मंगलवार, 10 सितंबर 2013

हिन्दुस्तान की राजनीति में इतिहास बनाता एक धरना



        यह एक सामान्य बात भर नहीं है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में , के सामने पिछले पचासी दिनों से लगातार रिहाई मंच संगठन के लोग अनिश्चित कालीन धरने पर बैठे हुए हैं। रिहाई मंच के लोगों की माँग है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव के वक्त अवाम से किए गए अपने वादे को निभाते हुए प्रदेश की विभिन्न जेलों में आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाह मुसलमानों को तुरंत रिहा करंे। इसके साथ ही मंच की माँग है कि उत्तर प्रदेश की कचहरियों में सीरियल बम धमाकों के आरोप में फर्जी तरीके से पकड़े गए तथा एक षड्यंत्र के तहत प्रदेश की एस.टी.एफ. और ए.टी.एस. के द्वारा मार दिए गए जौनपुर के मौलाना खालिद (जिनकी पुलिस हिरासत में 18 मई 2013 को संदिग्ध मौत हुई) के हत्यारे पुलिस अधिकारियों को तुरंत हिरासत में लिया जाए।
गौरतलब है कि मौलाना खालिद मुजाहिद की हत्या लखनऊ जेल से बाराबंकी कोर्ट  में पेशी पर लेकर गए पुलिस स्कार्ट द्वारा पेशी के बाद वापस लखनऊ लौटते हुए कर दी गई थी। इन्ही धमाकों के आरोप में आजमगढ़ निवासी तारिक को भी पकड़ा गया था। जो इस समय लखनऊ की जेल में बंद है। जब इनकी गिरफ्तारी की गई थी उस वक्त सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों द्वारा इस गिरफ्तारी पर कई गंभीर सवाल उठाए गए थे। काफी दबाव के बाद इन सवालों की सच्चाई जाँचने के लिए पिछली मायावती सरकार द्वारा आर0डी0 निमेष कमीशन जाँच आयोग का गठन किया गया था। कमीशन ने अपनी जाँच में पुलिस की हिरासत और विस्फोटक सामानों की बरामदगी की पूरी कहानी को फर्जी बताया था। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक हो जाने के बाद रिहाई मंच के लोगों ने सरकार के खिलाफ एक मोर्चा खोल रखा है। रिहाई मंच का कहना है कि सपा सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही करते हुए तारिक कासमी को तत्काल रिहा करे तथा खालिद की हत्या में नामजद पुलिस
अधिकारियों को तत्काल हिरासत में ले।
    गौरतलब है कि पिछले आम चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में प्रदेश के मुस्लिम मतदाताओं से यह वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी प्रदेश में सत्ता में आई तो वह उन मुस्लिम नौजवानों पर चल रहे मुकदमे वापस ले लेगी जिन्हें प्रदेश की ए.टी.एस. और एस.टी.एफ. के अधिकारियों द्वारा आतंकवादी होने के आरोप में फर्जी तरीके से फँसाया गया है। सपा के घोषणापत्र में इस बात की स्वीकारोक्ति कि एस.टी.एफ. और ए.टी़.एस. के लोग निदोर्षों, खासकर मुस्लिम नौजवानों कोे आतंकी घटनाओं में फर्जी तरीके से फँसा रहे हैं, बेहद अहम थी। रिहाई मंच, जिसका गठन ही आतंकवाद के आरोप में पकड़े गए निर्दोष लोगों को छुड़ाने के लिए किया गया है, के पदाधिकारियों की माँग है कि समाजवादी पार्टी अब जब कि प्रदेश में सत्ता में आ गई है अपने वादे को पूरा करते हुए जेल में बंद इन निर्दोष मुस्लिम नौजवानों कोे तत्काल रिहा करे। रिहाई मंच का आरोप है कि सपा सरकार इस संवेदनशील मसले पर प्रदेश के मुसलमानों को केवल भरमा रही है। रिहाई मंच का कहना है कि सपा सरकार सत्ता में आते ही अपने वादे को भूल चुकी है। सपा सरकार अपने इस वादे के प्रति बिल्कुल गंभीर नहीं हैं। लेकिन सरकार रिहाई मंच के इस आरोप को सिरे से नकार देती है। सरकार कह रही है कि बेगुनाहों को छोड़ने की पूरी प्रकिया चल रही है और करीब चार सौ बेगुनाहों को छोड़ा जा चुका है।
