रविवार, 29 सितंबर 2013

मुखौटा युद्ध प्रारंभ

 भारतीय राजनीति में मुखौटा युद्ध प्रारंभ हो चुका है।  २०१४ के संसदीय चुनाव में इजारेदार कंपनियों उद्योगपतियों ने एक राहुल नाम का मुखौटा तैयार कराया है और एक नरेन्द्र मोदी नाम का चाहे यह मुखौटा पसंद करो चाहे वह मुखौटा पसंद करो. मुखौटों को पसंद कराने के लिए लाखों  करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया व अन्य प्रचार माध्यमो का भरपूर उपयोग खरीद कर किया जा रहा है. इस युद्ध में सत्तर प्रतिशत भारतियों की बात ही नहीं की जा रही है। भावनात्मक सवालों को उठा कर जनता के जल, जंगल, जमीन पर कब्जे की तैयारियां की जा रही हैं साम्राज्यवादी ताकतों का समर्थन प्राप्त करने के लिए उक्त मुखौटाधारी उनके विश्वासपात्र बनने के लिए कसमें खा रहे हैं, जनता मंत्रमुग्ध है।
                 महंगाई, बेरोजगारी, भुखमरी, शोषण, अत्याचार, उत्पीडन सब समाप्त हो गया है और मोदी चुनो या राहुल। प्राकृतिक संपदाओं पर इजारेदार कंपनियों के नाम कर दिया जायेगा और आप विस्थापित हो जायेंगे आपको मुफ्त भोजन मिल जायेगा और पालतू जानवरों की तरह आप दुम हिलाते नजर आयें इसकी पूरी सम्भावना है कि इस चुनाव के बाद चाहे यह मुखौटा जीत कर आये, चाहे वह मुखौटा जीत कर आये करने की व्यवस्था हो गयी है। आम आदमी का का और उसके मत का कोई अर्थ नहीं रह जायेगा क्यूंकि सम्मोहन करने वाले जादूगर अपने-अपने आकाओं की तरफ से जादू का प्रदर्शन कर रहे हैं
             इसी कड़ी में मोदी के  रैली स्थल पर  20 एलईडी लगाए जाएंगे। दिल्ली की प्रमुख जगहों पर 100 एलईडी लगे हुए है जिस पर मोदी का भाषण लाइव दिखाया जाएगा। इस रैली में 20 हजार से ज्यादा मुस्लिम भी जुटेंगे, छात्रों के लिए विशेष युवा पास बनाए गए हैं जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है।
     मोदी के लिए 80 फुट लंबे और 40 फुट चौड़े मंच को तैयार किया गया है। इस मंच की कीमत तकरीबन नौ करोड़ रुपये आंकी जा रही है। खबरों के मुताबिक मोदी पहले अहमदाबाद से दिल्‍ली एयरपोर्ट पहुंचेंगे और यहां से चॉपर के जरिए सेक्‍टर 35 स्थित हेलीपैड पर उतरेंगे और फिर उनकी कारों का काफिला आयोजन स्‍थल तक पहुंचेगा। यह रुपया कौन खर्च कर रहा है जो खर्च कर रहा है वही सरकार का मालिक होगा.
          वहीँ राहुल गांधी ने आरपी संजीव गोयनका समूह के चेयरमैन संजीव गोयनका और एक्सिस बैंक की सीईओ शिखा शर्मा सहित उद्योगपतियों के एक छोटे समूह से मुलाकात की। बैठक में बंगाल अंबुजा हाउसिंग डेवलपमेंट के प्रबंध निदेशक हषवर्धन निओतिया और पूर्ववर्ती हिन्दुस्तान यूनिलीवर के सीईओ नीतिन परांजपे भी शामिल थे।  यह  भी अपने अपने मालिकों को वफादारी का विश्वास दिला रहे हैं।  

सुमन 

3 टिप्‍पणियां:

Darshan jangra ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - सोमवार - 30/09/2013 को
भारतीय संस्कृति और कमल - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः26 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

जो खर्च कर रहा है वही सरकार का मालिक होगा. !!!

RECENT POST : मर्ज जो अच्छा नहीं होता.

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर .
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