासमी  व इसका मोबाइल एस0टी0एफ0 के कब्जे में है। इसी तरह खालिद मुजाहिद के टाटा सूमो गाड़ी में मडि़याहू बाजार से मन्नू चाट वाले की दुकान से उठाए जाने की ख़बर 17दिसम्बर 2007 को सभी समाचार पत्रों में छपी, लेकिन पुलिस और सरकार ने उस पर कोई कार्यवायी नहीं की फिर 22दिसम्बर 2007 के दिन जिस दिन एस0टी0एफ0 ने दोनो अभियुक्तों को बाराबंकी रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार  करना बताया, को जौनपुर से ख़बर दैनिक जागरण समाचार पत्र में छपी कि एस0टी0एफ0 के जरिए 12दिसम्बर को मडि़याहू बाजार से उठाए गए खालिद मुजाहिद पर आई0बी0 की निगाह लगभग छः माह से थी। लोगो के मुताबिक इस ख़बर का वजूद कैसे हुआ और जब हुआ तो फिर सरकार ने इस ख़बर की जांच करने की कोशिश क्यों नही की।
                   समाजवादी सरकार के ऊपर जब मुस्लिम समाज से जोर बढ़ाया कि इसने चुनाव के समय जो वादा आतंकवाद के झूठे आरोपो में कैद मुस्लिम नवजवानों की रिहाई की बात की थी। उसे वह कब पूरा करेगी? तो अक्टूबर के पहले सप्ताह मंे अखिलेश यादव सरकार ने बाराबंकी, लखनऊ,फैजाबाद, और गोरखपुर जिला अधिकारी से अभियुक्तो के मुकदमें के बारे में जानकारी तलब की। रिपोर्ट में मुकदमें का नम्बर, धाराएं, अदालत का नाम अभियुक्तो के नाम मुकदमे की प्रकृति प्रथम सूचना रिपोर्ट के साथ मेडिकल रिपोर्ट,केस डायरी, में मौजूद सबूतो की छानबीन जो अभियोजन अधिवक्ताओं ने किया हो मुकदमे की जानकारी मांगी। मुकदमा वापसी के बारे में एस0पी0की राय व जिला अधिकारी की राय मांगी जो कि सभी जिलो से रिपोर्ट भेज दी गयी है। रिपोर्ट में क्या लिखा गया है यह तो बाद की बात है लेकिन आमतौर पर अधिकारियों की तरफ से अभियुक्तो की रिहाई की रिपोर्ट दुश्वारियां पैदा करके भेज दी जाती है। लेकिन रिहाई की बात असल में जिम्मेदारी सरकार के ही पास होती है। सी-आर0सी0पी0 की धारा 321 के तहत किसी भी अभियुक्त के खिलाफ अदालत में जारी केस की वापसी के अधिकार अदालत के पास मौजूद होतेे है। अभियुक्त के केस की वापसी के लिए पहले अधिवक्ता या सरकारी अधिवक्ता अदालत से प्रार्थना करेगा लेकिन वह यह काम अदालत का फैसला आने से कबूल ही कर सकता है मगर वर्ष 1991 में उ0प्र0 सरकार ने इसमें कुछ तब्दीली की जिससे सरकार ने अपने पास यह अधिकार ले लिया। अब सरकार जब भी चाहे और जिस अभियुक्त को चाहे रिहाई कर सकता है।ं जाहिर है कि सरकार की मंशा किसी की भी रिहाई करने की है तो पुलिस और न ही अभियोजन या अधिवक्ता कोई दखल नही दे सकता है।सुप्रीम कोर्ट ने भी मुकदमा वापसी के बारे में अपनी राय कई मुकदमें में दी है । इसके मुताबिक दिल्ली  सरकार बनाम प्रीत पब्लिक स्कूल और राहुल अग्रवाल बनाम राकेश जैन 34(1998)एससी 910 एआईआर2005, एस0के0शुक्ला बनाम उ0प्र0 सरकार एआईआर2006एससी413, के केसो में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय देते हुए कही है कि मुकदमे की वापसी लेने के लिए सरकार निम्न बातो पर स्वतन्त्र है।  1-अमन के लिए 2-जनता के इंसाफ के लिए 3-क्षेत्र की सुरक्षा के लिए4-किसी गैर जरूरी बेकार मुकदमे के लिए 5-शान्ति व्यवस्था के लिए 6-पब्लिक पालिसी के लिए 7-समाज के सद्भाव के लिए 8-गैर जरूरी सरकारी खर्च के लिए 9-मुकदमा जारी रखने की सूरत में अभियुक्त के अधिकार में होने वाली नाइंसाफी के लिए और इसी तरह के कई बातो के आधार पर सरकार केस वापस ले सकती है। जाहिर है कि अखिलेश सरकार के पास अभियुक्त तारिक कासमी व खालिद मुजाहिद के केस की वापसी के लिए कई कानून मौजूद है जिन पर अमल करके वह इन बेकसूरों को इंसाफ दिला सकती है और राज्य में एक के बाद एक हो रहे साम्प्रदायिक दंगो के सबब वह खो चुकी अपना वजूद वह फिर से पा सकती है वरना फिर उसका मिशन 2014 चूर चूर हो जाएगा।
-मुहम्मद तारिक खान

     अनुवादक -नीरज  वर्मा 
        (इंकलाब से साभार)


1 टिप्पणी:

बेनामी ने कहा…

AAP KO KAISE PATA YE BEKASOOR HAIN. AJ HIGH COURT NE CASE WAPSI KI MASHA PAR SWAL UTHAYA HAI. AJ AP UN TERRORIST KO RIHA KARENGE KAL PADM BHUSHAN DENGE. AB AP KA KYA KAHNA HAI.