    इधर, रिहाई मंच का कहना है कि सरकार इस मसले पर केवल अपने वोट बैंक के हिसाब से काम कर रही है। उनका कहना है कि सपा सरकार ने खालिद मुजाहिद की मौत के पहले एक साजिश के तहत जिला एवं सत्र न्यायालय बाराबंकी में अधूरा हलफनामा पेश करके प्रदेश के मुसलमानों के सामने यह जताने की कोशिश की कि वह तो मुकदमे वापस लेना चाह रही है लेकिन अदालत ही मुकदमा वापसी के खिलाफ है। इस मामले की तह में जाते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता असद हयात कहते हैं कि तारिक और खालिद पर से मुकदमा वापसी की सरकार की पूरी प्रणाली ही दोषपूर्ण थी। उसे अदालत को निमेष आयोग की जाँच रिपोर्ट का हवाला देकर इन नौजवानों के खिलाफ हुए अन्याय को बताना चाहिए था और जाँच रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा वापस लेने का अनुरोध करना चाहिए था लेकिन वह एक राजनीति के तहत अदालत में गई और सरकारी वकील ने जज से कहा कि सरकार जनहित में इन दोनों आरोपियों पर से मुकदमा वापस लेना चाह रही है। लेकिन जब कोर्ट ने पूछा कि एक आतंकवादी पर से मुकदमा वापसी में आप कौन सा जनहित देखते हैं तो सरकारी वकील निरुत्तर हो गए। वे कहते हैं कि यह सब एक साजिश के तहत सपा सरकार ने करवाया और यह तय है कि एक भी निर्दोष लड़का सपा सरकार में छूटने वाला नहीं है। सच्चाई यह है कि मुलायम-अखिलेश खुद भी नहीं चाहते कि कोई बेगुनाह मुसलमान रिहा हो। वह मुसलमानों में केवल भ्रम फैला रही है। वरुण गांधी के भड़काऊ भाषण के मामले  में सपा का हिन्दुत्ववादी चेहरा उजागर हो चुका है।
    इधर, सपा के नेताओं का दावा है कि करीब चार सौ निर्दोष मुस्लिम नौजवानों पर से केस वापस ले लिए गए हैं लेकिन रिहाई मंच कहता है कि वे सब सपा सरकार के पालतू गुण्डे और माफिया हैं। रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुएब कहते हें कि सपा सरकार ने आज तक आतंकवादी होने के आरोप में फँसे एक भी बेगुनाह नौजवान को नहीं छोड़ा है। यह सपा सरकार मुसलमानों का रहनुमा होने का केवल दंभ भरती है जो मुसलमानों से एक फरेब से ज्यादा कुछ नहीं है।
    रिहाई मंच की कई बातों में दम है। वे कहते हैं कि सन् 2007 में लखनऊ समेत प्रदेश की कचहरियों में जो सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे उसमें कई लोगों की जान भी गई थी। जब सरकार यह मान चुकी है कि पकड़े गए लोग निर्दोष हैं तथा आर0डी0 निमेष जाँच कमीशन भी इन्हंे निर्दोष बताता है तो फिर यह प्रश्न है कि इन धमाकों के असली गुनहगार कौन हैं और वे अब तक पकड़े क्यों नहीं गए? खालिद और तारिक की गिरफ्तारी के वक्त उनके पास से डेढ़ किग्रा0 आर0डी0एक्स0 भी बरामद हुआ था अब सवाल यह है कि अगर ये दोनों बेगुनाह हैं तो यह विस्फोटक कहाँ से आया? मोहम्मद शुएब सवाल करते हैंैं कि इस प्रदेश के पूर्व डी0जी0पी0 बृजलाल और उनकी मण्डली यह बताए कि खालिद की गिरफ्तारी के बाद जिस आर0डी0एक्स0 की बरामदगी का दावा किया गया था वह कहाँ से आया था। रिहाई मंच के शाहनवाज कहते हैं कि इस देश में जब खुफिया के लोग ही मुसलमानों को फँसाने में लगे हों तब यह बात साफ है कि बृजलाल ने ही कहीं से आर0डी0एक्स0 की व्यवस्था कराई थी। देश हित में जरूरी है कि अरुण कुमार झा तथा बृजलाल से तुरंत पूछताछ हो। ताकि प्रदेश की जनता इस आर0डी0एक्स0 का सच जान सके।
