सोमवार, 17 फ़रवरी 2014

आप का पलायानवाद

 कुछ ही दिनों पहले हमने आप के बारे में कुछ बातें कहीं थी और उसके पलायनवाद तथा अराजकतावाद के बारे लिखा था. इस बीच केजरीवाल ने इस्तीफ़ा देकर वे सारी बातें सही साबित कर दी हैं. 
आम आदमी पार्टी की सरकार ठीक 49 दिनों तक चली. फिर केजरीवाल ने अचानक इस्तीफ़ा दे दिया, यह भूलते हुए की उन्होने जनता से क्या वादे किए थे! वोटरों ने बड़े विश्वास से उन्हे चुना था. आप सरकार और उसके मंत्रियों एवं नेताओं ने बड़े -बड़े वादे किए और भ्रष्टाचार ख़ात्मा करने, बिजली और पानी की समस्या हल करने, उनकी कीमतें कम करने, मंत्रियों और नेताओं को ताम झाम और अनावश्यक सुविधाओं से मुक्त करने, लाल बत्ती संस्कृति समाप्त करने इत्यादि ना जाने कितने वादे किए थे. 
लेकिन अचनाक ही आप पार्टी सत्ता त्याग कर भाग खड़ी हुई. आख़िर क्यों ? इसका रहस्य क्या है? वास्तव में आप पार्टी अपनी ज़िम्मेदारी से भारही है. इसने शासन को एक खेल समझ रखा था. दूसरों की आलोचना करना आसान है. लेकिन आप ने उन समस्याओं को हल करने का एक भी कदम नहीं उठाया. जब उसने देखा की शासन और प्रशासन तथा सरकार चलना एक कठिन काम है तो लोकपाल के बहाने इस्तीफ़ा दे दिया. उनकी सरकार को कोई ख़तरा नहीं था, कांग्रेस समर्थन वापस नहीं ले रहा था. किसी ओर से कोई दबाव नहीं था. फिर भी वे ज़िम्मेदारी से भाग खड़े हुए. वे पलायनवाद का शिकार हो गये.  
इन 49 दिनों के बाद दिल्ली को पहले से भी गड़बड़ी और अराजकता की स्तिथि में डाल दिया. कम से कम पहले दिल्ली में कुछ काम हो रहा था, विकास के कार्यक्रम चलाए जा रहे थे, प्रशासन था, और गड़बड़ियाँ भी थी.  
लेकिन अब दिल्ली के लोगों के पास ना प्रशासन है और ना ही कोई कार्यक्रम और ना दिशा. जनमत संग्रह का तमाशा, बिजली और पानी संबन्धी उल्टे-सीधे कदम जो अधूरे और बिना हल के रह गये, बिजली कम्पनियों को करोड़ों अरबों की सब्सिडी, महिलाओं और विदेशियों के बारे में ग़लत, अश्लील और रंगभेद वादी टिप्पणियाँ, यह रही आप की विरासत जो वह दे गयी. आप के राज में अब आधे से कम ही लोगों को पानी मिल रहा है. बिजली का तो कहना ही क्या! जो उनके आंदोलन में थे उनको मुफ़्त बिजली, और जो नहीं थे उनको ज़्यादा दामों में. पानी/बिजली की सप्लाई में भारी गड़बड़ी. 
भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने का दंभ भरने वाले खुद ही उसमे फँस गये. आप के मंत्रियों ने करोड़ों रुपये लेकर शराब के ठेके खुलवाना शुरू किया था. सरकारी कह्र्चा पर घरेलू इस्तेमाल का समान लेने लगे थे जैसे फ्रिज, सोफा, कार, फर्निचर, और कई दूसरी सुविधायें. केजरीवाल ने जानबूझकर सी. एम. बंगलो वाला तमाशा खड़ा किया और उसमे करोड़ों सरकारी रुपये बर्बाद करवाए. 
बाद में आप के समझ में गया की अब उनसे ना जनता की समस्याएं हल होंगी और ना वे कुछ कर पाएँगे. इसलिए निकलने का रास्ता खोजने लगे. वे सरकार को सड़क पर लाकर तमाशे करने लगे, टीवी से सबको दिखाने लगे. दूसरे शब्दों में वे अपने दफ़्तरों में बैठकर ज़िम्मेदारी का काम करने के बजाए उससे भागने लगे. 
केजरीवाल ने कहा था कि वे अराजकतावादी हैं. यह सही कहा, एकमात्र सही बात! अराजकतावाद ही पलायनवाद होता है. वो ठोस कामों से भागता है; वो संगठन, व्यवस्था, अनुशासन, जनता के काम करने से कोसों दूर रहकर केवल लम्पटई और आलोचनाएँ करता है. 
अराजकतावाद जनता की ज़िम्मेदारियों से अपलायनवाद है. इतिहास इसे बार बार साबित कर उसे त्याग चुका है. आप के अराजकतावाद में तो कोई दूरगामी विचारधारा औरसिद्धान्त भी नहीं है. विचारधारा का ना होना भी एक विचारधारा है. 
यह सब करके आप और केजरीवाल किसकी सेवा में लगे हुए हैं? जवाब देंगे? उनसे बार बार पूछा गया की आप के धन पैसों का देश के अंदर और बाहर स्रोत क्या है तो चुप्पी रखी. अख़बारों की रिपोर्टो के अनुसार देश के अंदर के बड़े पूंजीपतियों और बाहर से अमरीका तथा अन्य देशों से आप को पैसे रहे हैं. क्या यह सच है? आप चुप क्यों है? 
अराजकतावाद का यही हश्र होता है. झूठे और खोखले नारे देकर, सतही आलोचना करके वे जनता को बरगलाते हैं और थोड़ी देर के लिए भोली भाली जनता झाँसे में जाती है 
आप को समझ लेना चाहिकी ऐसा ज़्यादा देर नहीं चलता है. आप ने दिल्ली की जनता और साथ ही देश की जनता के साथ ग़लत व्यवहार किया है. 
यदि उसे सचमुच जनता के लिया काम करना है तो झूठे वादे करना बंद करके सच्चे विचारों के साथ जनता का काम करना होगा और समय आने पर काम कर के दिखना भी होगा. 
पलायनवाद और अराजकतावाद जनता की समस्याओं का हल नहीं है

--अनिल राजिमवाले

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