गुरुवार, 5 सितंबर 2013

देश में लूट-खसोट कायम रखने के लिए है फर्जी आतंकवाद


    देश में फर्जी आतंकवाद के नाम पर की गई हत्याओं में गुजरात के गृहमंत्री अमित शाह के साथ राजस्थान के पूर्व गृहमंत्री गुलाब चन्द्र कटारिया का भी नाम आया। इंटलीजेंस ब्यूरो के अधिकारी राजेन्द्र कुमार ने फर्जी सूचनाएँ तैयार कीं तथा हिन्दुत्ववादी नेताओं के इशारे पर गुजरात के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों ने एनकाउन्टर के नाम पर हत्याएँ कीं। हद यहाँ तक हो गई कि इशरत जहाँ के एन्काउन्टर को सही साबित करने के लिए इंटलीजेंस ब्यूरो के अधिकारी राजेन्द्र कुमार ने ए.के.-47 पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध कर्राइं। वर्तमान में गुजरात के अपर पुलिस महानिदेशक पृथ्वी पाल पाण्डेय को उच्चतम न्यायालय से भी कोई रिलीफ नहीं मिली, अन्त में उन्हें जेल जाना पड़ा। गुजरात में डी.जी. बंजारा समेत कई पुलिस अधिकारी कई वर्षों से जेलों में हंै। वहीं भारत सरकार के अण्डर सेक्रेटरी आर.वी.एस. मणि ने एक बयान में यह कहकर कि मुम्बई आतंकी घटना व संसद हमले में सरकार भी शामिल थी, देश में फैले कथित आतंकवाद की पोल खोल दी। आई.एस.आई. आवश्यकता पड़ने पर पाकिस्तान में बम धमाके करने लगती है, उसी की नकल इस देश में भी जारी है।
    नौ साल पहले अहमदाबाद के कोतरपुर में चार लोगों की लाष के साथ पुलिस सामने आई। बताया गया ये चारो आतंकी थे, जो गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मारना चाहते थे। इन चार लोगों  में एक 19 साल की युवती भी थी इषरत।
    पुलिस की कहानी को गुजरात हाईकोर्ट ने फर्जी करार दिया है। सी.बी.आई. जाँच चल रही है। गुजरात में हुआ यह एक एनकाउंटर नहीं है, जिसे फर्जी बताया गया हो। इसके साथ ही राजस्थान के सोहराबुद्दीन, तुलसी प्रजापति के एनकाउंटर भी फर्जी बताए जा रहे हैं। सोहराबुद्दीन एकाउंटर में राजस्थान के पूर्व गृह मंत्री गुलाबचंद्र कटारिया, गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री अमित शाह और कई बड़े पुलिस अधिकारी आरोपी बनाए गए हैं।
    सोहराबुद्दीन की पत्नी बताई जाने वाली कौसर बी की कहानी तो और भी खौफनाक है। कौसर बी के साथ पुलिस वालों ने पहले बलात्कार किया। उसके बाद जब उसने पुलिस को बेनकाब करने की बात कही तो उसे पुलिस वालों ने बड़ी ही बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया।
    सी.बी.आई. के अनुसार सोहराबुद्दीन के फर्जी एनकाउंटर के अलावा गुजरात के गृह राज्यमंत्री अमित शाह उसकी पत्नी कौसर बी की हत्या के इल्जाम में गले तक फँसे हैं। इस मामले के चलते शाह अपना मंत्री पद गँवा चुके हैं। उन्हें जेल भी जाना पड़ा है। फिलहाल, वह जमानत पर हैं।
    इषरत जहाँ फर्जी एनकाउंटर के करीब एक साल बाद 22 नवंबर, 2005 को कौसर बी, उसका पति सोहराबुद्दीन और दोस्त तुलसी प्रजापति आंध्र प्रदेष की एस.आर.टी.सी. की बस से आ रहे थे, अचानक साँगली के करीब बस के आगे पुलिस की गाड़ी आ गई। सोहराबुद्दीन और कौसर बी कुछ समझ पाते, इससे पहले बस के अंदर गुजरात ए.टी.एस. और राजस्थान पुलिस की टीम घुसी।