    इधर रिहाई मंच के इस धरने को देश के बौद्धिक संगठनों तथा मुख्य धारा के राजनीतिज्ञों का भरपूर समर्थन मिल रहा है। अब तक इस धरने मे सी0पी0एम0 नेता सुभाषिनी अली, प्रकाश करात, पी0यू0सी0एल0 की कविता श्रीवास्तव, तथा सी0पी0आई0 एम0एल0 के दीपंकर भट्टाचार्य के अलावा कई अन्य जानी मानी हस्तियाँ और पत्रकार गौतम नौलखा, आशीष गुप्ता, अनिल चमडि़या, अमलेन्दु उपाध्याय सहित कई लोग शिरकत कर चुके हैं। इस धरने के जारी रहने के बाद सरकार में इतनी बेचैनी है कि उसने पुलिस बल का उपयोग करते हुए पहले मंच के नेताओं को धरना उठाने के लिए धमकाया और अन्त में पूरे मंच को ही उखड़वा डाला। रिहाई मंच का मानना है कि इस धरने ने सपा सरकार की मुस्लिम नीति को बेनकाब करते हुए मुलायम के राजनैतिक भविष्य की कब्र खोद डाली है। मंच के प्रवक्ता राजीव यादव कहते हैं कि यह सवाल केवल एक खालिद की मौत का नहीं है। आज देश के अंदर जिस तरह से मुसलमानों को किसी खास सांप्रदायिक जेहेनियत के तहत आतंकवादी होने के आरोप में फँसाया जा रहा है, यह बेहद चिंतनीय है और इस किस्म की घटनाएँ देश के लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। हमारी लड़ाई इस लोकतंत्र को महफूज रखने के लिए है और जब तक आतंकवाद पर सरकार की सांप्रदायिक पाॅलिसी नहीं बदलती तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। इधर खालिद की मौत की घटना के बाद सरकार के लोग इसे स्वाभाविक मौत साबित करने में भले जुट गए लेकिन रिहाई मंच के पास खालिद की मौत की जो तस्वीरें हैं उनसे साफ है कि साजिश के तहत उनकी हत्या की गई है। रिहाई मंच के अध्यक्ष शुएब कहते हैं कि मुख्यमंत्री दोषी पुलिस अधिकारियों को बचाने के लिए झूठा माहौल तैयार कर रहे हैं कि खालिद अपनी मौत मरे हैं। खालिद की हत्या के बाद सरकार बेनकाब हो चुकी है। उसका अल्पसंख्यक प्रेम खुलकर सामने आ चुका है। रिहाई मंच के लोग सरकार पर इस केस को किसी तरह खत्म करने व सबूत मिटाने का आरोप लगा कर कहते हैं कि सपा सरकार ने आज तक सीबीआई जाँच शुरू कराने के लिए आवश्यक कागजी कार्यवाही भी पूरी नहीं की है, लिहाजा  आज भी आरोपी पुलिस अफसर खुलेआम घूम रहे हैं। इस मामले में सरकार की जेहेनियत साफ नहीं है। सरकार के खिलाफ प्रदेश के मुसलमानों में जबरदस्त गुस्सा है।
    रिहाई मंच के राजीव कहते हैं कि हमारी लड़ाई लोकतंत्र की रक्षा के लिए है। इशरत जहाँ के मामले में हालिया खुलासे में जिस तरह आई0बी0 के लोग बेनकाब हुए हैं इससे हम उत्साहित हैं कि अब चीजें और खुल कर सामने आ गई हैं, और लोगों के बीच बहस का केन्द्र भी बन रही हैं। हम निर्दोष मुसलमानों को रिहा कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बेगुनाह मुसलमानों की रिहाई इस देश के लोकतंत्र से जुड़ा मामला है।
    इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुहम्मद सुलेमान कहते हैं कि यह  धरना इतने लंबे समय से जिस तरह चल रहा है वह अपने आप में खुद एक इतिहास लिख रहा है तथा रिहाई मंच के लोग जिस प्रतिबद्धता से लड़ रहे हैं उससे साफ है कि हालात में सुधार जरूर आएगा।
    कुल मिलाकर इस धरने के बाद एक बात एकदम साफ होकर सामने आ गई है कि आज उत्तर प्रदेश का मुस्लिम समाज आतंकवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर सरकार से सवाल करने लगा है। इस धरने की सबसे बड़ी उपलब्धि अब तक यही है कि इसने मौलाना खालिद की मौत के सवाल को व्यापक बहस के दायरे में लाते हुए पूरे देश में आतंकवाद के नाम पर सांप्रदायिक खुफिया एजेंसियों के खेल को उजागर कर दिया है। इस धरने में उमड़े जन समूह ने दिखा दिया है कि मुसलमान आतंकवाद के मामलों में जिस तरह से बदनाम किया जा रहा है उससे वह बेचैन है। अब देखना यह है कि मुसलमानों में फैली इस बेचैनी से प्रदेश की सपा सरकार को कितना नुकसान पहुँचता है?
 -हरे राम मिश्र
 मो0-07379393876

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