रविवार, 16 जून 2013

आने वाली बरबादी से बेखबर

बाराबंकी। आर्थिक उदारीकरण की नीतियों से देश का आम आदमी बुरी तरह प्रभावित हुआ हैं और आश्चर्य की बात यह भी है की वह अपनी आने वाली बरबादी से बेखबर है।
यह बात राम सेवक यादव स्मारक इण्टर कालेज में लोक संघर्ष पत्रिका के तत्वावधान में ’उदारीकरण का प्रभाव आम आदमी पर’ विषय पर मुख्य अतिथि देश के अर्थशास्त्री कमल नयन काबरा ने देश का आर्थिक अंाकलन प्रस्तुत करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था निरन्तर गर्त की ओर जा रही हैं। औद्योगिक प्रगति में गिरावट आ रही है महंगाई का दानव दिन -प्रतिदिन आम आदमी को खाये जा रहा है। विडंबना यह कि आम आदमी चाह कर कुछ नहीं कर पा रहा है देश के प्रमुख राजनीतिक दलो की नीति एवं नियत समान नजर आ रही है। जिस देश में केवल एक अंबानी परिवार्र आिर्थक आय देश की आय का 7 प्रतिशत हो, जिस देश में पूँजीपतियों द्वारा प्रायोजित भ्रष्टचार नए घोटाले कर रहा हो और इन घोटालो से अर्जित धन बाहर के देशो में फर्जी कम्पनियां बना कर वहाॅ खपाया जा रहा हो उस देश में आम आदमी का भविष्य कैसा? इसकी कल्पना आज नहीं की जा सकती है।
    गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे गिरि विकास संस्थान के निदेशक प्रो0 सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि उनका संस्थान सरकार द्वारा प्रतिपादित आर्थिक नीतियों का मूल्यांकन करता है तथा समाजिक समस्याओं का विश्लेषण कर सरकार के सामने अपने सुझाव व प्रस्ताव देता है। देश की स्वतंन्त्रता के पश्चात जवाहर लाल नेहरू द्वारा जो आर्थिक व औद्योैगिक नीतियां बनाई गयी थी उनका आधार सार्वजनिक क्षेत्रो में निवेश पद केन्द्रित था वर्ष1990 तक देश में यही नीतियां चलती रही और हमारा औद्यौगिक विकास एवं औद्यौगिक स्थातित्व इसी का नातिजा था परन्तु वर्ष 1991में अमरीकी दबाव के चलते हमार्री आिर्थक नीतियो में जो परिवर्तन किये गए उन्हे आर्थिक उदारीकरण की संज्ञा दी गयी आर्थिक उदारीकरण केवल विदेशी औद्योगिक इकाईयो की देश में स्थापना एवं विदेशी पूँजी निवेश की राह में लाइसेंस पद्वति के रूप में चली आ रही बाधाओं को दूर करना ही था।
    प्रो0 सुरेन्द्र कुमार ने कहा की वह आर्थिक उदारीकरण के सैद्वान्तिक रूप से विरोधी नहीं है उन्होने जपान का उदाहरण देते हुए कहा कि जापान एक वर्ष 1968 में सर्वप्रथम इन्ही नीतियों को अपना कर अपनी आर्थिक प्रगति अर्जित की थी फिर उसी नक्से कदम पर चलते हुए उसकें पड़ोसी मूल्क चीन ने आर्थिक समृद्वि प्राप्त की और आज विश्व में एक प्रबल आर्थिक शक्ति के रूप में खड़ा हुआ है। हमारे देश में आर्थिक नीतियों का लाभ आम आदमी तक पहुँचाने में  हमारा लोकतंत्रिक ढाँचा अपना वह योगदान नहीं दे पा रहा है जो उसे देना था, जब तक ग्रामिण स्तर पर पंचायत राज व्यवस्था मजबूत और पारदर्शी नहीं होगी तब तक आम आदमी उदारीकरण का लाभ नहीं मिल पायेगा और परिणाम स्वरूप अमीर और गरीब की दूरी बढती जायेगी।
    कार्यक्रम में बृजेश कुमार दीक्षित, वसीम राईन, हुमाँयू नईम खान , विनय कुमार सिंह , श्री राम सुमन, पवन वैश्य, पुष्पेन्द्र कुुमार सिंह बलराम सिंह ,विजय प्रताप, उपेन्द्र, प्रदीप सिंह, विनय दास, अजय सिंह, महंत गुर सरन दास, नीरज वर्मा, निर्मल वर्मा, जावेद, एखलाख एडवोकेट, सूफी  उदैर्वरहमान, जगन्नाथ वर्मा सहित अनेको गणमान्य व्यक्ति थे संचालन रणधीर सिंह सुमन तथा धन्यवाद बृजमोहन वर्मा ने ज्ञापित किया।


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