गुरुवार, 29 अगस्त 2013

टुंडा इलाज कराने आया है

बगैर शरा कभी शेख थूकता भी नही।
मगर अँधेरे उजाले वह चूकता भी नहीं।।
                                                      -अकबर इलाहाबादी 

अकबर इलाहाबादी का यह शेर भारत में वर्तमान दौर में पूरी तरीके से लागू है. कथित खूंखार बम निर्माता आतंकी अब्दुल करीम टुंडा की गिरफ्तारी भारत नेपाल बॉर्डर से दिल्ली स्पेशल पुलिस द्वारा करना बताया जाता है जबकि विभिन्न प्रेस सूत्रों से मिल रही जानकारियों के अनुसार सत्तर वर्षीय अब्दुल करीम टुंडा पाकिस्तान में बीमार चल रहा था और उसका इलाज आई एस आई नहीं कर रही थी और फिर इलाज के नाम पर उसको संयुक्त अरब अमीरात भेजा गया जहाँ से उसको नेपाल के रास्ते गुपचुप तरीके से भारत लाया गया। जितनी जानकारियां प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा उसके सम्बन्ध में दी जा रही हैं वह जानकारियां पहले से ही भारत को प्राप्त थी। अब भारत का काम यह है कि उसका बेहतर से बेहतर इलाज कराये और ऐसे दगे कारतूसों को इकट्टा करके रखे। इस देश में खुफिया सूचना तंत्र अभी कौन-कौन से तमाशे करेगा और आगे-आगे क्या होता है यह सब को भली-भाँती मालूम हो गया है।  टुंडा की हलचल ख़त्म नही हुई कि यासीन भटकल को भी उसी तरीके से नेपाल बॉर्डर पर गिरफ्तार कर लिया गया है अब यह पता चलना बाकी है कि यासीन भटकल भारत से नेपाल बॉर्डर गए थे या नेपाल से भारत के बॉर्डर पर आ रहे थे। आने वाले दिनों में सभी कथित फरार आतंकवादी भारत नेपाल सीमा पर बरामद  और उनसे बहुत सारी जानकारियां और बहुत सारे जासूसी उपन्यास भी लिखे जा सकते हैं. समाचारों में यह भी आया है कि वाराणसी, फैजाबाद, गोरखपुर के बम विस्फोट में भी यासीन भटकल का हाथ था जबकि अभी तक न्यायालय में चल रहे वादों में यासीन भटकल का जिक्र कहीं भी विवेचना में नहीं आया था। जो सूचनाएं प्रसारित की जाती हैं उससे सारे बम विस्फोटों की जानकारी प्रसारित कर दी जाती है। कोई भी मौका चूकना नही चाहिए लेकिन सनसनीखेज सूचनाएं जारी करने से स्तिथि नहीं बदलती है। 

सुमन 

2 टिप्‍पणियां:

yashoda agrawal ने कहा…

आपने लिखा....हमने पढ़ा....
और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए शनिवार 31/08/2013 को
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
पर लिंक की जाएगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

राजन ने कहा…

सर जी,
अब यदि आपके पास तर्क ही नहीं हैं तो लिखते ही क्यों हैं।आपके यहाँ यही होता है खासकर आपके लेखों में।पूरा लेख खत्म हो जाता है लेकिन ये नहीं समझ आता कि लेख का आधार क्या हैं ।और भटकल के लिए इतने सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग क्यों?आतंकवादी चाहे कोई हो वह ऐसे सम्मान का हकदार बिल्कुल नहीं है।आपके ब्लॉग पर किसी लेखक को मैंने दिग्विजय सिंह से ट्रेनिंग लेने के लिए कहा था लगता है उन्होंने तो नहीं पर आपने मेरी सलाह मान ही ली।
पर अब पता पाठकों को और किस किस चीज के लिए तैयार रहना होगा।