       उसने कौसर, उसके पति सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापति को कब्जे में लिया और टोयटा क्वालिस, जिसका नंबर हर-25-7007 था, उसमें बिठा लिया। अब क्वालिस गुजरात की तरफ चल पड़ी। पुलिस इन्हें पकड़ कर गांधीनगर के बाहरी इलाके जमीयतपुरा के एक फार्म हाउस में ले लाई।
26 नवंबर, 2005 को कौसर बी के पति सोहराबुद्दीन को उससे अलग कर दिया गया। पुलिस वाले सोहराबुद्दीन को लेकर कहीं और चले गए। उसी दिन सोहराबुद्दीन को फर्जी मुठभेड़ में कत्ल कर दिया गया। अब क्या होगा कौसर बी का। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था।
    सी.बी.आई. को दर्ज कराए गए कुछ पुलिस वालों के बयानों की माने तो कौसर बी को लेकर ए.टी.एस. के डी.आई.जी. डी.जी. वंजारा निष्चिंत थे। लेकिन अचानक एक फोन कॉल ने डीजी वंजारा के होष उड़ा दिए।
    ये फोन था गुजरात के गृह राज्य मंत्री अमित शाह का। अमित शाह ने वंजारा से कहा कि कौसर बी का जिंदा रहना बेहद खतरनाक है। उसे ऐसे ठिकाने लगाया जाए कि उसकी लाष तक न मिले।
    इस एक फोन कॉल ने कौसर बी का भविष्य तय कर दिया। इसके बाद कौसर बी को अरहाम फॉर्म पर 28 नवंबर की आधी रात को जहर का इंजेक्षन दिया गया। कौसर बी की हत्या में डिप्टी एस.पी. एन.के. अमीन का बड़ा हाथ है। अमीन को ही यह जिम्मेदारी मिली थी कि कौसर बी को खत्म करें और उसकी लाष ठिकाने लगाएँ।
      फर्जी मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन के मारे जाने के एक दिन बाद उनकी पत्नी कौसर बी के साथ एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ए.टी.एस.) के एक पुलिसकर्मी ने बलात्कार किया था। बलात्कार के बाद वह बहुत जोर से चिल्लाते हुए पुलिस वालों को बेनकाब करने की धमकी देने लगी।
         सब इंस्पेक्टर रैंक का यह पुलिसकर्मी अहमदाबाद के बाहरी इलाके में स्थित कोबा के अरहाम बंगले की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था। यह बंगला बी.जे.पी. कॉरपोरेटर सुरेंद्र जीरावाला का है। पुलिस का मानना है कि कौसर बी को बंगले में उस समय लाया गया, जब सोहराबुद्दीन को पुलिस एन्काउंटर के लिए विषाल सर्किल ले जा चुकी थी।
    घटना के बारे में बताते हुए सूत्रों ने कहा कि कौसर बी के लगातार शोर मचाने से ही आई.पी.एस. ऑफीसर डीजी वंजारा और राजकुमार पांड्या वहाँ पहुँचे।
    बलात्कार करने वाले पुलिसकर्मी को थप्पड़ लगाने के बाद वे दोनों कौसर बी को चुप कराने की कोषिषों में लग गए। इसके बाद ही मेहसाना के एक डॉक्टर की मदद से कौसर बी को ज़हर दिया गया।
    कौसर बी की मौत हो जाने के बाद पुलिस ने उनकी डेड बॉडी को जलाने के लिए साबरमती के भगवती टिंबर मार्ट से 400 किग्रा. लकड़ी का इंतजाम किया। लकड़ी ला रहे ट्रक के बीच रास्ते में फँस जाने पर उसे निकालने के लिए क्रेन की मदद भी ली गई। ट्रक और क्रेन पहले ही बरामद किए जा चुके हैं।
