मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013

दीपक चौरसिया को महंगा पड़ा

लेक्ट्रॉनिक्स चैनल्स द्वारा प्रसारित साक्षात्कारों को देखने से पता चलता है कि  टी.वी चैनल्स के एंकर शालीनता की सीमा को पार करते हुए सम्बंधित साक्षात्कार देने वाले को बेइज्जत करते रहते हैं और वह व्यक्ति बेइज्जत होने के बाद इन एंकरों से पंगा नही लेता है। उसी तरह से आज प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन जस्टिस मार्कंडेय काटजू का साक्षात्कार इंडिया न्यूज़ के एंकर दीपक चौरसिया ने  टेलीकास्ट शुरू किया। साक्षात्कार पहले दौर में तो अच्छे तरीके से चला किन्तु दीपक चौरसिया की टिप्पणी  पर जस्टिस मार्कंडेय काटजू भारी पड़े। जस्टिस मार्कंडेय काटजू को जैसे दीपक चौरसिया ने कहा कि आप अधूरा सच कहते हैं। जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने कहा कि आरोप मत लगाइए। इंटरव्यू  समाप्त। मिसबिहेव मत करिए। आप आधा सच और आधा झूठ , इस तरह की बेवकूफी की बातें कर रहे हैं। बिहेव करना सीखिए। आप मुझसे बहुत छोटे हैं। आपने आधा सच कहकर मेरे ऊपर आरोप लगाया है। मुझे माफ़ कर दीजिये और जाइये गेट आउट। तब से इंडिया न्यूज़ पद की गरिमा और भाषा की मर्यादा को लेकर हल्ला मचाना शुरू कर दिया है। 
एंकर होने का मतलब यह नहीं है कि आप जिस तरीके से चाहें आरोप-प्रत्यारोप करते रहे और सम्बंधित आदमी चुप रहे। जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने दीपक चौरसिया को सबक देते हुए इलेक्ट्रोनिक चैनल की असली हैसियत बता दी है। 
                         वास्तव में देखा जाये तो जब ये मल्टीनेशनल कंपनियों के सीईओ, उद्योगपतियों आदि से एंकर इंटरव्यू लेते हैं तो इनकी भाषा शैली बड़ी शालीन होती है क्यूंकि सम्बंधित चैनल को उनसे कुछ न कुछ उम्मीद जरूर होती है लेकिन राजनेताओं, अधिकारीयों से चाहे जिस तरीके से बात करो। उनसे हर तरीके की सुविधाएं भी लो और गुर्राओ भी। इलेक्ट्रॉनिक चैनल्स समाज के प्रति जिम्मेदारी कम महसूस करते हैं और टी आर पी  को बढाने के प्रति ज्यादा उत्साहित रहते हैं। इलेक्ट्रॉनिक चैनल्स के छोटे-छोटे कर्मचारी गाँव देहात से लेकर राजधानी तक गुर्राने के अतिरिक्त काम कम करते हैं। शालीनता, शिष्टाचार छू नही गया है। इस घटना से सभी इलेक्ट्रॉनिक चैनल्स को सबक लेना चाहिए। जिसका वह साक्षात्कार ले रहे हैं। उस पर आरोप नही लगाना चाहिए बल्कि उसकी बात को का प्रेषण करना चाहिए। 

सुमन
लो क सं घ र्ष !

2 टिप्‍पणियां:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

इलेक्ट्रॉनिक चैनल्स के छोटे-छोटे कर्मचारी जिले व् गाँव स्तर पर चैनल का कैमरा दिखाकर छोटे बड़े अधिकारियों को लूटते है

Recent Post दिन हौले-हौले ढलता है,

बेनामी ने कहा…

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