      राजस्थान के पूर्व गृहमंत्री और मौजूदा नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की मुष्किलें और बढ़ सकती हैं। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर में आरोपी बनाने के बाद अब सी.बी.आई. ने तुलसी प्रजापति एनकाउंटर में भी उनकी भूमिका की जाँच शुरू कर दी है। जाँच एजेंसी के अनुसार इस मामले में गांधीनगर में कटारिया से एक बार पूछताछ हो चुकी है।
    तुलसी प्रजापति का एनकाउंटर दिसंबर 2006 में उत्तर गुजरात के अंबाजी के पास हुआ था। उस समय कटारिया राजस्थान के गृहमंत्री थे। तुलसी सोहराबुद्दीन का विष्वस्त था। सी.बी.आई. का मानना है कि संभव है कि तुलसी एनकाउंटर की भी जानकारी कटारिया को रही हो।
      उन पर कत्ल, अपहरण, सबूत मिटाने, साजिष जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। सवाल यह कि आखिर सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस है क्या? दरअसल यह केस किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। इसमें खाकी, खादी, माफिया और गुंडों का ऐसा गठजोड़ है जिसने मिलकर एक गहरी साजिष रची। सी.बी.आई. इस साजिष की तह तक पहुँच चुकी है।
     26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद सर्किल और विषाला सर्किल के टोल प्वाइंट पर हुई सोहराबुद्दीन की हत्या। सुबह तड़के 4 बजे इस सड़क पर अचानक कई चेहरे प्रकट हुए। गुजरात ए.टी.एस. के चीफ डीजी बंजारा के साथ आए राजस्थान पुलिस के सुपरिंटेंडेंट एम0एन0 दिनेष। कांस्टेबल अजय परमार से कहा गया कि वह ए.टी.एस. दफ्तर के पीछे पड़ी एक हीरो होंडा मोटरसाइकिल लेकर आए। सोहराबुद्दीन शेख को भी वहाँ लाया गया।
    राजस्थान पुलिस का एक सब इंस्पेक्टर मोटरसाइकिल पर बैठा और थोड़ी दूर जाकर अचानक नीचे कूद गया। उसी वक्त सोहराबुद्दीन को भी चलती कार से नीचे धक्का देकर सड़क पर गिरा दिया गया। उसको चोट लगी, और उसी के साथ चार पुलिस इंस्पेक्टरों ने अपने सर्विस रिवॉल्वर से सोहराबुद्दीन पर आठ गोलियाँ दाग दीं। वंजारा ने कांस्टेबल परमार से सोहराबुद्दीन के निर्जीव शरीर को सिविल अस्पताल ले जाने को कहा।
    आखिर एक आम गैंगस्टर से दो राज्यों के रसूखदार मंत्रियों अमित शाह और गुलाबचंद्र कटारिया की क्या दुष्मनी हो सकती है? यह सच छिपा है गुजरात और राजस्थान में मौजूद अरबों की मार्बल लॉबी में। सोहराबुद्दीन दरअसल, आई.पी.एस. अभय चूड़ास्मा के इषारे पर इसी लॉबी से पैसे वसूल रहा था। इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा चूड़ास्मा डकार जाता था।
    कहा जाता है कि गुजरात और राजस्थान की मार्बल लॉबी ने सोहराबुद्दीन की वसूली से आजिज आकर गृह राज्यमंत्री अमित शाह से संपर्क साधा। ये लॉबी गुजरात और राजस्थान में राजनैतिक पार्टियों के लिए धनकुबेर की तरह काम करती है। आरोप है कि अमित शाह ने अभय चूड़ास्मा से सोहराबुद्दीन को रास्ते से हटाने को कहा। शायद शाह अंदर की कहानी नहीं जानते थे। उन्हें इस बात की भनक तक नहीं थी कि जिस गैंगस्टर से वे धनवान कारोबारियों को बचाने की कोषिष में हैं वह दरअसल खुद अभय चूड़ास्मा का ही पैदा किया हुआ राक्षस है।
     किसी भी तरह राजस्थान में कहीं छिपे बैठे सोहराबुद्दीन को गुजरात लाना था। उसे गुजरात में किसी नए इल्जाम में फाँसने की साजिष बुनी गई। अभय चूड़ास्मा ने सोहराबुद्दीन को लालच दिया। रमण पटेल नाम के एक कारोबारी से पैसे ऐंठने के बहाने उसे गुजरात बुलाया गया। सोहराबुद्दीन ने अपने दो प्यादों सिलवेस्टर और तुलसी प्रजापति को भेजा। दोनों ने पॉपुलर बिल्डर के मालिक रमण पटेल पर गोली चलाई।
    इधर गोली चली उधर सोहराबुद्दीन के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज हो गई। सोहराबुद्दीन हैरान रह गया, उसे शक हो गया कि हो न हो अभय चूड़ास्मा उसके साथ डबल क्रॉस कर रहा है। वह एक साल के लिए गायब हो गया। तब पुलिसवालों ने एक बार फिर लालच का फंदा फेंका। सोहराबुद्दीन का साथी तुलसी प्रजापति उसमें फँस गया, वह बिक गया और वह सोहराबुद्दीन से दगा करने, उसका पता देने को तैयार हो गया।     गुजरात ए़.टी.एस. और राजस्थान पुलिस की टीम ने आंध्र प्रदेष एस.आर.टी.सी. की बस को साँगली के पास रोका। यह बस हैदराबाद से साँगली जा रही थी। सोहराबुद्दीन, कौसर बी और तुलसी प्रजापति इसी बस में थे। इन्हें पकड़कर गांधीनगर के बाहरी इलाके जमीयतपुरा के एक फार्म हाउस लाया गया। यहाँ दो दिन रखा गया और इन दो दिनों में सब कुछ बदल गया। कहा तो यहाँ तक जा रहा है कि सोहराबुद्दीन को रास्ते से हटाने के बाद अभय चूड़ास्मा ने खुद कम से कम 12 कारोबारियों को फोन किया। धमकी दी कि या तो पैसे दे दो या फिर वह उन्हें सोहराबुद्दीन के कत्ल के इल्जाम में फँसा देगा। बताया जाता है कि चूड़ास्मा ने इस तरह करीब 15 करोड़ रुपए उगाहे और ये पैसा खुद जय पटेल और यष चूड़ास्मा नाम के लोगों ने जमा किया।
    सोहराबुद्दीन एनकाउंटर का इकलौता चष्मदीद गवाह तुलसी प्रजापति सोहराबुद्दीन के साथ ही उठाया गया था लेकिन फिर उसे सोहराबुद्दीन एनकाउंटर का पुलिस गवाह बनाकर छोड़ दिया गया। बाद में राजस्थान पुलिस ने उसे दूसरे मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उसी वक्त यह मामला मीडिया में आया और सुप्रीम कोर्ट के आदेष पर केस सी.आई.डी. के पास आया तो वंजारा और शाह घबरा गए। लगा कहीं प्रजापति ने मुँह खोल दिया तो सारा खेल बिगड़ जाएगा। सो एक और एनकाउंटर की कहानी रची गई।
    तुलसी के एनकाउंटर के लिए जगह चुनी गई-बनासकांठा। बनासकांठा यानी वह जिला जो ए.टी.एस. के अफसर वंजारा के अंडर में आता था। 27 दिसंबर 2006 को राजस्थान से गुजरात पेषी के लिए प्रजापति को लाया जा रहा था। रास्ते में ही गोलियाँ चलीं और उसे मार डाला गया। कहानी बनाई गई कि उसने अपने एक साथी के साथ मिलकर पुलिस पार्टी की आँखों में मिर्च पाउडर डाल दिया और गोलियाँ चलाईं, जवाबी गोलीबारी में वह मारा गया। लेकिन सी.आई.डी. की जाँच में पुलिस की यह कहानी झूठी साबित हुई।
    सोहराबुद्दीन मामले में सी.बी.आई. चार्जषीट में गुलाबचंद्र कटारिया का नाम आने के बाद तुलसी प्रजापति फर्जी मुठभेड़ मामले में भी उनका हाथ होने की बात कही जा रही है। सी.बी.आई. ने तुलसी प्रजापति मुठभेड़ को एक परफेक्ट मर्डर करार दिया था। सी.बी.आई. ने अपनी चार्जषीट में प्रजापति की हत्या का मोटिव भी साफ किया है। साथ ही सीधे-सीधे गुजरात के गृहराज्य मंत्री अमित शाह को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब इसमें राजस्थान के पूर्व गृहमंत्री गुलाबचंद्र कटारिया का नाम सामने आया है।
    सी.बी.आई. ने अपनी चार्जषीट में प्रजापति मुठभेड़ को परफेक्ट मर्डर बताते हुए दावा किया है कि उसे सिर्फ इसलिए मारा गया क्योंकि वह सोहराबुद्दीन और कौसर बी की हत्या का सबसे अहम गवाह था। सी.बी.आई. के मुताबिक सोहराबुद्दीन और कौसर बी को जब साँगली से गुजरात पुलिस ने अगवा किया उस समय तीसरा शख्स तुलसी ही था। सी.बी.आई. ने अहम खुलासा करते हुए यह भी बताया कि डी.जी. बंजारा के कहने पर ही सोहराब और कौसर को अपने साथ लेकर तुलसी आ रहा था। इसी दौरान साजिष के तहत तीनों को आधे रास्ते से उठा लिया गया।
    सी.बी.आई. ने अपनी चार्जषीट में बताया है कि सोहराबुद्दीन और तुलसी मामले एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। तुलसी सोहराबुद्दीन के दो खास आदमियों में शामिल था। दूसरा आदमी सिल्वेस्टर था। तुलसी को बाद में पुलिसवालों ने अपने जाल में फँसा लिया और उसने सोहराबुद्दीन से दगा करके, उसका पता पुलिस को दे दिया।
    उसी वक्त यह मामला मीडिया में आया और सुप्रीम कोर्ट के आदेष पर केस सी.आई.डी. के पास आया। सी.बी.आई. ने अपनी चार्जषीट में बताया है कि सोहराबुद्दीन और तुलसी मामले एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। सबूत के तौर पर सी.बी.आई. ने चार्जषीट में अमित शाह और पुलिस अधिकारियों के बीच 26-11-2005 से लेकर 30-11-2005 तक की कॉल डीटेल्स को रखा है। इसके मुताबिक आई.पी.एस. राजकुमार, डीजी बंजारा और पूर्व गृह राज्यमंत्री अमित शाह के बीच उस दौरान काफी बातचीत हुई। जब तुलसी को अहमदाबाद कोर्ट में पेषी के लिए उदयपुर से बार-बार लाया जा रहा था। चार्जषीट में सी.बी.आई. ने इस आधार पर दावा किया कि तुलसी को मारने की तैयारी लंबे समय से चल रही थी। यही नहीं सी.बी.आई. के अनुसार जब तुलसी को अहमदाबाद लाया जा रहा था उस दौरान 27-11-2006 से 29-11-2006 के बीच अमित शाह, गुजरात पुलिस और राजस्थान पुलिस के बीच अचानक कई बार बातचीत होती है।
    सी.बी.आई. ने चार्जषीट में इस बात का भी जिक्र किया कि जब सोहराबुद्दीन के भाई की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने केस को डी.जी. पी0सी0 पांडे को सौंपा तो पांडे ने आईजी गीता जौहरी के साथ मिलकर न सिर्फ अपने पद का बेजा इस्तेमाल किया बल्कि जाँच में भी ढील दी। जाँच रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन पुलिस अधिकारी वी0एल0 सोलंकी ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट 1 सितंबर 2006 को तैयार कर ली थी लेकिन इसे 7 जनवरी 2007 को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया।
    चार्जषीट पर लिखा है कि 11 और 22 दिसंबर 2006 को अमित शाह ने अपने दफ्तर में गुप्त बैठक भी बुलाई थी। इसमें डी.जी.पी. पांडे, एडिषनल डी.जी. पी0 जी0सी0 रायगर, आई0जी0 गीता जौहरी शामिल थीं। इस बैठक में अमित शाह ने पुलिस अधिकारी सोलंकी की जाँच रिपोर्ट पर नाराजगी जताते हुए गीता जौहरी को जाँच के पेपर नष्ट करने को कहा था। सी.बी.आई. के मुताबिक रायगर ने इस साजिष में शामिल होने से मना किया तो उसका ट्रांसफर कर दिया गया जबकि पांडे और जौहरी अपनी इच्छा से साजिष का हिस्सा बने थे। सी.बी.आई. की चार्जषीट के मुताबिक 18 दिसंबर 2006 को तत्कालीन जाँच अधिकारी वी0एल0 सोलंकी ने प्रजापति से उदयपुर जेल जाकर पूछताछ की इजाजत माँगी थी लेकिन साजिष में शामिल गीता जौहरी ने इसे यह कहकर टाल दिया कि उन्होंने इसकी अनुमति बड़े अधिकारियों से माँगी है। बाद में गीता जौहरी ने यह कहकर मना कर दिया कि बड़े अधिकारियों ने पूछताछ की इजाजत नहीं दी है।
    यहाँ तक कि गीता जौहरी ने वह खत भी नष्ट कर दिया जिसमें तुलसी से पूछताछ की इजाजत माँगी गई थी।
     चार्जषीट में लिखा है कि उदयपुर जेल से आखिरी बार जब तुलसी प्रजापति को अहमदाबाद लाया जा रहा था तब भी आरोपी अधिकारी लगातार एक दूसरे के संपर्क में थे। सी.बी.आई. ने बाकायदा सबूत के तौर पर इसकी कॉल डीटेल्स भी दी है।
      28 दिसंबर 2006 को तुलसी प्रजापति की हत्या के बाद मौका ए वारदात पर एक देसी रिवॉल्वर रख दी गई। यही नहीं सी.बी.आई. ने बताया कि मुठभेड़ को अंजाम तक पहुँचाने वाले आषीष पंड्या ने खुद ही अपने कंधे पर गोली चलाई और मुठभेड़ में जख्मी होने की कहानी बनाई।
    आज जरूरत इस बात की है कि देश में संसद पर हमला हो या 26/11 की मुम्बई आतंकी घटना या देश में आतंकवाद के नाम पर मुस्लिम नौजवानों के एनकाउन्टर का मामला हो या आतंकवाद के नाम पर मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारी की बात हो, सबकी उच्च स्तरीय जाँच कराकर उसमें शामिल अधिकारियों पर फर्जी एनकाउन्टर व फर्जी गिरफ्तारियों के मामले में मुकदमे चलाए जाएँ।
        उत्तर-प्रदेश में सीरियल बम विस्फोट कांड में गिरफ्तार खालिद मुजाहिद व तारिक कासमी की गिरफ्तारी को लेकर गठित आर.डी. निमेष कमीशन ने कथित आर.डी.एक्स. डेटोनेटर जिलेटिन राड की बरामदगी व गिरफ्तारी को फर्जी माना है।
 -तारिक खान
मो0-09455804309

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